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महासंक्रमणों का दमन करना

लंदन - वर्तमान एंटीबायोटिक दवाएँ, न केवल निमोनिया और मूत्र पथ संक्रमणों जैसी आम बीमारियों से लड़ने में, बल्कि तपेदिक और मलेरिया जैसे कई प्रकार के संक्रमणों का इलाज करने में भी अधिकाधिक निष्प्रभावी होती जा रही हैं, जो अब फिर से लाइलाज होने का जोखिम पैदा कर रहे हैं। जी-7 के नेताओं द्वारा "रोगाणुरोधी प्रतिरोध" (AMR) से निपटने के लिए प्रतिबद्ध होने के हाल ही के संयुक्त प्रस्ताव के साथ, अब अधिक समावेशी जी-20 - और चीन के लिए, जो पहली बार इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है - इस लड़ाई को अगले स्तर तक ले जाने की बारी है।

AMR पर कार्रवाई करने में विफलता का असर सब पर पड़ेगा, चाहे उनकी राष्ट्रीयता या उनके देश के विकास का स्तर कुछ भी हो। निश्चित रूप से, 2050 तक AMR के फलस्वरूप दस मिलियन लोगों की मृत्यु होने की संभावना है, जबकि आज यह संख्या लगभग 7,00,000 है, जिनमें से चीन और भारत प्रत्येक में लगभग एक मिलियन पीड़ित लोग होंगे। उस बिंदु पर, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में हम पहले ही अनुमानित रूप स��� $100 ट्रिलियन डॉलर खो चुके होंगे।

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तथापि, शेष अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भागीदारी के बिना जी-7 की कोई भी रणनीति सफल नहीं हो सकती, चाहे वह कितनी भी अच्छी तरह क्यों न तैयार की जाए। आखिरकार, अगर संक्रमण उन लोगों के साथ यात्रा करते हैं जिनमें वह होता है, तो प्रतिरोध भी ऐसा ही करता है, जिसका मतलब यह है कि AMR का एकमात्र समाधान साझेदारी है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य "AMR पर वैश्विक कार्रवाई योजना" को लागू करने के लिए सहमत हो गए हैं, और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से 2016 में राजनीतिक नेताओं की उच्च-स्तरीय बैठक बुलाने का आह्वान किया है।

इस प्रयास में, अपनी बढ़ती आबादियों, बढ़ती हुई दौलत, और बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव के साथ – उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को ख़ास तौर से महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी, और चीन को इसका नेतृत्व करना होगा। हमने रोगाणुरोधी प्रतिरोध की समीक्षा में (जिसका मैं अध्यक्ष हूँ) पहले ही चीन के लिए ऐसी भूमिका की सिफारिश की है, जिसमें में कुछ चीनी नीति-निर्माताओं के साथ विचार-विमर्श करने की बात कही गई है।

अब और 2016 के बीच, चीन के लिए कार्रवाई करने के लिए मंच बन जाना चाहिए। जी-7 के देशों द्वारा अपनी संयुक्त घोषणा में किए गए वायदे को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए इस प्रयास को आगे बढ़ाना चाहिए।

इस तरह की एक प्रतिबद्धता पशु-पालन में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल कम करना है। कुछ यूरोपीय सरकारों ने पहले ही इस प्रथा को विनियमित करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर ली है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने धीमी कार्रवाई की है, लेकिन हाल ही में उसने कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए हैं।

लेकिन पशुओं के पालन-पोषण करने के तरीके को बदलने का सबसे अच्छा रास्ता शायद प्रमुख खाद्य कंपनियों पर दबाव डालना होगा – यह एक ऐसा काम है जिसे उपभोक्ता सबसे अधिक प्रभावी ढंग से कर सकते हैं। निश्चित रूप से, एंटीबायोटिक-रहित मांस सहित, स्वस्थ खाद्य पदार्थों के लिए बढ़ती हुई मांग ने पहले ही मैकडॉनल्ड्स, कॉस्टको, और केएफ़सी जैसी खाद्य उद्योग की प्रमुख कंपनियों को एंटीबायोटिक से लदे मांस को क्रमशः समाप्त करने के अपने इरादे की घोषणा करने के लिए मजबूर कर दिया है।

सरकारों को प्रमुख सामाजिक मीडिया अभियान लागू करके इस प्रवृत्ति का लाभ उठाना चाहिए, जिसमें ऐसी चुस्त, निरोगी आदतों को उजागर किया जाए जिन्हें सभी लोगों को अपनाना चाहिए - इन आदतें से परोक्ष रूप से एंटीमाइक्रोबियल्स के लिए मांग कम होगी। ऐसे अभियान की कम लागत और संभावित रूप से मिलनेवाला उच्च लाभ इसे और भी ज़्यादा आकर्षक बना देता है।

संयुक्त घोषणा में शामिल दूसरी प्रतिबद्धता - यह सुनिश्चित करने में मदद करना कि दवाओं का इस्तेमाल केवल तभी किया जाए जब उनकी ज़रूरत हो – स्वाभाविक लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह AMR को संचालित करने वाली प्रमुख समस्या का प्रतिनिधित्व करती है। जैसी कि प्रस्ताव में माना गया है, इस समस्या पर कार्रवाई करने के लिए त्वरित देखभाल बिंदु नैदानिक उपायों का विकास करना और उस तक पहुँच में सुधार करना महत्वपूर्ण है।

