0

सार्वजनिक स्वास्थ्य को मानचित्र पर लाना

सिएटल – पच्चीस वर्ष पहले, बड़ी आबादियों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति एक ऐसे डॉक्टर जैसी थी जो उचित निदान के बिना किसी रोगी का इलाज करने की कोशिश कर रहा हो। जिन रोगों और चोटों के कारण जीवन का असमय अंत हो जाता था और अपार कष्ट सहन करना पड़ता था उन पर पूरी तरह से नज़र नहीं रखी जाती थी।

उस समय, विभिन्न रोगों के लिए सदाशयपूर्वक सरोकार रखनेवाले पैरोकारों ने मृत्यु के जो आँकड़े प्रकाशित किए उनसे उन्हें धन जुटाने और ध्यान आकर्षित करने के मुद्दे को उठाने में मदद मिली। लेकिन जब सभी दावों को जोड़ा गया, तो संबंधित वर्ष में मरनेवाले लोगों की संख्या वास्तव में मरनेवाले लोगों की कुल संख्या की तुलना में कई गुना अधिक थी। और जब नीति निर्माताओं के पास सही आंकड़े होते भी थे, तो उनमें आमतौर पर केवल लोगों की मौत का कारण शामिल होता था, उन बीमारियों का नहीं जिनसे उनका जीवन पीड़ा से भर जाता था।

Chicago Pollution

Climate Change in the Trumpocene Age

Bo Lidegaard argues that the US president-elect’s ability to derail global progress toward a green economy is more limited than many believe.

इस समस्या का समाधान करने के लिए, एलेन लोपेज़ और मैंने 1990 में ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिसीज़ (जीबीडी) परियोजना शुरू की। निर्णयकर्ताओं को दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों के बारे में जानकारी चाहिए होती है, और यह भी कि समय बीतने के साथ उनमें विभिन्न आयु समूहों में, लैंगिकता के अनुसार किस तरह का बदलाव आया है, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि हर किसी को यथासंभव सबसे लंबे समय तक, अधिक स्वस्थ जीवन जीने का अवसर प्राप्त होता है।

यह सुनिश्चित करके कि हर मृत्यु को केवल एक बार गिना जाता है, और खराब स्वास्थ्य के कारणों के विस्तृत आँकड़े उपलब्ध करके, जीबीडी द्वारा कैंसर के प्रभाव की पीठ के निचले हिस्से में दर्द या अवसाद से तुलना की जा सकती है। इससे विभिन्न देशों के बीच स्वास्थ्य देखभाल के निष्पादन की तुलना भी की जा सकती है।

जीबीडी के 1990 के अध्ययन और बाद के संशोधनों के फलस्वरूप आबादी के स्वास्थ्य का मापदंड बढ़ गया जिससे निर्णयकर्ताओं को अधिक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी उपलब्ध हो सकी। इसने मानसिक बीमारियों और सड़क पर लगनेवाली चोटों जैसी ध्यान न दी गई पीड़ाओं के महत्व के प्रति अंतर्राष्ट्रीय विकास समुदाय की आँखें भी खोल दीं। विश्व बैंक और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे दाता अपने निवेशों के मार्गदर्शन के लिए जीबीडी डेटा का उपयोग करते हैं, और 30 से अधिक देशों ने स्वयं अपने रोग-का-कारण के अध्ययन किए हैं।

ऑस्ट्रेलिया, बोत्सवाना, चीन, मैक्सिको, नॉर्वे, रवांडा, सऊदी अरब और ब्रिटेन जैसे देश जीबीडी के निष्कर्षों का उपयोग स्वास्थ्य नीतियों को सूचित करने के लिए कर रहे हैं। चीन में, 2013 में नीति शिखर सम्मेलन में शुरू की गई जीबीडी परियोजना के परिणामों से, देश की आबादी पर वायु प्रदूषण के घातक प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा हुई। उन निष्कर्षों से स्वास्थ्य पर प्रदूषण के नकारात्मक प्रभावों पर अंकुश लगाने के लिए चीनी सरकार के प्रयासों को मूर्त रूप देने में मदद मिली, और चीनी शोधकर्ता अब वैश्विक सहयोगात्मक प्रयास के प्रमुख सदस्य हैं।

रवांडा में जब जीबीडी अध्ययन से यह पता चला कि ठोस ईंधन से खाना पकाने से घर के अंदर होनेवाला वायु प्रदूषण मौत का एक प्रमुख कारण है तो सरकार ने सबसे अधिक कमजोर परिवारों को एक लाख प्रदूषण रहित स्टोव वितरित करने का एक कार्यक्रम आरंभ किया। रवांडा के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी – स्वयं मंत्री सहित – जीबीडी के लिए महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं।

