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स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय नवाचार

बोस्टन – ज्यों-ज्यों हम घटिया और नकली दवाओं के खतरे के बारे में और अधिक जानने लगे हैं, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यह उससे कहीं अधिक बड़ी समस्या है जितना कि पहले इसके बारे में सोचा गया था। यह एक ऐसा संकट भी है जिसे विकासशील देशों में अधिक तीव्रता से महसूस किया जा रहा है जिसमें नकली और घटिया दवाइयाँ हर साल 5,00,000 से अधिक लोगों की मृत्यु का कारण बनती हैं और ऐसे रोगों के उत्पन्न होने में योगदान करती हैं जो मौजूदा उपचारों के लिए प्रतिरोधी हैं और इसका लाखों लोगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

विकासशील देशों में नीति-निर्माताओं द्वारा अपनाए जानेवाले दृष्टिकोण से यह समस्या और भी जटिल हो जाती है जिनकी इसके समाधान अपने देश में खोजने के बजाय विदेशों में खोजने की संभावना अधिक होती है। यह अदूरदर्शिता एक ऐसी भयंकर भूल है जिससे नवाचार और प्रगति बाधित होती है। जब नकली या घटिया दवाओं के फलने-फूलने जैसी अधिक प्रभावित करनेवाली स्वास्थ्य की चुनौतियों की बात हो���ी है, तो स्थानीय समाधानों और स्थानीय नवाचारों के न केवल किसी भी सफल प्रयास में प्रमुख होने की संभावना होती है बल्कि उनमें ऐसे लाभ प्रदान करने की क्षमता होती है जो मूल समस्या से कहीं अधिक बढ़कर होते हैं।

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पूरी विकासशील दुनिया में, लेकिन अफ्रीका में अधिक जाहिर तौर पर, दो ऐसे समूह हैं जो घटिया दवाओं के खतरे से निपटने के लिए उपकरणों की खोज करने में रुचि रखते हैं। एक समूह, छात्रों, उद्यमियों, और शोधकर्ताओं का है जो ऐसे समाधान खोजने का प्रयास करता है जो स्थानीय हों, मौलिक हों, और उनके समाज की जरूरतों के अनुरूप हों। इसके सदस्य विचारों को साझा करने के लिए तत्पर और सहयोग करने के लिए उत्सुक होते हैं। हालाँकि इस समूह ने कुछ नवोन्मेषी समाधान दिए हैं, उदाहरण के लिए, घाना के उद्यमी ब्राइट सिमन्स द्वारा नकली दवा की समस्या के समाधान के लिए मोबाइल प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है तथा इसमें और बहुत से उत्साही स्थानीय आविष्कारकों और उद्यमियों को शामिल होना चाहिए।

दूसरा समूह सरकारी अधिकारियों का है जिसमें नियामक भी शामिल हैं। वे भी घटिया और नकली दवाओं की इस बीमारी के बारे में बहुत अधिक चिंतित हैं, लेकिन वे स्थानीय नवाचार पर भरोसा नहीं करना चाहते हैं। उनके दिमाग में यह होता है कि उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी के रूप में दुनिया के सबसे अमीर देशों में तैयार और विकसित समाधान पहले से ही मौजूद हैं। इस समूह के लिए चुनौती यह होती है कि इन प्रौद्योगिकियों का आयात करने के लिए वित्तीय संसाधन कैसे प्राप्त किए जाएँ।

विकासशील देशों के नेताओं की दृष्टि में, नवाचार का समर्थन करनेवाले पारिस्थितिकी तंत्र को तैयार करने के लिए आवश्यक प्रयास करने की बात करना तो बहुत अच्छा लगता है, परंतु निवेश पर लाभ बहुत कम मिलता है। अनगिनत सम्मेलनों और संगोष्ठियों में मंत्रालय के अधिकारी और सरकारी कार्मिक इस बात पर जोर देते हैं कि समाधानों का आयात करने के लिए अलग-से धन उपलब्ध होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, अनुसंधान और नवाचार, या स्थानीय उद्यमियों और आविष्कारकों से संपर्क करना उनकी कार्यसूची में कभी शामिल नहीं होता है। देश में उपलब्ध बुद्धि, उत्साह, और ऊर्जा के भारी भंडार का उपयोग करने में उनकी कतई रुचि नहीं होती है।

