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गैर-संचारी रोगों को लक्ष्य बनाना

इंडियानापोलिस - दुनिया भर में, ज़िंदगियों को तबाह करनेवाला और आर्थिक विकास को अवरुद्ध करनेवाला जो सबसे प्रमुख कारक है उसी के बारे में कार्रवाई करना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। दुनिया भर में होनेवाली सभी मौतों में से अब दो-तिहाई मौतें हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण होती हैं। गैर-संचारी रोग लोगों की ज़िंदगियों को समय से पहले खत्म करने के अलावा अपने शिकारों, उनके परिवारों, और उनके समुदायों को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाते हैं, आर्थिक उत्पादकता को कम कर देते हैं और चिकित्सा लागतों को बढ़ा देते हैं। अगले दो दशकों में, गैर-संचारी रोगों होनेवाले कुल आर्थिक नुकसान $30 ट्रिलियन से अधिक हो सकते हैं

गैर-संचारी रोगों से उत्पन्न जटिल चुनौती के संबंध में कार्रवाई करने के लिए एक समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रयास की आवश्यकता होगी। सौभाग्य से, इस दिशा में हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सितंबर में, संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्यों को अपनाया, इसमें निर्धारित किए गए 17 उद्देश्य अगले 15 वर्ष के लिए वैश्विक विकास के एजेंडा का मार्गदर्शन करेंगे। इनमें गरीबी उन्मूलन और पर्यावरण की रक्षा के उपायों जैसे लक्ष्यों के साथ-साथ गैर-संचारी रोगों की वजह से होनेवाली मृत्यु दर को कम करन��� की प्रतिबद्धता भी है - संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक विकास के एजेंडा में इस समस्या पर पहली बार सीधे लक्ष्य किया गया है।

यह एक स्वागत योग्य मील का पत्थर है, लेकिन यह एक लंबी सड़क के कई मील के पत्थरों में से केवल पहला पत्थर है। गैर-संचारी रोगों से जुड़े भौतिक और आर्थिक बोझ वहाँ सबसे ज्यादा भार डालते हैं जहाँ उन्हें वहन करना सबसे कम आसान होता है: कम और मध्यम आय वाले देश जिनमें गैर-संचारी रोगों से संबंधित 80% मौतें होती हैं। हाल ही में जिन लाखों लोगों ने गरीबी से मुक्ति पाई है, इसके परिणामस्वरूप वे वापस गरीबी में धकेले जा सकते हैं।

सतत विकास लक्ष्यों के फलस्वरूप दिए गए ध्यान और सहयोगियों के दबाव से इसमें प्रगति करने में मदद मिल सकती है। लेकिन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर ध्यान देने, और सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभ संगठनों, और महत्वपूर्ण रूप से निजी क्षेत्र के संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने की आवश्यकता होगी।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि गैर-संचारी रोगों से उत्पन्न चुनौतियों के संबंध में कार्रवाई करने में दो महत्वपूर्ण कारक उपयोगी सिद्ध होंगे। पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रगति ऐसे कारगर और स्थानीय दृष्टिकोणों को तैयार करने पर निर्भर करेगी जिन्हें अपनाया जा सके, दोहराया जा सके, और बढ़ाया जा सके। मधुमेह या हृदय रोग जैसी समस्याओं के लिए सभी के लिए एक ही समाधान जैसी कोई स्थिति नहीं हो सकती। लेकिन यह देखते हुए कि गैर-संचारी रोग दुनिया भर के सभी भागों के समुदायों को प्रभावित करते हैं, ऐसा बहुत अधिक समान धरातल मौजूद है जिसकी लगातार दुबारा खोज करने की आवश्यकता नहीं है।

उदाहरण के लिए, 2013 में कार्लोस स्लिम फाउंडेशन ने मधुमेह की रोकथाम और उसके उपचार की स्थिति को समझने के लिए आठ प्राथमिक देखभाल क्लीनिकों में एक कठोर आधारभूत मूल्यांकन किया था। इस अध्ययन के दौरान एकत्र आंकड़ों के आधार पर, इस फाउंडेशन ने स्क्रीनिंग, उपचार और रोकथाम में सुधार लाने के लिए कम लागत वाले, उपयोगकर्ता-अनुकूल उपकरणों का उपयोग करके CASALUD नामक मॉडल प्रायोगिक रूप से जारी किया जिससे रक्त शर्करा के स्तरों सहित विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण लक्षणों को मापा जा सकता है। इसमें भाग लेने वाले क्लीनिकों को दवाओं की माल-सूचियों पर नज़र रखने और कमियों से बचने के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली से लैस किया गया है।

यह दृष्टिकोण इतना अधिक प्रभावी था कि मेक्सिको के स्वास्थ्य कार्यालय में मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों को बढ़ावा देनेवाले मोटापे को दूर करने के अपने राष्ट्रीय अभियान के लिए आधार के रूप में CASALUD मॉडल का उपयोग किया जा रहा है जो स्थानीय अनुभव के आधार पर कार्य को आगे बढ़ाने का एक बढ़िया उदाहरण है।

गैर-संचारी रोगों के खिलाफ लड़ाई में सफलता के लिए दूसरी प्रमुख बात निजी क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग करने की प्रतिबद्धता है। इसमें न केवल निजी निवेश को जुटाना, बल्कि भारी मात्रा में उस तकनीकी, प्रचालनात्मक, और स्थानीय रूप से तैयार की गई विशेषज्ञता को भारी मात्रा में नियोजित करना भी शामिल है जिसे निजी कंपनियों ने दुनिया भर में कारोबार करने के दौरान हासिल किया है। सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय संगठनों के साथ भागीदारियाँ स्थापित करके, कंपनियाँ विनाशकारी और महंगे रोगों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती हैं।

मैं यह इसलिए जानता हूँ क्योंकि मेरी कंपनी इसी तरह के एक प्रयास, द लिली एनसीडी पार्टनरशिप में शामिल है जिसमें हम गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए अपने भागीदारों और भारत, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील की सरकारों के साथ सहयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, ब्राज़ील में बीमारी की रोकथाम में सुधार लाने के लिए हम रियो ग्रांडे डो सुल के संघीय विश्वविद्यालय, सहित प्रमुख स्थानीय संगठनों के साथ मिलजुल कर काम कर रहे हैं जिनमें उन माताओं की सहायता करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिनका रोग निदान उनके गर्भवती होने के दौरान गर्भावस्था के मधुमेह के रूप में किया गया था और अब उनमें टाइप 2 मधुमेह होने का जोखिम है।

हमारे जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि दुनिया भर में मूलभूत, स्थानीय स्तर पर संचालित सार्वजनिक-निजी भागीदारियों के माध्यम से क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। सतत विकास लक्ष्यों की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए गैर-संचारी रोगों से होनेवाली मौतों में कमी करने सहित, कंपनियों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे पारंपरिक परोपकार से आगे बढ़ें और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के लिए रचनात्मक समाधान तैयार करें। यदि हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि नवोन्मेष स्थानीय परिस्थितियों को समझने और निजी क्षेत्र के विशाल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने से होता है, तो हम सुदूर भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य तथा अधिक तीव्र आर्थिक विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।