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टिकाऊ भविष्य के अवसर का लाभ उठाएँ

बीजिंग – कई वर्षों में पहली बार, बहुत अधिक आशावादी होना सही लग रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था - कुछ एक अड़चनों को छोड़कर - अंततः वित्तीय संकट से उबर रही है।  प्रौद्योगिकीय सफलताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा को जीवाश्म ईंधनों के साथ प्रतिस्पर्धा करने योग्य बना दिया है। और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई पर महत्वपूर्ण समझौते करने की ओर अग्रसर लग रहा है।

और फिर भी यह खतरा बना हुआ है कि ये लाभ व्यर्थ चले जाएँगे क्योंकि नीतिनिर्माता, व्यवसाय अग्रणी और निवेशक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे खतरों को दरकिनार करके अल्पकालिक चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं। यदि हमें अपनी प्रगति को बरकरार रखना है तो हमें अपनी वित्तीय प्रणाली की विफलताओं के मूल तक जाकर विचार करना होगा, ऐसे मानकों, विनियमों, और प्रथाओं को अपनाना होगा जो इसे अधिक समावेशी, टिकाऊ अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाएँ।

इस साल, दुनिया में इसे  कर पाने की क्षमता है। चूँकि बढ़ती सार्वजनिक स्वीकार्यता और प्रौद्योगिकीय प्रगति के फलस्वरूप स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश अधिकाधिक व्यावहारिक होते जा रहे हैं, हरित अर्थव्यवस्था में संक्रमण अब एक निश्चित बात लग रही है, न की आशापूर्ण महत्वाकांक्षा। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की हाल ही की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक निवेश में 17% की वृद्धि हुई, हालाँकि तेल की कीमतों में काफी कमी हुई। इस प्रवृत्ति के मूल में चीन और जापान में सौर ऊर्जा में आई तेजी और अपतटीय पवन ऊर्जा में यूरोपीय निवेश में हुई वृद्धि होना था।

शंघाई से साओ पाओलो के स्टॉक एक्सचेंजों ने निवेशकों को इस बारे में सूचित करने के लिए रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ निर्धारित की हैं कि कंपनियाँ अपनी रणनीतियों में स्थिरता को किस तरह सम्मिलित कर रही हैं। ग्रीन बांडों की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, 2014 में $40 बिलियन से अधिक के बांड जारी किए गए, तथा और अधिक स्पष्ट मानकों और विनियमों के निर्धारित हो जाने पर उनके और भी अधिक लोकप्रिय होने की संभावना है। केंद्रीय बैंक भी अब पर्यावरण पर ध्यान देने लग गए हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना व्यावहारिक उपायों की पहचान करने के लिए “हरित” वित्तीय-बाजार सुधार सुनिश्चित करने के लिए यूएनईपी के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने यूनाइटेड किंगडम के बीमा क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप होनेवाले क्रमिक जोखिमों की विवेकपूर्ण समीक्षा करना आरंभ कर दिया है।