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रिग्रेक्सिट से आशा की किरण

लंदन - जब तक यूनाइटेड किंगडम के लोगों ने यूरोपीय संघ को छोड़ने के पक्ष में मतदान नहीं किया था, तब तक यूरोप के सामने सबसे बड़ी समस्या शरणार्थी संकट की थी।  वास्तव में ब्रेक्सिट की अधिक विकट आपदा के पैदा होने में उस संकट की बहुत बड़ी भूमिका रही थी।

ब्रेक्सिट के पक्ष में हुआ मतदान हैरतअंगेज़ रहा; मतदान वाले दिन की अगली सुबह, यूरोपीय संघ का विघटन होना व्यावहारिक रूप से अपरिहार्य लग रहा था। यूरोपीय संघ के अन्य देशों, विशेष रूप से इटली में बढ़ रहे संकटों के कारण यूरोपीय संघ के अस्तित्व पर छाए काले बादल और गहरे हो गए।

Erdogan

Whither Turkey?

Sinan Ülgen engages the views of Carl Bildt, Dani Rodrik, Marietje Schaake, and others on the future of one of the world’s most strategically important countries in the aftermath of July’s failed coup.

लेकिन ब्रिटेन के जनमत संग्रह के शुरूआती झटके का असर कम होने के बाद, कुछ अप्रत्याशित घट रहा है: यह त्रासदी अब निर्विवादित तथ्य नहीं लग रही है।  कल्पना के सच हो जाने के बाद अनेक ब्रिटिश मतदाता अपनी गलती पर पछता रहे हैं।  स्टर्लिंग की कीमत घट गई है। स्कॉटलैंड में भी दूसरे जनमत संग्रह की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई है। इस “अलगाव” अभियान के पूर्व नेता एक अजीब-सी परस्पर आत्मघाती विनाशकारी लड़���ई में लग गए हैं, और उनके कुछ अनुयायिओं को अपना और अपने देश का भविष्य डूबता नज़र आने लग रहा है।  अब तक चार मिलियन से अधिक लोगों द्वारा समर्थित दूसरा जनमत संग्रह आयोजित करने के लिए संसद से अनुरोध करने के अभियान से जनमत में हुए बदलाव का संकेत मिलता है।

जहाँ ब्रेक्सिट एक नकारात्मक आश्चर्य था, इसके प्रति सहज प्रतिक्रिया सकारात्मक है।  इस मुद्दे के दोनों पक्षों के लोग – खास तौर से जिन लोगों ने मतदान में हिस्सा तक नहीं लिया था (विशेषकर 35 वर्ष से कम उम्र के युवा लोग) – अब सक्रिय हो गए हैं।  ये ज़मीनी स्तर पर एक ऐसी भागीदारी है, जिसे यूरोपीय संघ पहले कभी नहीं कर पाया था।

जनमत संग्रह के बाद की उथल-पुथल से ब्रिटेन के लोगों को यह एहसास हुआ है कि यूरोपीय संघ को छोड़ देने पर उन्हें कौन-से नुकसान होंगे।  अगर यही भावना यूरोप के अन्य देशों में भी फैल जाती है, तो जो स्थिति यूरोपीय संघ के अनिवार्य विघटन के रूप में दिखाई दे रही थी, उसके बजाय यह अब एक शक्तिशाली और बेहतर यूरोप के निर्माण के लिए सकारात्मक सक्रियता बन सकती है।

यह प्रक्रिया ब्रिटेन में शुरू हो सकती है।  लोकप्रिय जनमत संग्रह के परिणाम को पलटा नहीं जा सकता, लेकिन हस्ताक्षर अभियान यूरोपीय संघ की सदस्यता के प्रति एक नया जोश पैदा करके स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में परिवर्तन तो ला सकता है।  फिर इस दृष्टिकोण को यूरोपीय संघ के शेष देशों में दुहराया जा सकता है, और यूरोपीय संघ को गंभीरतापूर्वक पुनर्गठित करके इसे बचाने के लिए एक आंदोलन तैयार किया जा सकता है।  मुझे विश्वास है कि जैसे जैसे ब्रेक्सिट के परिणाम आगामी महीनों में सामने आते जाएंगे, अधिक से अधिक लोग इस आंदोलन से जुड़ने के लिए उत्सुक होंगे।

यूरोपीय संघ को ब्रिटिश मतदाताओं को सज़ा बिल्कुल नहीं देनी चाहिए, उनके द्वारा संघ की कमियों के बारे में उठाई गई वैध चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर देना चाहिए।  यूरोपीय नेताओं को स्वयं अपनी गलतियों को पहचानना चाहिए और वर्तमान संस्थागत व्यवस्थाओं में मौजूद लोकतांत्रिक कमियों को स्वीकार करना चाहिए।  ब्रेक्सिट को किसी तलाक में होने वाली बहस के रूप में लेने के बजाय, उन्हें इस अवसर का उपयोग यूरोपीय संघ के पुनर्गठन के लिए करना चाहिए – इसे एक ऐसे समूह के रूप में बनाया जाना चाहिए जिससे ब्रिटेन और संघ से अलग होने के जोखिम वाले अन्य देश जुड़ना चाहें।

