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दीनहीन लोगों की उपेक्षित बीमारियाँ

वाशिंगटन, डीसी – पोप फ्रांसिस ने जब सितंबर में संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा किया, तो उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस और संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ऐतिहासिक भाषण दिए। फ्रांसिस ने अपने गश्ती पत्र, लाउडैटो सी की भावनाओं की विशेष बातों का उल्लेख करते हुए, ऐसी मानवीय पीड़ा के प्रति कार्रवाई करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला, जो शरणार्थियों और चरम गरीबी में रहने वाले लोगों के प्रति होनी चाह��ए, और सामाजिक बहिष्कार और असमानता पर काबू पाने के लिए वैश्विक एकजुटता के लिए आह्वान किया।

पोप के निवेदन के फलस्वरूप हमारा ध्यान मानवीय पीड़ा के हर पहलू की ओर जाना चाहिए, विशेष रूप से उन पहलुओं पर जो सबसे दीनहीन लोगों को प्रभावित करते हैं। इनमें से एक पहलू उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों (एनटीडी) का है। परजीवी और संबंधित संक्रमणों का यह समूह – लसीका फाइलेरिया (या फ़ीलपाँव), पेट के कीड़े, और रक्त पर्णकृमि द्वारा उत्पन्न परजीवी रोग (शिस्टोसोमिएसिस) सहित, गरीबी का अभिशाप है। इन बीमारियों से प्रति वर्ष लगभग 1.4 अरब लोग ग्रस्त होते हैं, जिनमें 500 मिलियन से अधिक संख्या बच्चों की होती है, जिनसे उन्हें बहुत अधिक पीड़ा और कष्ट सहन करना पड़ता है, और इससे उनकी उत्पादकता में कमी होने से उनकी गरीबी और बढ़ जाती है।

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पिछले दशक के दौरान, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के विरुद्ध महत्वपूर्ण प्रगति की है। उदाहरण के लिए, निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने वाली प्रमुख दवा कंपनियों की उदारता के फलस्वरूप इलाज के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

लेकिन, दुर्भाग्यवश, प्रगति के उत्साहजनक संकेतों के बावजूद, इन निवारणीय रोगों के जोखिम वाले लोगों में से मुश्किल से 40%  लोग वह दवा प्राप्त कर पाते हैं जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है। एक अरब से अधिक लोगों को अभी भी संभावित दुर्बलता वाली दशाओं के लिए उन उपचारों तक पहुँच नहीं मिल पाती है जिन्हें उपलब्ध करने की प्रति व्यक्ति लागत $0.50 से कम होती है। यह केवल चिकित्सा संबंधी गंभीर मुद्दा ही नहीं है; बल्कि यह एक गंभीर नैतिक समस्या भी है, यह एक ऐसी समस्या है जिसका सामना हम में से उन लोगों को हर रोज़ करना पड़ता है जो गरीब लोगों के साथ काम करते हैं।

इस समस्या को हल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की विफलता का कारण जितना सरल है उतना ही घिनौना भी है: अधिकांशतः, उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग केवल सबसे गरीब और सबसे ज्यादा उपेक्षित लोगों को सताते हैं। जैसा कि फ्रांसिस ने लाउडैटो सी में बताया है "जो समस्याएँ विशेष रूप से वर्जित लोगों को सताती हैं उनके बारे में स्पष्ट रूप से जागरूकता के मामले में लगभग कोई बाधा नहीं है।" वास्तव में, "उनका अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं में उल्लेख होता है, लेकिन लोगों की अक्सर यह धारणा होती है कि उन लोगों की समस्याओं को बाद में आए विचार के रूप में उठाया जाता है।"

पोप की अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा एक महत्वपूर्ण समय पर हुई है। कांग्रेस राजकोषीय वर्ष 2016 के लिए व्यय के विधेयकों को अंतिम रूप दे रही थी, और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर अपने काम को पूरा कर रहा था, उन लक्ष्यों को निर्धारित कर रहा था जो अगले 15 वर्षों के लिए विकास नीति का मार्गदर्शन करेंगे। दोनों संगठन पोप के शब्दों पर अमल करने का पूरा प्रयास करेंगे।

यह महत्वपूर्ण है कि अमेरिका इस वर्ष और आने वाले वर्षों में, संघीय बजट में इलाज के कार्यक्रमों के लिए निधियाँ देना जारी रखकर उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के मामले में अपने प्रभावशाली नेतृत्व को जारी रखे। जैसा कि फ्रांसिस ने कांग्रेस के सदस्यों को याद दिलाया था, "तीसरी सहस्राब्दी के इन पहले के वर्षों में लोगों को चरम गरीबी से बाहर निकालने के लिए कितना काम किया गया है! मैं जानता हूँ कि आप मेरी इस धारणा से सहमत हैं कि अभी भी बहुत अधिक काम किया जाना बाकी है, और यह कि संकट और आर्थिक कठिनाई के समय में वैश्विक एकजुटता की भावना को भूलना नहीं चाहिए।"

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, हमें इससे प्रोत्साहन मिलता है कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को 2015 के बाद विकास के एजेंडा में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के खिलाफ लड़ाई को उच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया है। विशेष रूप से, उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए वैश्विक सूचक - "उन लोगों की संख्या जिन्हें उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों से लड़ने के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता है" - को एसडीजी निगरानी ढांचे में शामिल किया गया था। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि अगले 15 वर्षों में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों पर अंततः उतना ध्यान दिया जाता है जितना दिया जाना चाहिए।

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फ्रांसिस जिसे "अनिच्छा का वैश्वीकरण" कहते हैं उसे दूर करने के लिए हम सबसे बुनियादी कदम यह उठा सकते हैं कि हम उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के खिलाफ निर्णायक, मापनीय कार्रवाई करने का समर्थन करने के लिए एकजुट हो जाएँ। इन रोगों को नियंत्रित करने और हमेशा के लिए समाप्त करने के मार्ग में हमारी प्रगति को चिह्नित करने के लिए एक वैश्विक मापदंड शुरू करना गरीबों के साथ हमारी एकजुटता का सच्चा प्रदर्शन है।

फ्रांसिस ने अपने संयुक्त राष्ट्र के भाषण में हमारा ध्यान एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर दिलाया है: "अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों से थोड़ा हटकर, हम उन वास्तविक पुरुषों और महिलाओं के संपर्क में आते हैं जो जीते हैं, संघर्ष करते हैं और दुःख भोगते हैं, और अक्सर उन्हें सभी अधिकारों से वंचित रहकर घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।" यदि अपनी सभी प्रौद्योगिकीय प्रगतियों और निजी क्षेत्र की कल्पनातीत दान राशियों के साथ, हम प्रति व्यक्ति मात्र कुछ पैसों से सबसे गरीब लोगों की दुर्दशा को नहीं बदल सकते, तो हम जिन अधिक चुनौतीपूर्ण, स्वास्थ्य और विकास की महंगी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन पर हम सही मायने में काबू पाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?