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इबोला से सभी मोर्चों पर लड़ाई

पेरिस – पश्चिम अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बारे में संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में मीडिया कवरेज को देखते हुए, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि प्रभावित देशों में स्थितियों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। यद्यपि यह महामारी अब सुर्खियों की खबर नहीं रह गई है लेकिन इसका वायरस अभी तक समाप्त नहीं हो पाया है। इसके विपरीत, यह एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है।

मैंने हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रेंकोइस हॉलैंडे के साथ, गिनी की राजधानी कोनाक्री की यात्रा की, और फिर इस देश के वन क्षेत्र के एक ग्रामीण जिले मसेंटा का दौरा किया जो उस स्थान के नजदीक है जहाँ से महामारी शुरू हुई थी। दोनों ही स्थानों पर, मैंने अपनी आँखों से वायरस के विनाशकारी प्रभाव: दुख, भय, निराशा, और, अंतत: मौत को देखा। यहाँ तक कि मामूली लक्षण भी भारी हो गए हैं और इसका परिणाम यह हुआ: किसी ने भी हाथ नहीं मिलाए।

सच तो यह है कि इबोला वायरस फैल रहा है - और तेज़ी से फैल रहा है। यह ठीक है कि लाइबेरिया में इस पर काबू पा लिया गया है, लेकिन यह केवल लाइबेरिया में ही हुआ है, और वहाँ भी यह सुनिश्चित करने के लिए कोई उपाय नहीं ह�� कि यह दुबारा नहीं फैलेगा।

इबोला ऐसे तरीकों से फैल रहा है जो उन सबसे अलग हैं जिन्हें हम पहले देख चुके हैं। यह वायरस इन्फ्लूएंजा जैसे दूसरे कई वायरसों जितना तेजी से नहीं फैलता है जिन्होंने इससे पहले महामारियों के फैलने की मात्रा को सीमित किया था, विशेष रूप से इसलिए कि इनका फैलाव ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित था। लेकिन इस बार, वायरस शहरों और कस्बों में प्रवेश कर गया है, जिससे यह विशेष रूप से खतरनाक हो गया है। उच्च जनसंख्या घनत्व न केवल इबोला बल्कि किसी भी वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करता है। पश्चिम अफ्रीका में बड़े पैमाने पर गरीबी, दुर्लभ चिकित्सा संसाधनों, और भीड़ भरे शहरी क्षेत्रों का खतरनाक संयोजन अत्यंत घातक हो सकता है।

इस वर्ष इबोला से लगभग 7,500 लोगों के मरने की सूचना मिली है। 16,000 से अधिक लोगों के संक्रमित होने की सूचना मिली है। ये अनुमानित आँकड़े हैं, और हालाँकि वे महामारी की गति और प्रतिक्रिया के प्रयासों के प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं, परंतु अधिकारियों ने आगाह किया है कि वास्तविक आँकड़े संभवतः इससे बहुत अधिक हैं।

स्वास्थ्य एक वैश्विक सार्वजनिक कल्याण का विषय है। अधिकतर देशों में, स्वास्थ्य के अधिकार को संविधान या कानून में समाहित किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इस अधिकार में “उचित गुणवत्ता की स्वास्थ्य देखभाल, समय पर, स्वीकार्य रूप से, और किफायती दर पर उपलब्ध होना” शामिल है। लेकिन, इबोला जैसे वायरसों के मामले में कुछ देश ही, यदि कोई हों तो, ऐसी गारंटियाँ जारी कर सकते हैं।

नैतिकता की दृष्टि से, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपनी संस्थाओं, प्राधिकारियों, साधनसंपन्न व्यवसायों, और व्यक्तियों - और साथ ही अपने ज्ञान और धन - के साथ, इबोला के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक साधनों का उपयोग करे। इस अनिवार्यता की विशुद्ध रूप से स्वयं अपने हित की दृष्टि से भी उतनी ही आवश्यकता है। यदि वायरस पर जल्दी काबू नहीं पाया जाता है, तो हर किसी को - हर देश को - जोखिम होगा।

अच्छी खबर यह है कि इबोला पर काबू पाया जा सकता है। आखिरकार, इसका नाश किया जा सकता है। अगर हमें किसी तरह इस लक्ष्य को हासिल करना है, तो वायरस को समझना चाहिए और उसका निदान किया जाना चाहिए। इसके प्रसार को रोका जाना चाहिए, और इलाज प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

हालाँकि इबोला के लिए चिकित्सीय रूप से कामयाब कोई टीका नहीं है, पर यह स्थिति शीघ्र ही बदल सकती है। मार्च में वायरस के फैलने के बाद से, एक स्वतंत्र, गैर-लाभ अनुसंधान संगठन इंस्टीट्यूट पेस्टेयर ने यह समझने के लिए काम किया है कि वायरस को किस तरह रोका जा सकता है और कौन सा इलाज प्रस्तुत किया जा सकता है। हमारे शोधकर्ता यह समझने के लिए कि महामारियाँ कैसे विकसित होती हैं, वायरस के प्रसार पर नज़र रख रहे हैं, और हम स्थानीय वैज्ञानिक और चिकित्सा कर्मियों को सशक्त करने के लिए काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि 2015 में चिकित्सीय परीक्षणों के लिए दो वैक्सीन प्रतिरक्षाजन तैयार हो जाएँगे।

इंस्टीट्यूट पेस्टेयर का इबोला कार्य बल पश्चिम अफ्रीका में ज़मीन पर और फ्रांस में प्रयोगशाला में वायरस से लड़ाई कर रहा है, यह वायरस का अध्ययन इस बात का पता लगाने के लिए कर रहा है कि यह कैसे फैलता है, और यह इस प्रकोप को रोक और नए प्रकोपों को न होने देने के लिए चिकित्सा समाधान खोजने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है ।  मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स और रेड क्रॉस और रेड क्रीसेंट सहित डब्ल्यूएचओ और गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर, इंस्टीट्यूट पेस्टेयर वायरस और उसके कारणों से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

दुनिया भर के देशों ने एकदम तत्काल स्वरूप की चिंताओं से निपटने के लिए वित्तीय और अन्य प्रकार की सहायता देने: प्रभावित लोगों और समुदायों की मदद करने का वायदा किया है। कई देश पहले से ही इबोला वायरस के कारणों, प्रसार, और उपचार के अनुसंधान के लिए योगदान कर रहे हैं। एक अंतर्राष्ट्रीय "इच्छुकों का गठबंधन" स्थापित किया गया है, और हम सभी देशों, संबंधित संगठनों, रुचि रखनेवाले व्यवसायों, और योग्य व्यक्तियों से इसमें शामिल होने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। हम सब मिलकर, इबोला का अंत कर सकते हैं और हम इसका अंत देखेंगे।