अधिकारियों के लिए यह बुद्धिमानी की बात होगी कि वे इस पर पुनर्विचार करें। इस बारे में भारी मात्रा में सबूत मौजूद हैं कि स्थायी समाधानों के लिए स्थानीय समर्थन और स्थानीय भागीदारों का होना आवश्यक है। विदेशों से समाधान आयात करने के लिए धन जुटाने से चुनौती के सिर्फ एक हिस्से मात्र पर कार्रवाई होती है।

बहुत से देशों के पास ऐसे उपकरण स्थापित करने, उन्हें चलाने, और उनका रखरखाव करने के लिए संसाधन नहीं होते हैं जिन्हें स्थानीय रूप से तैयार न किया गया हो। चूंकि दुरुपयोग और असावधानी बरतने से उपकरण काम करना बंद कर देते हैं, इसलिए और अधिक धनराशि की आवश्यकता पड़ जाती है या कार्यक्रम ठप्प होकर रह जाता है। यह दृष्टिकोण नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्रों का विकास करने में तो विफल रहता ही है, जो बहुत ही निराशाजनक होता है; यह संबंधित समस्या को हल करने में भी बार-बार विफल रहता है।

यद्यपि दवा-गुणवत्ता के परीक्षण के क्षेत्र में सिमन्स जैसे अफ्रीकी उद्यमियों से कुछ समाधान मिले हैं, परंतु ऐसे उदाहरण बहुत विरल हैं, और उनमें से कई क्षेत्र के बाहर के संगठनों की सहायता से विदेशों में विकसित किए गए हैं। अधिकतर मामलों में, इस तरह की किसी पहल में स्थानीय छात्रों को कभी शामिल नहीं किया जाता है। स्थानीय पाठ्यक्रमों में स्थानीय चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाता है या स्थानीय नवाचार को बढ़ावा नहीं दिया जाता है।

और फिर भी मौलिक और टिकाऊ समाधानों के लिए स्थानीय प्रतिभा महत्वपूर्ण होती है। दरअसल, अनुसंधान की समावेशी संस्कृति का विकास करने पर, स्थानीय नवाचार में ऐसे लाभ प्रदान करने की क्षमता होती है जो हल की जानेवाली विशिष्ट समस्या से कहीं अधिक होते हैं।

कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षा और ज्ञान के लिए अवसर पैदा करने से न केवल सद्भावना पैदा होती है बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रोत्साहन मिलता है। भावी अनुसंधान के लिए सुदृढ़ नींव तैयार करने से अधिक फलदायक सार्वजनिक-निजी भागीदारियों का निर्माण होता है तथा शिक्षाविदों और घरेलू उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनते हैं, और इस प्रकार आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलता है।

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सहायता एजेंसियों या दवा कंपनियों जैसे विदेशी संगठनों की स्थानीय नवाचार को बढ़ाने में एक भूमिका होती है। वे इसे आर्थिक रूप से सहायता प्रदान कर सकते हैं, नई साझेदारियाँ कर सकते हैं, और नीति निर्माताओं को इसे अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

इसमें अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भी भूमिका होती है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य में सुधार के लिए वैश्विक प्रयासों के अगले चरण की शुरूआत करने के रूप में सतत विकास लक्ष्यों को स्वीकार करेगा। जैसा कि विकासशील देशों में नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ लगातार चल रही लड़ाई के उदाहरण से पता चलता है, इसमें सफलता अधिकतर स्थानीय नवाचार से ही मिल सकती है, अन्यथा नहीं।