school kids india Paul Simpson/Flickr

प्रगति के लिए ज्ञान

लंदन - लगभग 236 साल पहले, अमेरिका के वर्जीनिया राज्य से एक युवा राज्यपाल ने शिक्षा सुधार को एक नई दिशा दी थी। अपने ज्ञान के अधिक सामान्य प्रसार के लिए विधेयक में, थॉमस जेफ़रसन ने ऐसी "सामान्य शिक्षा प्रणाली" का आह्वान किया था जो "सबसे अमीर से लेकर सबसे ग़रीब तक" सभी नागरिकों तक पहुँचे। यह अमेरिकी सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली अर्थात ऐसी संस्था तैयार करने की दिशा में पहला क़दम था जिसकी मदद से देश वैश्विक प्रमुखता तक पहुँच सका।

बीसवीं सदी के आरंभ तक, संयुक्त राज्य अमेरिका सार्वजनिक स्कूली शिक्षा में वैश्विक नेता बन गया था। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश ने आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन, और अधिक सामाजिक गतिशीलता के लिए प्रेरणा प्रदान की। जैसा कि क्लाउडिया गोल्डिन और लॉरेंस काट्ज़ ने दिखाया है, यह शिक्षा के क्षेत्र में अमेरिकी "अनूठापन" था जिसने इस देश को यूरोपीय देशों पर बढ़त दिलाई जिन्होंने मानव पूँजी में कम निवेश किया था।

जब दुनिया के नेता इस हफ़्ते विकास के लिए शिक्षा पर ओस्लो शिखर सम्मेलन में इकट्ठे होंगे, तो इस अनुभव से मिलनेवाला सबक और अधिक प्रासंगिक नहीं हो सकता है। वास्तव में, जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था अधिकाधिक ज्ञान-आधारित बनती जा रही है, वैसे-वैसे देश के लोगों की शिक्षा और कौशल इसका भविष्य सुरक्षित करने के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। जो देश समावेशी शिक्षा प्रणाली तैयार करने में विफल रहते हैं, वे धीमे विकास, बढ़ती असमानता, और विश्व व्यापार में अवसरों के खोने की संभावना का सामना करते हैं।

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