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जीवनरक्षक धारणाएं

जेनेवा. उत्तरी नाइजीरिया में 200 से अधिक लड़कियों की दुर्दशा इस बात की निर्मम याद दिलाती है कि अफ्रीका में बच्चे-खासकर लड़कियां कितनी असुरक्षित हो सकती हैं. लेकिन यह जानना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है कि यह स्थिति आधुनिक अफ्रीका की सही झलक नहीं दिखलाती है. अफ्रीका के नेतागण अपने देश के बच्चों की सुरक्��ा को लेकर अत्यंत प्रतिबद्घ हैं. अमीर देशों में बच्चों को जैसी सुरक्षा उपलब्ध है वैसी सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए दो महत्त्वपूर्ण घटकों की जरूरत हैः साझेदारी और विश्वास या धारणा.

ऐसा इसलिए है कि हालांकि आतंकवाद एक भीतरी खतरा तो है, पर अफ्रीका के बच्चों को सब से बड़ा खतरा है बीमारी का जिसे नियमित टीकाकरण के जरिये सामान्यतः टाला जा सकता है. सचमुच, आज जहां सारी दुनिया लापता बच्चियों को छुड़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ उपायों पर चर्चा कर रही है, वहीं एक दूसरी मुसीबत सिर उठा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में पोलियो के फैलाव को अंतर्राष्ट्रीय जन-स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. अनेक अफ्रीकी देशों से इस भयावह बीमारी का दूसरे देशों में फैलने का खतरा है.

सौभाग्य से आज पोलियो व कई अन्य बीमारियां जो टीकों से रोकी जा सकती हैं से लड़ने के तत्कालिक एवं ठोस उपाय मौजूद हैं. वर्तमान में ये बीमारियां अफ्रीका व अन्य जगहों पर अनगिनत मासूम जिंदगियां छीन लेती हैं. इसके अलावा अफ्रीकी नेतागण मानते हैं कि नियमित टीकाकरण ही बच्चों को लंबे समय तक और स्थायी रूप से बीमारियों से बचाने का सर्वोत्तम उपाय है. इस महीने के आरंभ में नाइजीरिया की राजधानी आबुजा में अफ्रीकी नेताओं की बैठक में ‘इम्युनाइज अफ्रीका 2020 डिक्लेरेशन’ का प्रस्ताव पास किया गया. इसमें इन नेताओं ने अपने देशों के बच्चों के स्वस्थ व सुनहरे भविष्य में निवेश करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

ऐसी घोषणाएं महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि केवल अपने विश्वास के बल पर ही हम सच्चे अर्थों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. और सचमुच परिवर्तन हो रहा है. सन् 2001 से अफ्रीका में 140 से अधिक टीकाकरण अभियान चलाए गए. इसका श्रेय स्थानीय नेतृत्व को और मेरे संगठन गावी (GAVI) अलाइंस द्वारा दिए गए समर्थन को जाता है. इसके सहयोगी यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन व बिल एंड मोलिंडा गेट्स फाउंडेशन भी धन्यवाद के पात्र हैं. इस तरह के कार्य के फलस्वरूप अफ्रीका में टीकाकरण का दायरा बढ़ा है. 1980 में यह 10% था और 2012 में 72% हो गया.

और अब, 2016 से 2020 तक अफ्रीका के 50 से ज्यादा देश गावी व इसके सहयोगियों के माध्यम से बच्चों के टीकाकरण की लागत में 70 करोड़ डॉलर का योगदान देंगे. इससे अफ्रीका गावी में यूनाइटेड किंगडम, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा नार्वे के बाद चौथा सबसे बड़ा निवेशक बन जाएगा. इस तरह की वचनबद्धता विकास सहायता में बदलाव की सूचक है जो साझेदारी पर निर्मित परोपकार के पारंपरिक मॉडल से हटकर है.

लेकिन इस तथ्य की रोशनी में कि अफ्रीकी देश स्वास्थ्य सेवाओं में पहले ही अरबों डॉलर खर्च कर चुके हैं और इस महाद्वीप की अन्य भी अनेक जरूरतें हैं, टीकाकरण में निवेश करना हमेशा ही स्पष्ट चुनाव नहीं हो सकता है.

सन् 2003 में नार्वे में ऐसी ही स्थिति थी जब स्वास्थ्य व सामाजिक मामलों के मंत्री के तौर पर मैंने सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर पाबंदी लगाने का अभियान चलाया था. उस वक्त इस पाबंदी का घोर विरोध हुआ था और संसार के सबसे घटिया तानाशाहों से मेरी तुलना की जाने लगी थी. पर मैं जानता था कि इस कदम से आने वाले वर्षों में कई जिंदगियां बच जाएंगी. मुझे पूरा विश्वास था कि अगर मैंने कार्यवाई नहीं की तो मतलब था कि मैं अपना काम सही तरीके से नहीं कर रहा था. और इसमें मैं अकेला नहीं था. आयरलैंड के स्वास्थ्य मंत्री मुझसे सहमत थे.

और जैसे-जैसे व्यक्तियों व समाज को मिलने वाले लाभ स्पष्ट होने लगे, 100 से ज्यादा अन्य देशों ने नार्वे और आयरलैंड की इस पहल को अपनाया. आज नार्वे में धूम्रपान करने वालों की तादाद आधी हो गई है. दस में से नौ लोग इस पाबंदी का समर्थन करते हैं. पूर्वदृष्टि का लाभ यही है कि कुछ समाधान स्पष्ट दिख सकते हैं, पर उस समाधान को जमीन पर उतारने के लिए विश्वास का बल चाहिए.

अफ्रीका व दुनियाभर के गरीब देशों में टीकाकरण अभियान के साथ भी आज ऐसी ही स्थिति है. इन देशों के नेतागण यह देख चुके हैं कि रोग-प्रतिरोधक टीकों से क्या हासिल किया जा सकता है. उन्हें आने वाले वर्षों में टीकाकरण से और लाभ भी दिखाई दे रहे हैं. वास्तव में सन् 2000 में अपनी शुरूआत से ही गावी 44 करोड़ लोगों के टीकाकरण में अपना सहयोग दे चुका है. इससे 60 लाख जाने बचाने में मदद मिली है.

अब गावी अलाइंस के साझेदार और दानदाता अगले पांच साल के लिए गावी को धन उपलब्ध कराने की योजना पर विचार करने के लिए इस हफ्ते ब्रूसेल्स में बैठक कर रहे हैं. यहां और अधिक करने का सच्चा अवसर है. गावी के समर्थन से अपनी पहुंच के भीतर हमारे पास 2020 तक आज से दुगुनी तादाद में बच्चों के टीकाकरण का अवसर है. यह संख्या एक अरब तक पहुंच सकती है और आज से 2020 तक 50 लाख से अधिक मौतों को टाला जा सकता है.

अफ्रीकी नेताओं ने अपने संकल्प को दर्शा दिया है. पर ऐसे वक्त में जब अनेक दानदाता देश अपनी छिन्न-भिन्न अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके नेताओं को वचनबद्धता और विश्वास दोहराने के लिए समय चाहिए. कोई भी इस कार्य को अकेला नहीं कर सकता है. पर भागीदारी के जरिये हम सचमुच में संसार के सबसे असुरक्षित बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने में मदद कर सकते हैं.