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स्वतंत्र और समान रहना

मैड्रिड - 1990 में पहली मानव विकास रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद से चौथाई सदी में, दुनिया ने गरीबी कम करने और लाखों करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, और रहन-सहन में सुधार के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है। और इसके बावजूद, चाहे ये लाभ कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उनका वितरण समान रूप से नहीं हुआ है। देशों के बीच और उनके भीतर, दोनों ही दृष्टियों से मानव विकास में गहरी असमानताएँ बनी हुई हैं।

शिशु मृत्यु दर पर विचार करें। आइसलैंड में, हर 1,000 जीवित जन्मों में से, दो बच्चे अपने पहले जन्मदिन से पूर्व ही मर जाते हैं। मोजाम्बिक में, यह आंकड़ा हर 1,000 जीवित जन्मों के लिए 120 बच्चों की मृत्यु का है। इसी तरह, बोलीविया में कम-से-कम माध्यमिक शिक्षा प्राप्त माताओं से जन्मे बच्चों की तुलना में शिक्षा रहित महिलाओं से जन्मे बच्चों की एक वर्ष के भीतर मृत्यु होने की दुगुनी संभावना होती है। और ये असमानताएं किसी व्यक्ति के पूरे जीवन में जारी रहती हैं। मध्य अमेरिका में कम आय वाले परिवार में पैदा हुए पांच वर्ष के बच्चे का कद, औसत रूप से, उच्च आय वाले परिवार में पैदा हुए बच्चे की तुलना में छह सेंटीमीटर कम होता है।

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ऐसे अंतर कई कारणों से बने हुए हैं। इनमें विषम आय वितरण जैसी "ऊर्ध्वाधर असमानताएँ” शामिल हैं, और साथ ही ऐसी “क्षैतिज असमानताएँ” भी शामिल हैं जो जाति, लिंग और जातीयता जैसे कारणों के फलस्वरूप समूहों के भीतर मौजूद रहती हैं, और वे भी जो आवासीय पृथक्करण के कारण समुदायों के बीच पनपती हैं।

बहुत से लोगों को विभिन्न प्रकार के समकालीन स्वरूप के भेदभाव का सामना करना पड़ता है, और उन्हें जिस सीमा तक अलगाव को सहन करना पड़ता है वह उनके बीचपरस्पर प्रतिक्रिया के फलस्वरूप होता है। ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज असमानताओं के संयोजन से चरम बहिष्कार और हाशिए पर रहने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसके फलस्वरूप पीढ़ी-दर-पीढ़ी गरीबी और असमानता की स्थिति लगातार बनी रहती है।

सौभाग्यवश, दुनिया इन असमानताओं के लोकतंत्र, आर्थिक विकास, शांति, न्याय, और मानव विकास पर पर पड़नेवाले हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक हो चुकी है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि असमानता से सामाजिक एकजुटता कम होती है, और इससे हिंसा और अस्थिरता का खतरा बढ़ जाता है। अंततः, आर्थिक और सामाजिक नीतियां एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

असमानता को कम करने के लिए नैतिक तर्क के अलावा एक आर्थिक तर्क भी है। यदि असमानता का बढ़ना जारी रहता है, तो अत्यधिक गरीबी उन्मूलन के लिए उच्च विकास की आवश्यकता होगी, बजाय उस स्थिति के जब आर्थिक लाभ अधिक समान रूप से वितरित हों।

असमानता के उच्च स्तर संभ्रांत व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक कब्जा किए जाने की संभावना से भी सहसंबंधित होते हैं जो समतावादी सुधारों को रोक कर स्वयं अपने हितों की रक्षा करते हैं। असमानता के साथ समस्या केवल यह नहीं है कि न यह सामूहिक लक्ष्यों और सबके हित का पालन करने में बाधक होती है; बल्कि यह विकास के मार्ग में संरचनात्मक अवरोध भी उत्पन्न करती है, उदाहरण के लिए, अल्प या प्रतिगामी कराधान और शिक्षा, स्वास्थ्य, या बुनियादी ढांचे में कम निवेश के जरिए।

