विकास वित्त में नए युद्ध-क्षेत्र

प्रिटोरिया - उभरते देशों में बुनियादी ढाँचे के विकास का समर्थन करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की लोकप्रियता दुनिया भर में बढ़ रही है। वैश्विक विकास को बढ़ावा देने और रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए जी-20 PPP का समर्थन करते हैं। BRICS अर्थव्यवस्थाएँ (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका) उन्हें ज़रूरी बुनियादी ढाँचे का निर्माण शीघ्रता से और सस्ते में करने के एक उपाय के रूप में देखती हैं। संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद है कि बुनियादी ढाँचे की PPP इसकी 2015 के बाद की वैश्विक विकास कार्यसूची को पूरा करने के लिए साधन प्रदान करेगी। PPP का नया आकर्षण न केवल विकास अर्थशास्त्र को, बल्कि अमीर और ग़रीब देशों के बीच समग्र रिश्ते को भी फिर से परिभाषित कर सकता है - हालाँकि जरूरी नहीं है कि यह बेहतरी के लिए ही हो।

PPP की गाड़ी में तीन ज़रूरी घटक हैं: बुनियादी ढाँचा वित्त में विस्फोट (पेंशन और अन्य बड़ी निधियों द्वारा समर्थित); देशों के कच्चे माल का फ़ायदा लेने के लिए आकर्षक विशाल-PPP परियोजनाओं की "पाइपलाइनें" तैयार करना; और पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों की समाप्ति। PPP के उपयोग का विस्तार होने के साथ इनमें से प्रत्येक की ध्यानपूर्वक निगरानी की जानी चाहिए।

विश्व बैंक पहले ही एक दशक के भीतर बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का विस्तार करके अपने ऋण को दोगुना करना चाह रहा है। इसकी नई वैश्विक बुनियादी ढाँचा सुविधा (GIF) विशिष्ट परिसंपत्ति वर्ग के रूप में बुनियादी ढाँचे में निवेश करने के लिए वैश्विक पेंशन और श्रेष्ठ संपदा निधियों को जुटाएगा।

उभरती दुनिया भी सक्रिय रही है। BRICS ने हाल ही में बुनियादी ढाँचे और सतत विकास के लिए नए विकास बैंक (NDB) की योजनाओं की घोषणा की है। अफ़्रीका के लिए इसका पहला क्षेत्रीय केंद्र दक्षिण अफ़्रीका में स्थित होगा। चीन नया एशियाई बुनियादी ढाँचा निवेश बैंक आरंभ करेगा। इन दोनों बैंकों का लक्ष्य क्रमशः, अमेरिका के नेतृत्व वाले विश्व बैंक और जापान के नेतृत्व वाले एशियाई विकास बैंक के लिए विकल्पों की पेशकश करना है।

निश्चित रूप से, इन नई विकास-वित्त संस्थाओं को ब्रेटन वुड्स संस्थाओं के ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी नव-उदार मितव्ययिता नीतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सत्ता साझा करने के लिए उनकी अभिशासन संरचनाओं में सुधार की विफलता को सार्वजनिक ख़र्च के निरोध, अन-औद्योगीकरण, और राष्ट्रीय विकास बैंकों की समाप्ति का दोषी ठहराया गया है।

अनेक उभरते देश विश्व बैंक के पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों से भी नाखुश दिखाई देते हैं, जिन्हें वे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौते के रूप में देखते हैं। इस आलोचना की प्रतिक्रिया में, बैंक अपने सुरक्षा उपायों और प्रवर्तन तंत्रों में संशोधन कर रहा है। लेकिन विश्व बैंक द्वारा कमज़ोर निरीक्षण के परिणामस्वरूप पर्यावरण और सामाजिक मानकों की निगरानी का काम खुद ऋण प्राप्तकर्ता पर आ जाएगा - भले ही उनके संसाधन या उनकी इसे करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति कुछ भी हो - और इससे स्वदेशी लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के प्रयास, विस्थापित लोगों को फिर से बसाने के काम, पर्यावरणीय क्षति को कम करने, या जंगलों और जैव-विविधता की रक्षा करने का काम ख़तरे में पड़ जाएगा।

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विश्व बैंक के सुरक्षा उपाय कमजोर होने से "अधिकाधिक शोषण" की स्थिति प्रारंभ हो सकती है, जिसमें निजी या राज्य निवेशक, नई वित्तीय संस्थाएँ, और अविनियमित विश्व बैंक लोकप्रिय प्रतिक्रिया को उकसाते हुए एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि नागरिकों के समूहों का होना महत्वपूर्ण है जो यह सुनिश्चित करने के लिए इसमें शामिल हो सकते हैं कि निवेश निष्पक्ष रूप से संचालित किए जाते हैं। हालाँकि नागरिक-समाज के समूह लंबे समय से "आपूर्ति पक्ष" - परियोजना वित्त-पोषण - पर नज़र रखते आ रहे हैं लेकिन वे अकसर "माँग पक्ष" अर्थात, कार्यान्वित की जा रही परियोजनाओं के मूल्य और प्रभावों की उपेक्षा कर देते हैं।

