सार्वजनिक स्वास्थ्य को मानचित्र पर लाना

सिएटल – पच्चीस वर्ष पहले, बड़ी आबादियों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति एक ऐसे डॉक्टर जैसी थी जो उचित निदान के बिना किसी रोगी का इलाज करने की कोशिश कर रहा हो। जिन रोगों और चोटों के कारण जीवन का असमय अंत हो जाता था और अपार कष्ट सहन करना पड़ता था उन पर पूरी तरह से नज़र नहीं रखी जाती थी।

उस समय, विभिन्न रोगों के लिए सदाशयपूर्वक सरोकार रखनेवाले पैरोकारों ने मृत्यु के जो आँकड़े प्रकाशित किए उनसे उन्हें धन जुटाने और ध्यान आकर्षित करने के मुद्दे को उठाने में मदद मिली। लेकिन जब सभी दावों को जोड़ा गया, तो संबंधित वर्ष में मरनेवाले लोगों की संख्या वास्तव में मरनेवाले लोगों की कुल संख्या की तुलना में कई गुना अधिक थी। और जब नीति निर्माताओं के पास सही आंकड़े होते भी थे, तो उनमें आमतौर पर केवल लोगों की मौत का कारण शामिल होता था, उन बीमारियों का नहीं जिनसे उनका जीवन पीड़ा से भर जाता था।

इस समस्या का समाधान करने के लिए, एलेन लोपेज़ और मैंने 1990 में ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिसीज़ (जीबीडी) परियोजना शुरू की। निर्णयकर्ताओं को दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों के बारे में जानकारी चाहिए होती है, और यह भी कि समय बीतने के साथ उनमें विभिन्न आयु समूहों में, लैंगिकता के अनुसार किस तरह का बदलाव आया है, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि हर किसी को यथासंभव सबसे लंबे समय तक, अधिक स्वस्थ जीवन जीने का अवसर प्राप्त होता है।

To continue reading, please log in or enter your email address.

To continue reading, please log in or register now. After entering your email, you'll have access to two free articles every month. For unlimited access to Project Syndicate, subscribe now.

required

By proceeding, you are agreeing to our Terms and Conditions.

Log in

http://prosyn.org/kMT7aZm/hi;

Cookies and Privacy

We use cookies to improve your experience on our website. To find out more, read our updated cookie policy and privacy policy.