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समलैंगिक पुरुषों को जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) के लिए तैयार करना

लंदन – अक्तूबर में, एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में एक संभावित महत्वपूर्ण खोजवाली दवा के प्रभाव पर शोध करनेवाले दो समूहों ने कुछ असामान्य किया। उन्होंने घोषणा की वे चिकित्सा के लिए जिस ट्रूवाडा (Truvada) नामक एंटीरेट्रोवाइरल दवा का परीक्षण कर रहे थे, वह परीक्षण के यादृच्छिक चरणों को समाप्त करने के लिए काफी प्रभावी सिद्ध हुई है, और वे यह गोली अध्ययन के सभी प्रतिभागियों को दे रहे थे।

शोधकर्ताओं ने यह पाया कि जो समलैंगिक पुरुष पुरुषों से यौन संबंध बनाते समय कंडोम का उपयोग करने के अलावा ट्रूवाडा लेते हैं, उनमें एचआईवी होने की संभावना काफी कम होती है। इस जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) से इसकी कारगरता और भी अधिक सिद्ध होती है, यह एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा एचआईवी नेगेटिव वाले लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं ���ा उपयोग करते हैं। 2011 में, गेट्स फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित एक परीक्षण में यह पाया गया कि ट्रूवाडा का उपयोग करनेवाले विषमलिंगी युगलों में एचआईवी संचारण का जोखिम 73% कम हो जाता है।

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इस प्रकार एचआईवी/एड्स के प्रसार को रोकने के लिए लड़ रहे लोगों के शस्त्रागार में यह एक नया उपकरण आ गया है। अब प्रश्न यह है कि इसे उन लोगों, अर्थात विकासशील देशों में समलैंगिक पुरुषों को आसानी से कैसे उपलब्ध किया जाए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है।

इस साल की गर्मियों में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया, उसने सभी समलैंगिक पुरुषों और पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों के लिए जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) की सिफारिश की है, जिससे यह ऐसा करने वाला पहला प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन बन गया। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) का अधिक उपयोग करने से पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों में अगले दशक तक एचआईवी संक्रमणों में 25% तक की कमी हो सकती है (इस श्रेणी में अधिक जोखिम वाला कोई भी व्यक्ति शामिल है, न केवल वे व्यक्ति जिनकी पहचान समलैंगिक के रूप में की गई हो)।

लेकिन इसमें आनेवाली एक महत्वपूर्ण बाधा: विकासशील दुनिया के अधिकतर भाग में समलैंगिक पुरुषों की कानूनी स्थिति है। नाइजीरिया जैसे देशों में, जहाँ समलैंगिकता-विरोधी कानून को हाल ही में मंजूरी दी गई है, डब्ल्यूएचओ के नए जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) के दिशानिर्देशों का पालन करनेवाले कारावास के दंड के भागी हो सकते हैं।

नाइजीरिया में आधिकारिक रूप से स्वीकृत समलैंगिकता के विरोध के वातावरण ने एड्स के खिलाफ लड़ाई में पहले ही अड़चन डाल दी है। 2006 में, एक अध्ययन से पता चला था कि नाइजीरिया में पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों में 13% एचआईवी पॉज़िटिव हैं, जबकि इसकी तुलना में कुल नाइजीरियाई व्यक्तियों में से 4.5% एचआईवी पॉज़िटिव हैं। 2012 तक, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों के बीच एचआईवी की दर बढ़कर 17% हो गई। इस बीच, स्वास्थ्य केन्द्रों पर अधिक संख्या में पुरुषों ने बताया कि उन्हें समलैंगिकता के विरोध के वातावरण का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण इसकी संभावना कम है कि वे मदद प्राप्त करने के लिए आगे आएँगे।