यह ख़ास तौर से ऊर्जा, जल, परिवहन, और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में बुनियादी ढाँचे में निवेश के मामले में होता है। उदाहरण के लिए, अफ़्रीका में बुनियादी ढाँचा विकास के लिए कार्यक्रम में 2040 तक इन क्षेत्रों में $360 बिलियन मूल्य की "विश्वसनीय विशाल-परियोजनाओं" की योजना बनाई गई है। खनन कार्य और तेल और गैस पाइपलाइनों के समर्थन के लिए PIDA सौर, पवन, और भूतापीय जैसी अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को दरकिनार करते हुए, ऊर्जा (ख़ास तौर से जल-विद्युत) परियोजनाओं को प्राथमिकता देता है। इसी तरह की चिंताएँ एशिया में दक्षिण अमेरिका में क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे के एकीकरण की पहल और आसियान बुनियादी ढाँचा निधि की परियोजना "पाइपलाइन" के मामले में भी हैं।

हालाँकि कुछ PPP परियोजनाएँ उच्च प्रतिलाभ देनेवाली होती हैं, लेकिन वे मेज़बान सरकार से अतिरिक्त भारी गारंटियों की भी माँग करती हैं ताकि निजी क्षेत्र के जोखिम की भरपाई हो सके। इस तरह, जिस तरीके से ये सौदे किए जाते हैं और उत्तर-दक्षिण और दक्षिण-दक्षिण एकीकरण के समग्र व्यवहार दोनों में मौलिक तनाव पैदा होते हैं।

उदाहरण के लिए, जी-20, जी-7 और BRICS के भीतर शक्तिशाली समूह और बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेशनों (जैसे विश्व आर्थिक मंच, जनरल इलेक्ट्रिक, और रियो टिंटो) प्रभावी होते जा रहे हैं, जिनके सदस्य संसाधनों और बाज़ारों तक पहुँच के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इस प्रतिस्पर्धा में अब बड़े बाँधों और जीवाश्म ईंधन के बुनियादी ढाँचे पर चिंताजनक भरोसे के साथ PPP को गति देने और दोहराने के लिए नया बुनियादी ढाँचा परियोजना निर्माण की सुविधाएँ (IPPFs) हैं, जैसे यूरोपीय संघ के लिए नाइजीरिया की गैस-आपूर्ति पाइपलाइन - जो PIDA की शीर्ष प्राथमिकता है जिसका तात्पर्य है न्यून-कार्बन भविष्य की दिशा में प्रगति का धीमा होना ।

दरअसल, स्थिरता के लिए संघर्ष नया युद्ध-क्षेत्र बन रहा है, ख़ास तौर से अफ़्रीका में, जिसमें BRICS, जी-20, एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC), मर्कोसुर, और अन्य अंतर्राष्ट्रीय समूहों और स्थानीय निहित स्वार्थों द्वारा नियोजन किए जा रहे हैं। इस खेल को समझने के लिए नए कठोर विकास प्रतिमान की ज़रूरत है। यह कठिन चुनौती है, क्योंकि नए दबावों को झेलने के तरीके सीखने में सबसे अधिक रुचि रखनेवाले नागरिक समाज संगठनों में, इसकी व्यापक दृष्टि होने के बजाय कि विकास वित्त संस्थाएँ और उनके बड़े शेयरधारक कैसे काम करते हैं, विशिष्ट विकास क्षेत्रों में विशेषज्ञता की प्रवृत्ति होती है, जैसे सहस्राब्दि विकास लक्ष्य, या क्षेत्रीय मुद्दे। WEF का संतुलनकारी होने के अपने मूल अभिप्रेत पर लौटकर, पुनर्जीवित विश्व सामाजिक मंच इस काम में लग सकता है।

अफ़्रीका में, जिन अखिल-अफ़्रीकी निकायों को समन्वित निरीक्षण और कार्यसूची-निर्धारण के अधिकार दिए गए हैं उनका मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि क्या बुनियादी ढाँचे में विशाल-PPP औपनिवेशिक-शैली के दोहन और उपभोग अर्थव्यवस्था का समर्थन करते हैं, या आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सतत अर्थव्यवस्था का निर्माण करते हैं।

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