समलैंगिक पुरुषों को जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) के लिए तैयार करना

लंदन – अक्तूबर में, एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में एक संभावित महत्वपूर्ण खोजवाली दवा के प्रभाव पर शोध करनेवाले दो समूहों ने कुछ असामान्य किया। उन्होंने घोषणा की वे चिकित्सा के लिए जिस ट्रूवाडा (Truvada) नामक एंटीरेट्रोवाइरल दवा का परीक्षण कर रहे थे, वह परीक्षण के यादृच्छिक चरणों को समाप्त करने के लिए काफी प्रभावी सिद्ध हुई है, और वे यह गोली अध्ययन के सभी प्रतिभागियों को दे रहे थे।

शोधकर्ताओं ने यह पाया कि जो समलैंगिक पुरुष पुरुषों से यौन संबंध बनाते समय कंडोम का उपयोग करने के अलावा ट्रूवाडा लेते हैं, उनमें एचआईवी होने की संभावना काफी कम होती है। इस जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) से इसकी कारगरता और भी अधिक सिद्ध होती है, यह एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा एचआईवी नेगेटिव वाले लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं का उपयोग करते हैं। 2011 में, गेट्स फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित एक परीक्षण में यह पाया गया कि ट्रूवाडा का उपयोग करनेवाले विषमलिंगी युगलों में एचआईवी संचारण का जोखिम 73% कम हो जाता है।

इस प्रकार एचआईवी/एड्स के प्रसार को रोकने के लिए लड़ रहे लोगों के शस्त्रागार में यह एक नया उपकरण आ गया है। अब प्रश्न यह है कि इसे उन लोगों, अर्थात विकासशील देशों में समलैंगिक पुरुषों को आसानी से कैसे उपलब्ध किया जाए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है।

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