परिणाम इससे अधिक गंभीर नहीं हो सकते थे। दो साल पहले, एक युवा एचआईवी पॉज़िटिव नाइजीरियाई पुरुष ने मुझे क्लीनिक में हर महीने होनेवाले अपने कटु अनुभव के बारे में बताने के लिए मुझसे फेसबुक पर संपर्क किया था। अस्पताल में नर्स, वह जो दवाइयाँ ले रहा था उन दवाइयों और उनके संभावित दुष्प्रभावों के बारे में बताने के बजाय, उसे समलैंगिकता की बुराइयों के बारे में व्याख्यान देने पर अधिक समय लगाती थी। उस आदमी ने, जो तीसरे वर्ष का मेडिकल छात्र था, मुझे बताया कि उसने  क्लीनिक न जाने का फैसला कर लिया है। जब मैंने उससे पूछा कि वह इलाज कैसे जारी रखेगा, तो उसने कहा कि विदेश में उसका एक दोस्त है जो उसे दवाएँ दिलवा सकता है। दो साल से कुछ कम समय के बाद, मैंने फेसबुक पर एक अपडेट देखा जिसमें उसकी मृत्यु की घोषणा की गई थी।

मेरा फेसबुक का दोस्त ही ऐसा अकेला व्यक्ति नहीं है जिसे नाइजीरिया के समलैंगिकता के विरोध की कीमत चुकानी पड़ी हो। सॉलिडेरिटी एलायंस नाइजीरिया, समलैंगिक, समलिंगी, उभयलिंगी, और विपरीतलिंगी (एलजीबीटी) संगठनों के गठबंधन की एक प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि समलैंगिकता-विरोधी कानून बनने के बाद छह महीनों में पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों द्वारा एचआईवी सेवाओं के उपयोग में भारी कमी हुई है। यह कमी नाइजीरिया के सबसे अधिक महानगरीय शहर लागोस में 40% से लेकर मुस्लिम-बहुल राज्य कानो में 70% तक थी।

एचआईवी के साथ जीनेवाले नाइजीरियाइयों को केवल संक्रमण से लड़ने के बजाय कुछ और भी करना चाहिए, उन्हें सामाजिक कलंक का बहादुरी से सामना करना चाहिए, धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक संस्थाओं द्वारा किए जानेवाले भेदभाव का मुकाबला करना चाहिए, और अब, संभावित रूप से, कानूनी व्यवस्था से खतरों का सामना करना चाहिए। इस माहौल में, जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) का वायदा मंद पड़ना शुरू हो जाता है, क्योंकि संभावित रूप से जीवन को बचाने के लाभों की तुलना में उपचार कराने के जोखिम अधिक हो जाते हैं।

युगांडा में भी यही कहानी है। पिछले वसंत में वहाँ समलैंगिकों पर किए जानेवाले कानूनी उत्पीड़न में बढ़ोतरी हो गई, सरकार ने एक एचआईवी क्लीनिक पर छापा मारा और उसके प्रचालन लाइसेंस पर इसलिए रोक लगा दी कि उसमें पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले एचआईवी पॉज़िटिव पुरुषों के लिए देखभाल और सहायता प्रदान की जाती है।

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एचआईवी के खिलाफ लड़ाई का दस वर्ष से अधिक का अनुभव रखनेवाला एक अफ्रीकी कार्यकर्ता होने के कारण, मुझे उम्मीद है कि डब्ल्यूएचओ जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) के उपयोग की सलाह देने के अपने पहले महत्वपूर्ण कदम से आगे बढ़ेगा। इसका मतलब है नाइजीरिया, युगांडा, गाम्बिया, और रूस जैसे देशों के साथ एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में शामिल किए जाने के महत्व पर एक सार्वजनिक वार्तालाप की शुरुआत की जानी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ को यह बात स्पष्ट कर देनी चाहिए कि हालाँकि वह एलजीबीटी के राजनीतिक अधिकारों का पक्षधर नहीं है लेकिन वह यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़-निश्चयी है कि जिस किसी को भी जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) से फायदा हो सकता है, उन सभी को कानूनी परिणामों के डर के बिना, आवश्यक दवाओं तक पहुँच प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए। शोधकर्ताओं, दवा कंपनियों, और मानव-अधिकारों के प्रचारकों को यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ाई शुरू करनी चाहिए कि उन लोगों को जोखिम-पूर्व रोग-निवारण (PrEP) जोखिम के बिना उपलब्ध कराया जाता है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है।