यदि फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, इटली, पोलैंड और अन्य सभी देशों के अप्रभावित मतदाताओं को यूरोपीय संघ में होने की वजह से अपने निजी जीवन में लाभ होता दिखाई देगा, तो इससे यूरोपीय संघ और मज़बूत होगा।  यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह इतनी तेज़ी से टूटकर बिखर जाएगा जिसकी नेताओं और नागरिकों ने अभी तक कल्पना भी नहीं की है।

समस्या वाला अगला देश इटली है, जहां बैंकों का संकट चल रहा है और अक्तूबर में वहां जनमत संग्रह होना है।  प्रधानमंत्री मैटियो रेंज़ी जटिल चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं: यदि वे बैंकों के इस संकट को समय रहते नहीं सुलझा पाते हैं, तो वे इस जनमत संग्रह में हार जाएंगे इससे यूरोपीय संसद में ब्रेक्सिट-समर्थक यूके इंडिपेंडेंस पार्टी की साझेदार, फ़ाइव स्टार मूवमेंट सत्ता हासिल कर सकती है। इसका समाधान ढूंढने के लिए रेंज़ी को यूरोपीय अधिकारियों की मदद चाहिए, लेकिन वे बहुत सुस्त और अड़ियल हैं।

यूरोप के नेताओं को यह मानना होगा कि यूरोपीय संघ टूट के कगार पर है।  एक दूसरे पर आरोप मढ़ने की बजाय, उन्हें मिलजुल कर काम करना चाहिए और विशेष उपाय करने चाहिए।

सबसे पहले, यूरोपीय संघ की सदस्यता और यूरोज़ोन के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाना चाहिए।  जो भाग्यशाली देश यूरोज़ोन के सदस्य नहीं हैं, उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।  यदि यूरोज़ोन और अधिक सहयोगात्मक रूप से एकीकृत होना चाहता है, जो कि उसे होना भी चाहिए, तो उसके पास स्वयं अपना कोष और बजट होना ज़रूरी है, ताकि वह मौद्रिक प्राधिकारी, यूरोपीय सेंट्रल बैंक के रूप में काम करने के साथ-साथ वित्तीय प्राधिकारी के रूप में भी काम कर सके।

दूसरी बात, यूरोपीय संघ को अपने बहुमूल्य और और ज़्यादातर अनप्रयुक्त क्रेडिट को इस्तेमाल करना चाहिए।  अगर नेता यूरोपीय संघ की उधार क्षमता का उपयोग ऐसे समय में करने में विफल रहते हैं जब यूरोपीय संघ का अस्तित्व ही दांव पर लगा हुआ है, तो यह उनका गैर-जिम्मेदाराना रवैया होगा।

तीसरी बात, यूरोपीय संघ को अपनी सुरक्षा मज़बूत करनी चाहिए ताकि वह अपने उन बाहरी शत्रुओं से अपनी रक्षा कर सके, जो इसकी वर्तमान कमज़ोरी का फ़ायदा उठा सकते हैं।  यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी संपत्ति यूक्रेन है, जिसके नागरिक अपने देश की सुरक्षा के लिए मर मिटने को तैयार हैं।  स्वयं की रक्षा करके, वे यूरोपीय संघ की भी सुरक्षा कर रहे हैं – जो यूरोप में इन दिनों बहुत कम देखने को मिलता है।  ‍यह यूक्रेन का सौभाग्य है कि उसके पास एक ऐसी नई सरकार है, जो ऐसे सुधारों के क्रियान्वयन को लेकर अधिक दृढ़ प्रतिज्ञ है, जिनकी मांग उसके अपने नागरिक और बाहरी समर्थक दोनों पुरज़ोर तरीके से करते आ रहे हैं और इसके इन सुधारों को क्रियान्वित करने की संभावना भी अधिक है।  लेकिन यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देश यूक्रेन की उतनी मदद नहीं कर रहे हैं, जितनी मदद का वह हक़दार है (अमेरिका कहीं अधिक सहायता कर रहा है)।

चौथी बात, यूरोपीय संघ की शरणार्थी समस्या से निपटने की योजनाओं को पूरी तरह से संशोधित करने की ज़रूरत है।  ये योजनाएं गलत धारणाओं और विसंगतियों से भरी हुई हैं जिससे ये बेअसर हो गई हैं।  उन योजनाओं के लिए बहुत कम पैसों का इंतज़ाम किया गया है। और उनमें ऐसे कठोर उपायों का इस्तेमाल किया जाता है जिनसे विरोध पैदा होता है।  मैंने इन समस्याओं के बारे में एक विस्तृत उपाय एक अन्य स्थान पर प्रस्तावित किया है।

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यदि यूरोपीय संघ इन उपायों के अनुसार प्रगति करता है, तो वह एक ऐसा संगठन बन जाएगा जिससे लोग जुड़ना चाहेंगे।  उस समय, संधि में परिवर्तन – और अधिक एकीकरण – एक बार फिर से संभव हो सकेगा।

यदि यूरोप के नेता कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो जो लोग यूरोपीय संघ का पुनर्निर्माण करने के लिए इसे बचाने की इच्छा रखते हैं उन्हें ब्रिटेन के युवा कार्यकर्ताओं के पदचिह्नों पर चलना चाहिए।  अब पहले से कहीं अधिक ज़रूरत है कि यूरोपीय संघ के समर्थक ऐसे तरीके ढूंढ़ें, जिनसे उनके प्रभाव को महसूस किया जा सके।