बेहतर नैदानिक प्रौद्योगिकियाँ निस्संदेह विश्व की शीर्ष प्रौद्योगिकी फर्मों की पहुँच में हैं। लेकिन वे केवल तभी निवेश करेंगी जब उन्हें विश्वास होगा कि स्वास्थ्य प्रणालियाँ उनके नवाचारों का इस्तेमाल करेंगी। उदाहरण के लिए, अगर सरकारें इस बात को अनिवार्य बना देती हैं कि एंटीबायोटिक दवाएँ निर्धारित करने से पहले, ख़ास नैदानिक परीक्षण किए जाने चाहिए, तो कंपनियों को आवश्यक प्रोत्साहन मिलेगा।

ऐसी आवश्यकता को आलोचना का सामना करना पड़ेगा, और कुछ लोग दावा करेंगे कि परीक्षण में लंबा समय लगता है, और इसलिए यह इलाज शुरू करने से पहले हमेशा संभव नहीं होगा। हालाँकि विरल मामलों में यह सच हो सकता है, लेकिन ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ तीव्र और प्रभावी परीक्षण मौजूद हैं, लेकिन अभी तक – विकासशील देशों या विकसित देशों में - उनका व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं होता है।

सबसे आम संक्रमणों में से एक पर विचार करें: गले में ख़राश। हालांकि वे अकसर जीवाणु के बजाय, वायरल होते हैं, लेकिन उनका इलाज अकसर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है - यह ऐसा उपाय है जो न केवल निष्प्रभावी है, बल्कि यह AMR को भी बढ़ावा देता है।

फाहे का त्वरित और आसान परीक्षण इस समस्या को हल कर सकता है और वास्तव में ऐसा एक परीक्षण पहले ही मौजूद है। ब्रिटिश फ़ार्मेसी शृंखला द्वारा किए गए एक परीक्षण में (उसने खुद स्वीकार किया कि इसमें छोटे नमूने का इस्तेमाल किया गया था), परीक्षण के कारण एंटीबायोटिक्स की खपत में लगभग 60% की कमी हुई। इस प्रौद्योगिकी के विकास और नियोजन में निवेश करके गले में खराश के लिए गैर-ज़रूरी एंटीबायोटिक इलाज में काफ़ी कमी लाई जा सकती है, और साथ ही इससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव कम होगा और डॉक्टरों का समय बचेगा।

समीक्षा द्वारा अनुशंसित और जी-7 द्वारा मान्यता प्राप्त तीसरी अनिवार्य बात है,  दवा प्रतिरोधी संक्रमण के प्रसार की बेहतर निगरानी, ख़ास तौर से विकासशील देशों में, जहाँ इस तरह के आंकड़े सबसे विरल हैं। इस मोर्चे पर, हमारी खुद की सरकार रास्ता दिखा रही है, जहाँ चांसलर जॉर्ज ओसबोर्न ने मार्च में AMR के खिलाफ लड़ाई के लिए उभरते हुए देशों की मदद करने के लिए £195 मिलियन ($307 मिलियन) आबंटित करने का वचन दिया है। ऐसी संभावना है कि फ़ाउंडेशनों द्वारा इस पहल के लिए अपना खुद का धन लगाने की वचनबद्धता की जाएगी। इस बीच, यूएस सरकार बायोमेडिकल उन्नत अनुसंधान और विकास प्राधिकरण के जरिए नई दवाओं के विकास के समर्थन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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दुनिया कई चुनौतियों और संकटों का सामना कर रही है, और वस्तुतः इन सब समाधानों के लिए ठोस राजनीतिक प्रतिबद्धता और महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होगी। लेकिन तथ्य यह है कि जब AMR की बात आती है, तो सरकारों के पास इस प्रमुख संकट का हल उसके बढ़ जाने के समय आनेवाली लागत की तुलना में एक छोटे से अंश के द्वारा करने का दुर्लभ अवसर उपलब्ध होता है। उदाहरण के लिए, पश्चिम अफ़्रीक़ा में हाल ही में इबोला के प्रकोप पर कार्रवाई करने की जद्दोजहद में, अकेले यूएस को सार्वजनिक धन में $5.4 बिलियन का योगदान करना पड़ा। अगर इसमें स्वास्थ्य प्रणालियों की और यहाँ तक कि नियोक्ताओं की बचतों को जोड़ लिया जाए, तो AMR का मुकाबला करने के लिए ठोस कार्रवाई करना और भी किफ़ायती हो जाता है।

यही कारण है कि जी-7 सरकारों को AMR पर कार्रवाई करने की अपनी कोशिशें तेज़ करनी चाहिए। और इसी कारण चीन और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को इस लड़ाई में शामिल होना चाहिए। साथ मिलकर, हम अपनी दवाओं की उपचारात्मक शक्तियों की रक्षा कर सकते हैं।