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डेटा और विकास

वाशिंगटन, डीसी – शताब्दी के अंत के बाद से, अंतर्राष्ट्रीय विकास समुदाय मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स (एमडीजी) की दृष्टि से पिछड़ गया है, जिसमें गरीबी, बाल मृत्यु-दर, और रोग सहित आठ प्रमुख क्षेत्रों में विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, जिन्हें 2015 तक प्राप्त किया जाना है। 2015 के पश्चात के विकास कार्यक्रम को तैयार करने में, एमडीजी की सफलता का लेखा-जोखा करना - और यह पहचान करना कि प्रगति में कहाँ कमी रह गई है - अत्यंत महत्वपूर्ण है। और इसके लिए यह आवश्यक है कि डेटा अधिक और बेहतर हो।

इसे सुनिश्चित करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और कई विकासशील देशों ने एमडीजी के लक्ष्यों की तुलना में अपने कार्य-निष्पादन पर अधिक बेहतर निगरानी रखने के लिए अपने डेटा संग्रहण में सुधार लाने के लिए भारी मात्रा में निवेश किए हैं। वर्ष 2003 में, एमडीजी के 22 प्रमुख सूचकों में से 16 या उससे अधिक सूचकों के लिए केवल चार देशों के दो डेटा प्वाइंट थे; पिछले वर्ष तक इन देशों की संख्या बढ़कर 118 तक पहुँच गई थी।

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लेकिन विकासशील विश्व में विकास डेटा एक दुर्लभ संसाधन बना हुआ है। सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आकलन करने - और उसे प्रोत्साहित करने - की दृष्टि से इनका जो महत्व है उसे देखते हुए इस कमी पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए। विकास डेटा तैयार करने और उसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किसी उत्प्रेरक का होना आवश्यक है। इसे ध्यान में रखते हुए, 2015 के पश्चात के विकास कार्यक्रम के उच्च-स्तरीय पैनल ने वैश्विक “डेटा क्रांति” का जो आह्वान किया है वह उचित है।

डिजिटल प्रौद्योगिकियों में हुई ज़बर्दस्त वृद्धि ने 2000 में एमडीजी आरंभ किए जाने के बाद से वैश्विक परिदृश्य को बदल दिया है। रिमोट सेंसिंग, ऑनलाइन गतिविधियों से एकत्र जानकारी, और मोबाइल फोनों से प्राप्त क्राउड-सोर्स डेटा आँकड़े एकत्र करने के पारंपरिक तरीकों के पूरक के रूप में हो सकते हैं।

लोग जिस तरह डेटा तैयार करते हैं, संग्रह करते हैं, साझा करते हैं, और उनका उपयोग करते हैं उसमें प्रौद्योगिकी-संचालित जो बदलाव आया है, वह दो कारणों से विकास के प्रयासों में परिलक्षित होना चाहिए। पहला यह कि नीति-निर्माता अधिक अद्यतन डेटा प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं ताकि उन्हें उनके प्रयासों में मार्गदर्शन मिल सके। दूसरा, ये डेटा नई और अधिक कारगर वस्तुओं और सेवाओं के विकास को सक्षम करके नवोन्मेषिता लाने और नागरिक संलग्नकता में भी मदद कर सकते हैं।

परंतु इसमें सावधानी बरतना ज़रूरी है। इन डेटासेटों के आकार और जटिलता के कारण विशेषज्ञतायुक्त विश्लेषणात्मक दक्षताओं (जो कम मात्रा में मिलती है), और साथ ही अधिक अनुसंधान और प्रयोगात्मकता की आवश्यकता होती है।

विकास के लिए डेटा की मात्रा, गुणवत्ता, उपलब्धता, और प्रयोज्यता बढ़ाने के लिए बाज़ार की विफलताओं पर विचार करने की आवश्यकता होती है जिनके फलस्वरूप विकासशील देशों में डेटा के उपयोग और व्याप्ति में अंतराल उत्पन्न होते हैं। इसका अर्थ यह है कि जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी, डेटा, और डेटा उपयोगकर्ताओं और प्रदाताओं के मामले में तीव्र गति से प्रगति होती है, विभिन्न पक्षों - सरकारों, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों, दाता एजेंसियों, वैश्विक और स्थानीय गैर सरकारी संगठनों, शैक्षणिक और शोध संस्थानों, निजी क्षेत्र और अन्यों - के बीच सहयोग की आवश्यकता होगी।

सहयोग की इस भावना में प्रमुख बहुपक्षीय विकास संस्थाओं - अफ्रीकी विकास बैंक, एशियाई विकास बैंक, अंतर-अमेरिकी विकास बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, इस्लामी विकास बैंक, संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक - ने पहले से ही विकास डेटा तैयार और साझा करने के अपने संयुक्त प्रयासों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। और इस प्रयास के फल अभी से मिलने शुरू हो चुके हैं।

लेकिन अभी और बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सहयोग के नए प्रकारों के ज़रिए, विकासशील देशों की सांख्यिकीय एजेंसियों का लक्ष्य होना चाहिए कि वे डेटा व्याप्ति और गुणवत्ता में सुधार लाएँ, और साथ ही डेटा के प्रबंधन, उपयोग, और पहुँच को आसान बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाएँ।

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डेटा अधिक (और अधिक विश्वसनीय) होने से नीति-निर्माताओं को विशिष्ट सामाजिक, आर्थिक, और पर्यावरण संबंधी मुद्दों को समझने में मदद मिल सकती है जिससे उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सुधार हो सकता है। बेहतर लैंगिक आंकड़ों के फलस्वरूप महिलाओं की न्याय, शिक्षा, और वित्त तक पहुँच को अधिक व्यापक रूप से समझा जा सकता है; गरीबी और असमानता के बेहतर आकलनों से यह पता चल सकता है कि आर्थिक विकास के लाभों का वितरण किस प्रकार हो रहा है; और नैसर्गिक पूंजी के लेखांकन से संसाधनों के मूल्य को उजागर किया जा सकता है जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि उनका उपयोग उचित और धारणीय तरीके से किया जाता है।

जाहिर है कि प्रभावी नीति बनाने के लिए सीधे रूप से लोगों और दुनिया की भलाई को प्रभावित करने वाले मुद्दों से संबंधित डेटा का होना आवश्यक है। ऐसे डेटा को खुला और पहुँच योग्य बनाने को यह सुनिश्चित करने के लिए एक बुनियादी शर्त के रूप में देखा जाना चाहिए कि लोगों में यह क्षमता हो कि वे सरकारों को जवाबदेह बनाने में सक्षम हो सकें और फलस्वरूप वे उन निर्णयों में भाग ले सकें जो उनके जीवन को प्रभावित करते हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जितने अधिक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा, 2015 के पश्चात का विकास कार्यक्रम उतना ही अधिक कारगर होगा।