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समावेशी विकास का आकलन

वाशिंगटन, डीसी – अगले वर्ष जब मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स (एमडीजी) की अवधि समाप्त हो जाएगी, तो विश्व इनके आरंभ किए जाने से लेकर अब तक की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में बता सकेगा। इस अवधि के दौरान चरम गरीबी आधी हो गई है; एक अनुमान के अन���सार मलिन बस्तियों में रहने वाले 100 मिलियन लोगों को सुरक्षित पेय जल तक पहुँच प्राप्त हो गई है, और लाखों लोगों को स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध हो गई है; और लड़कियाँ अब बड़ी संख्या में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। लेकिन अभी काफी काम अधूरा बचा है और निष्पादन संबंधी महत्वपूर्ण विसंगतियाँ भी बनी हुई हैं।

2015 के बाद का विकास कार्यक्रम कार्यकलापों को वहाँ से जारी रखेगा जहाँ पर एमडीजी ने छोड़ा है, और साथ ही समावेशन, धारणीयता, रोज़गार, विकास, और नियंत्रण से संबंधित अतिरिक्त लक्ष्यों को भी इसमें सम्मिलित करेगा। आगामी धारणीय विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए कार्यक्रमों का विकास, कार्यान्वयन और मूल्यांकन किस तरह किया जाता है।

सुदृढ़ आर्थिक विकास लोगों को अपने जीवन को सुधारने के लिए सक्षम बनाता है और नए विचारों को फलने-फूलने के लिए जगह देता है। लेकिन इस तरह का विकास अक्सर पर्यावरण क्षरण को अपने साथ लेकर आता है जिससे मानव स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में ह्रास होता है, जल आपूर्तियों के लिए जोखिम पैदा होता है, और पारिस्थितिकी तंत्र के साथ समझौता करना पड़ता है, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए विकास में बाधा आती है। इसके अलावा, अल्पकालिक विकास जिससे प्राकृतिक पूंजी का ह्रास होता है, विस्तार और संकुचन चक्रों के लिए संवेदनशील होता है, और जो लोग गरीबी रेखा के निकट रहते हैं, उनका स्तर और नीचे गिर जाता है।

विकास पर दीर्घकालीन दृष्टि से विचार करना और सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय औचित्य के लिए उत्तरदायी होना 2015 के बाद के विकास कार्यक्रम के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एसडीजी की चर्चा में अब शहरी आयोजना और जैव विविधता के साथ, भोजन, पानी, और ऊर्जा सुरक्षा को शामिल करने की आवश्यकता पर भी विचार किया जा रहा है। लेकिन देश के स्तर पर संभावित लक्ष्यों के बारे में कार्रवाई करना नीति संबंधी मार्गदर्शन और प्रगति को मापने के लिए आकलन योग्य और सार्थक संकेतकों के बिना संभव नहीं होगा।

इसके आकलन का एक तरीका "प्राकृतिक पूंजी लेखाकरण" है जिसमें विकास योजना और राष्ट्रीय खातों में प्राकृतिक संसाधनों के मूल्य का आकलन ठीक उसी तरह किया जाता है जिस तरह कोई परिवार अपनी नियमित आय में से कितनी आय का उपभोग किया जाए इसका निर्णय करने के लिए अपने घर की कीमत - और उसके रखरखाव की लागत - का हिसाब लगाता है। विश्व आर्थिक मंच की हाल ही की एक रिपोर्ट में समावेशी और धारणीय विकास के लिए एक “डैशबोर्ड” का प्रस्ताव किया गया है। इस मॉडल में प्राकृतिक पूंजी लेखाकरण, मानव अवसर सूचकांक, लिंग अंतराल सूचकांक, सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में सार्वजनिक निवेश के उपायों, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सूचकांक, साझा समृद्धि के संकेतकों, समग्र न किए गए बेरोज़गारी के आँकड़ों को एक जगह लाया गया है।

विश्व बैंक के नेतृत्व वाली साझेदारी, संपत्ति लेखाकरण और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन (WAVES) ने सरकारों को यह दिखाया है कि किस तरह कुछ व्यवहार प्राकृतिक परिसंपत्तियों को कम करते हैं, और किस तरह प्राकृतिक पूंजी लेखाकरण अधिक टिकाऊ विकास नीतियाँ स्थापित करने में मदद कर सकता है। 2012 रियो + 20 शिखर सम्मेलन में एक अभियान के बाद, 70 सरकारों ने, 40 मध्यम और कम आय वाले देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकारों सहित, प्राकृतिक पूंजी लेखाकरण का समर्थन किया।

इस पद्धति का दुनिया भर में पहले से ही अच्छा उपयोग किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, “वन खातों” से यह पता चला है कि मध्य और दक्षिण अमेरिका में ग्वाटेमाला में वनों की कटाई की सबसे तेज़ दर है जहाँ परिवारों द्वारा अपनी खाना पकाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे अधिक अनियंत्रित कटाई की जाती है। इस जानकारी ने ग्वाटेमाला सरकार को देश के वानिकी कानून की समीक्षा करने, और, जलाऊ लकड़ी के उपयोग को नियंत्रित करने, नई रणनीतियों के लिए निधियाँ मुहैया करने, वनों की अनधिकृत कटाई को रोकने, और परिवारों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया है।

अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के लिए बोत्सवाना द्वारा किए गए प्रयासों में पानी की कमी के कारण बाधा आ रही है; लेकिन "पानी के खातों" से सरकार को - कृषि, खनन, और पर्यटन सहित - उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल रही है जो पानी की कम-से-कम खपत के साथ विकास कर सकते हैं।

फिलीपींस में, जहाँ मेट्रो मनीला के लगुना झील क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद का 60% उद्योगों और संबद्ध सेवाओं द्वारा उत्पन्न होता है, प्रदूषण और गाद ने झील की गहराई को कम करके पहले ही एक तिहाई तक कर दिया है। "पारिस्थितिकी तंत्र खातों" ने यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि इस संसाधन का प्रबंधन किस तरह बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इन खातों का उपयोग भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में वन प्रबंधन में सुधार करने के लिए पहले से ही किया जा रहा है जहाँ वन दो प्रमुख विकास क्षेत्रों, पर्यटन और जल विद्युत उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हैं।

ये अनुभव 2015 के बाद के विकास कार्यक्रम का स्वरूप निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। धारणीयता को सम्मिलित करने से सरकारें और व्यवसाय अपने निर्णयों के पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सभी सरकारों से आह्वान किया गया है कि वे प्राकृतिक पूंजी लेखाकरण को अपनाएँ जिसके फलस्वरूप उनके धारणीयता के प्रयास संगत, सटीक, और दीर्घकाल में तुलनीय हो सकते हैं। धारणीयता को इस रूप में संस्थागत बनाने से यह रोज़मर्रा के शासन का एक अभिन्न अंग बन जाएगी।

केवल वृद्धि और विकास की व्यापक समझ को अपनाने से दुनिया असमानता और धारणीयता की गंभीर समस्याओं का समाधान कर सकती है। इस समझ को एसडीजी के मूल में रखने से भविष्य में लंबे समय तक सभी समाजों के स्वास्थ्य और भलाई को सुधारने में मदद मिलेगी।