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अफ्रीका की शिक्षा अनिवार्यता

दुबई – संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने शिक्षा को “एकमात्र सर्वश्रेष्ठ निवेश” घोषित किया है जिसे विभिन्न देश अपने यहां “संपन्न, स्वस्थ तथा समान समाजों” के निर्माण के लिए कर सकते हैं. यह उक्ति किसी और जगह के मुकाबले अफ्रीका में कहीं अधिक ��्रासंगिक है. अफ्रीका में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया गया है. नतीजतन, साक्षरता, विद्यालय उपस्थिति तथा विश्व-विद्यालय नामांकन में हाल के वर्षों में भारी इजाफा हुआ है. लेकिन अभी भी इस महाद्वीप को लंबा रास्ता तय करना है. यूनिसेफ के मुताबिक, दुनिया के उन 5.8 करोड़ बच्चों में से जो विद्यालय से बाहर हैं आधे से ज्यादा उप-सहारा अफ्रीका में रहते हैं. इनमें भी बच्चियों व लड़कियों की तादाद सबसे ज्यादा है. अफ्रीका के 15 से 24 साल उम्र के पांच में एक से ज्यादा लोग बेरोजगार हैं; केवल एक-तिहाई अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी कर पाते हैं और कुछ प्रगति के बावजूद उच्च शिक्षा की दर बेहद नीची है.

यह तथ्य कि अनेक सामाजिक संकेतक या तो स्थिर हैं या नीचे गिर रहे हैं खासतौर पर निराशाजनक है, हालांकि अफ्रीका की अनेक अर्थव्यवस्थाएं दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 1999 से 2010 तक घोर गरीबी में रहने वाले अफ्रीकी लोगों की संख्या लगभग 40% बढ़कर 41.1 करोड़ हो गई है. पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की पांच में चार मौतें अकेले अफ्रीका में होती हैं.

लेकिन फिर भी आशांवित होने का कारण है. अगले कुछ दशकों में उम्मीद है कि अमीर लोगों की तादाद सबसे ज्यादा अफ्रीका में बढ़ेगी. स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक द्वारा कराए गए दो हालिया अध्ययन भी बताते हैं कि तादाद में बढ़ते प्रभावशाली लोग भी शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के तौर पर देखते हैं.

पहले अध्ययन में नाइजीरिया, घाना और केन्या में मध्यम-आय वाले लोगों का सर्वेक्षण किया गया. पाया गया कि उनमें से अधिकांश लोग अगले पांच साल में अपने बच्चों की शिक्षा पर और अधिक खर्च करने की योजना बना रहे थे. हालांकि उनमें से 20% के करीब स्वयं न्यूनतम् स्तर तक ही शिक्षित थे. एक चीनी कहावत का कहना है – सभी अभिभावक अपने बेटों को ड्रैगन और बेटियों को फीनिक्स बनाना चाहते हैं. अफ्रीकी अभिभावक भी इससे अलग नहीं हैं.

दूसरे अध्ययन से पता चला कि उच्च-आय वर्ग वाले अफ्रीकी कारोबारी अपनी धर्मार्थ गतिविधियों में शिक्षा को सर्वोच्च वरीयता देते हैं. उनमें से 90% से अधिक पहले से ही शिक्षा से जुड़े मानवीय कार्यों में संलग्न हैं. नाइजीरिया में, जहां 150 से ज्यादा निजी जेट विमान हैं, केवल चार पंजीकृत परमार्थ संस्थाएं हैं. अफ्रीका के सबसे अमीर व्यक्ति एलिको डानगोटे ने पिछले दो साल में शिक्षण कार्यों के लिए 2 अरब डॉलर का दान दिया है.

अन्य परमार्थियों, यथा स्ट्राइव मैसीयिवा और निकी ओपनहाइमर ने भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है. ये दानदाता और निजी उपक्रम तथा सार्वजनिक क्षेत्र मिल कर यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य होंगे कि सभी युवा अफ्रीकीयों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त हो नाकि केवल अमीर परिवारों के बच्चों को.

लेकिन इसमें धन से अधिक और भी कुछ चाहिए. लोगों को केवल धर्मार्थियों के लिए चेक काट कर देने से भी आगे जाना चाहिए और सक्रिय रूप से विद्यालय भवन निर्माण, छात्रवृत्तियों के वित्तपोषण और शिक्षकों के प्रशिक्षण में योगदान करना चाहिए. सौभाग्य से ऐसा भी होने लगा है.

उदाहरण के लिए स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने वर्कि जेम्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी में युगांडा में विद्यालय शिक्षकों के प्रशिक्षण का वित्तपोषण शुरू किया है. उनका यह कार्य इस विश्वास पर आधारित है कि उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण से शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर नतीजे मिलेंगे. और मास्टरकार्ड फाउंडेशन गरीब-वंचित अफ्रीकी छात्रों को उच्चतर व विश्वविद्यालीय शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता दे रहा है.

ये सभी खिलाड़ी जानते हैं कि शिक्षित कार्यबल द्वारा लाई गई स्थिर व समावेशी वृध्दि से उन्हें अपरिमित लाभ मिलेंगे. लेकिन दीर्घ-कालीन आर्थिक सफलता सुनिश्चित करना केवल साक्षरता और विश्वविद्यालय नामांकन दरें बढ़ाने का ही मसला नहीं है. इसमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था की भी दरकार है जिससे ऐसे कर्मी तैयार हों जो इस क्षेत्र के तेजी से बदलते श्रम बाजार की मांग को पूरा कर सकें.

इसका अर्थ है, सबसे पहले और सबसे आगे यह सुनिश्चित किया जाए कि लोग व्यवहारिक हुनर हासिल कर सकें जिससे कि आगामी दशकों में आर्थिक विकास को गति प्रदान की जा सके. यहां यह सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि बड़ी तादाद में ऐसे कर्मी हों जो छोटे-मोटे उपकरण बनाने में, वस्त्र डिजाइन करने में, स्वास्थ्य सेवा देने में और एंजाइमों के विघटन में माहिर हों बजाए इसके कि इतिहास या साहित्य के जानकारों की फौज खड़ी की जाए. इसका यह अर्थ भी है कि सिंगापुर और जर्मनी का अनुसरण करते हुए शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ने का साफ रास्ता तैयार करना चाहिए.

डानगोटे ने बताया है कि किस प्रकार हजारों कालेज स्नातकों ने उनकी फैक्ट्री में ट्रक ड्राइवर की मुट्ठीभर रिक्तियों के लिए आवेदन किया था. इस अनुभव ने उन्हें डानगोटे एकेडमी स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जो नाइजीरिया और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिभा विकास का एक बड़ा केंद्र है. जिसका उद्देश्य है औद्योगिक-दक्षता के अंतर को खत्म करना. शिक्षा को आर्थिक विकास के साथ एकसार करने तथा संपन्नता बढ़ाने के लिए ऐसी पहलें महत्त्वपूण हैं.

सन् 2040 तक अफ्रीका में कार्यक्षम अवस्था (वय) वाले 1.1 अरब नागरिक होंगे – यानी भारत और चीन से कहीं ज्यादा. सही शिक्षा, दक्षता और रोजगार अवसरों के साथ यह विशाल कार्यबल इस समूचे क्षेत्र के लिए तीव्र व निर्वहनीय आर्थिक विकास ला सकता है. उनके बगैर मुमकिन है कि यह महाद्वीप बढ़ती बेरोजगारी, असमानता, सामाजिक अव्यवस्था और अंततः संघर्ष और अराजकता का शिकार बना रहे.