अकेले विकास से सार्वजनिक वस्तुओं और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं तक समान रूप से पहुंच की गारंटी नहीं मिल सकती है; इसके लिए सुविचारित नीतियों की आवश्यकता होती है। लैटिन अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक असमान क्षेत्र है, इसका हाल ही का इतिहास इस बात का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है कि इस तरह की नीतियों को लागू किए जाने पर क्या कुछ संभव हो सकता है। इस सदी के पहले दशक के दौरान इस क्षेत्र ने गरीबी और असमानता से अन्योन्याश्रित समस्याओं के रूप में लड़ने के लिए आर्थिक गतिशीलता और सतत राजनीतिक प्रतिबद्धता के संयोजन के जरिए सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

इन प्रयासों की बदौलत, दुनिया भर में लैटिन अमेरिका केवल ऐसा क्षेत्र है जो आर्थिक रूप से विकसित होना जारी रखते हुए गरीबी और असमानता को कम करने में कामयाब रहा। 80 लाख से अधिक लोग मध्यम वर्ग में सम्मिलित हुए हैं, जो पहली बार इस क्षेत्र की आबादी के सबसे बड़े हिस्से के रूप में गरीब वर्ग को पार कर गया है।

निश्चित रूप से, कुछ लोगों का कहना है कि यह वस्तुओं की कीमतें उच्च होने सहित, अनुकूल बाह्य परिस्थितियों के कारण ही संभव हो सका था जिनसे आर्थिक विस्तार को मदद मिली थी। हालांकि, विश्व बैंक के एलएसी इक्विटी लैब के साक्ष्य से यह पुष्टि होती है कि इस विकास से लैटिन अमेरिका के सामाजिक लाभों के बारे में केवल आंशिक स्पष्टीकरण ही मिलता है; शेष सामाजिक खर्च के माध्यम से पुनर्वितरण के जरिए हुआ था।

दरअसल, आर्थिक विस्तार के मूल में प्रगतिशील नीतियाँ थीं: बेहतर शिक्षित श्रमिकों की एक नई पीढ़ी ने श्रम बल में प्रवेश किया, यह पीढ़ी उच्च वेतन अर्जित कर रही थी और सामाजिक व्ययों का लाभ उठा रही थी। सबसे अधिक वेतन वृद्धियाँ न्यूनतम आय कोष्ठकों में हुईं।

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अब चूंकि लैटिन अमेरिका ने धीमे आर्थिक विकास के युग में प्रवेश किया है, इन उपलब्धियों की परीक्षा होनी शुरू हो गई है। सरकारों के पास वित्तीय गुंजाइश कम है, और निजी क्षेत्र रोजगार के अवसर पैदा करने में कम सक्षम है। गरीबी और असमानता को कम करने के प्रयासों के कारण कठोर परिश्रम से हासिल किए गए लाभों के रुक जाने, या यहां तक कि उनके हाथ से निकल जाने का जोखिम होता है। इस क्षेत्र के नीति निर्माताओं को मानव विकास की दीर्घकालीन प्रगति को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

असमानता से निपटने के महत्व का उल्लेख फ्रांस की क्रांति के आदर्शों, अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा के शब्दों, और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित लक्ष्यों में किया गया है। यह प्रयास एक ऐसी दुनिया का निर्माण करने के मूल में है जो न केवल उचित हो, बल्कि शांतिपूर्ण, समृद्धिपूर्ण, और टिकाऊ भी हो। यदि ऐसा है जैसा कि मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में कहा गया है, "सभी मनुष्य जन्म लेने पर स्वतंत्र और गरिमा और अधिकारों में समान होते हैं," तो क्या हम सभी को इसी तरह से जीवन बिताना जारी रखने में सक्षम नहीं होना चाहिए?