आज जीबीडी में लगातार सुधार हो रहा है जिसका श्रेय 114 देशों के 1300 से अधिक सहयोगियों के प्रयासों को जाता है। ये सहयोगी उन मॉडलों में सुधार करते हैं जिन पर परियोजना का निर्माण किया जाता है, अध्ययन के परिणामों की जाँच करते हैं, नए डेटा सेटों का योगदान करते हैं, और परिणामों को मीडिया के आउटलेटों, शैक्षिक संस्थानों, और निर्णयकर्ताओं को संप्रेषित करते हैं। नवीनतम जीबीडी अध्ययन से पता चला है कि एक और रोग, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय विकास हलकों में शायद ही कभी चर्चा हुई हो वह पीठ के निचले हिस्से और गर्दन में होनेवाला दर्द है, यह विश्व स्तर पर होनेवाली स्वास्थ्य हानि का चौथा सबसे बड़ा कारण है। इसने मध्यम आय वाले देशों में महामारी विज्ञान के संक्रमण की तीव्र गति और उप-सहारा अफ्रीका में संचारी, मातृ, नवजात शिशु, और पोषण संबंधी विकारों को भी उजागर किया है।

लेकिन अगर जीबीडी डेटा के अधिक विस्तृत विवरण उपलब्ध कर पाता तो वह नीति संबंधी वादविवादों को सूचना देने के लिए और अधिक कार्य कर सकता था और स्वास्थ्य में सुधार के लिए अधिक कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकता था। नीति निर्माता जवाबदेह हैं, सबसे पहले उन ग्राहकों के प्रति जिनकी अनूठी ज़रूरतों को पूरा करना उनके लिए आवश्यक है। स्थानीय रोग के कारणों के अनुमान इबोला जैसी व्याधियों का मुकाबला करने, मध्यम आय वाले देशों में गैर संचारी रोगों से ज्यादा मौतें होने को रोकने, और उप सहारा अफ्रीका में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।

निर्णयकर्ताओं को अपने डेटा का बेहतर उपयोग करने में मदद करने के लिए, इन्स्टीट्यूट फॉर हैल्थ मीट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन, जिसका मैं प्रधान हूँ, विश्लेषण के नवोन्मेषी स्तर पर रोग के कारणों के भू-स्थानिक मानचित्र तैयार कर रहा है। इन मानचित्रों को तैयार करना मलेरिया एटलस परियोजना द्वारा विकसित पद्धतियों की बदौलत संभव हो सका है, जिसने किसी भी रोगजनक के बारे में हमारी समझ की तुलना में मलेरिया की एक बेहतर स्थानिक समझ उत्पन्न की है।

भू-स्थानिक मानचित्र उन क्षेत्रों की ठीक-ठीक पहचान कर सकते हैं जिनमें उल्लेखनीय प्रगति हो रही है, इससे हम उन समुदायों की पहचान कर सकते हैं जिन्होंने अपने पड़ोसियों की तुलना में कुछ अलग किया है। इन अध्ययन मामलों से समुदाय एक-दूसरे की सफलताओं को दोहराने में मदद कर सकते हैं। इसका एक उदाहरण कैली, कोलम्बिया है जिसमें 1990 के दशक में हत्या दरों में तब कमी हो गई जब शहर के महापौर, रोड्रिगो ग्युरेरो ने शराब पर लगे प्रतिबंधों को कठोर बना दिया, बहुत अधिक गरीब इलाकों में सामुदायिक विकास कार्यक्रम आरंभ किए, और सार्वजनिक स्थानों में अस्थायी रूप से बंदूकों पर प्रतिबंध लगा दिया।

Fake news or real views Learn More

कोलंबिया की राजधानी बोगोटा के मेयर को जब कैली के इस कार्यक्रम के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने यहाँ इसी तरह के उपायों को लागू किया जिससे नगर में धीरे-धीरे हत्याओं को कम करने में मदद मिली। तब से, ग्युरेरो ने अंतर अमेरिकी विकास बैंक के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रम विकसित करना शुरू कर दिया है जिनसे अन्य लैटिन अमेरिकी देशों को अपने समुदायों में हिंसा को कम करने में मदद मिलती है। 2014 में, ग्युरेरो को स्वास्थ्य में सुधार के लिए अपने डेटा का उपयोग करने के लिए रॉक्स पुरस्कार प्राप्त हुआ, जिससे उनके कार्य को और अधिक प्रोत्साहन मिला। भू-स्थानिक मानचित्रण से हमें और कई रोड्रिगो ग्युरेरोज़ों की पहचान करने और उनकी उपलब्धियों का समर्थन करने में मदद मिलेगी।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय जब एमडीजी के उत्तरवर्ती ढांचे, सतत विकास लक्ष्यों, के वित्तपोषण और प्रगति पर नज़र रखने के लिए आवश्यक साधनों पर सहमति के लिए एकत्र होगा, तो प्रगति पर नज़र रखने और यह दर्शाने के लिए भू-स्थानिक मानचित्रण महत्वपूर्ण होगा कि इस दिशा में किन सुधारों की जरूरत हो सकती है। स्वास्थ्य मापदंड की दृष्टि से हम 1990 में जहाँ थे, वहाँ से अब काफी आगे पहुँच चुके हैं। ध्यान केंद्रित प्रयासों और अधिक नवोन्मेष से, अगले 25 वर्षों में हम और भी अधिक प्रगति कर सकते हैं जिससे दुनिया को हमारे सामूहिक स्वास्थ्य निवेशों का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।