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जीने के लिए मरना

फ्रीटाउन, सिएरा लियोन – तब मैं सिएरा लियोन में ओला ड्यूरिंग चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की आपातकालीन इकाई में कार्यरत एक युवा चिकित्सा अधिकारी था जब मैंने मलेरिया से गंभीर रूप से पीड़ित एक बच्चे की माँ को ज़बर्दस्त झूठ बोलने की सलाह दी थी। उसकी बेटी मरियम्मा को जीवन-रक्षक रक्त चढ़ाने की जरूरत थी। लेकिन उसकी माँ के पास स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने के लिए भुगतान करने और रक्तदाता को मुआवज़े की रकम देने के लिए पैसे नहीं थे। मैंने कई बच्चों को उस स्थिति में मरते हुए देखा था जब उनके माता पिता बेचैनी से आवश्यक धनराशि इकट्ठा करने की कोशिश में लगे होते थे।

मरियम्मा की जिंदगी बचाने का दृढ़ संकल्प कर, मैंने उसकी माँ से कहा कि वह घर जाकर अपनी बेटी की मौत हो जाने की घोषणा कर दे। मैं जानती थी कि इससे उसके रिश्तेदारों के मन में सहानुभूति जाग उठेगी, और वे अंतिम संस्कार को ठीक तरह से करने के लिए अपने थोड़े-बहुत साधनों से जैसे-तैसे जुगाड़ कर लेंगे। उसकी माँ इसके लिए मान गई, और जब वह छह घंटे बाद लौटी, तो उसने मेज पर काफी पैसे डाल दिए जो मरियम्मा की पूरी देखभाल करने, खून चढ़ाने और मलेरिया और कीड़ों के संक्रमण के इलाज के सभी खर्चों को पूरा करने के लिए काफी थे। कुछ दिनों बाद, मैंने चार साल की उस बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी जो अभी भी कमजोर थी पर उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था।

हालाँकि मरियम्मा के रिश्तेदार उसकी बीमारी से बिल्कुल नहीं पसीज��� थे, परंतु वे उसकी मौत पर पसीज कर हरकत में आ गए थे। पश्चिम अफ्रीका में इबोला की महामारी के दौरान भी यही चीज़ बहुत बड़े पैमाने पर हुई थी।

यह माना जाता है कि इस महामारी ने पहले तो दिसंबर 2013 में गिनी के वन क्षेत्रों में अपने पैर पसारे, और फिर धीरे-धीरे सिएरा लियोन और लाइबेरिया में फैल गई। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बीमारी को इन तीन देशों में फैलते हुए देखता रहा जिसमें गांवों के गांव नष्ट हो गए, पूरे के पूरे परिवारों का सफाया हो गया, और उनकी अर्थव्यवस्थाएँ ठप हो गई थीं। लेकिन, शुरू में इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस सच्चाई की ओर से तब तक आँखें मूँदे बैठा रहा जब तक यह महामारी इतनी अधिक नहीं फैल गई कि अब उसकी और अधिक अनदेखी कर पाना संभव नहीं रह गया था। तथापि, तब तक एक बड़ी त्रासदी को दूर करने के लिए बहुत देर हो चुकी थी।

हम अभी भी पश्चिम अफ्रीका में इबोला आपदा की पूरी व्यापकता को जानने की कोशिश कर रहे हैं। बीमारी की चपेट में आने के डर से, स्कूलों को बंद कर दिया गया था, विद्यार्थी और शिक्षक घर पर रहने लग गए थे। दरअसल, बहुत से कामगार भी घरों पर रहने लग गए थे जिससे रेस्तरां, बार, और होटलों ने काम करना बंद कर दिया था और अर्थव्यवस्था ठप पड़ गई थी। निजी क्षेत्र की लगभग आधी नौकरियाँ खत्म हो गई थीं। किसानों के स्वयं-अलगाव के कारण कृषि उत्पादन में 30% की कमी हो गई थी।

लोगों का सामाजिक जीवन भी ठप हो गया था। कई जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया था, और लंबी दूरी की यात्रा को हतोत्साहित किया गया था। कई शहरों में, अपने घर में किसी आगंतुक को स्वीकार करने का मतलब भारी जुर्माने का जोखिम उठाना हो गया था।

बहरहाल, यह बीमारी शहरी क्षेत्रों में भी जंगल की आग की तरह फैलने लग गई थी और इसने इन तीनों देशों को अपनी चपेट में ले लिया था और यह दूसरे देशों में भी फैलने लग गई थी। अब तक, अकेले सिएरा लियोन में ही 8,500 से अधिक संक्रमणों और 3,500 लोगों की मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र संभवतः इससे सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। 220 से अधिक स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की मृत्यु हो जाने पर प्रत्येक 10,000 नागरिकों के लिए केवल 3.4 कुशल स्वास्थ्य कार्मिक बच गए हैं। इबोला का डर बढ़ जाने के फलस्वरूप बहुत से नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करना बंद कर दिया, यह इससे पता चलता है कि अस्पतालों या क्लीनिकों में जन्म लेनेवाले बच्चों की संख्या में 23% की कमी हुई, बुनियादी टीके लगवानेवाले बच्चों की संख्या में 21% की कमी हुई, और मलेरिया का इलाज करवाने वाले बच्चों की संख्या में 39% की कमी हुई। परिणामस्वरूप, इन देशों में टीकों से रोकी जा सकनेवाली बीमारियों, मलेरिया, मातृ एवं शिशु मौतों, और तीव्र कुपोषण की स्थिति फिर से उत्पन्न हो गई है। यह देखते हुए, स्थिति अभी और भी खराब हो सकती है।

लेकिन सिएरा लियोन ने स्थिति को संभालना शुरू कर दिया है, और उसने द्वि-वर्षीय पुनरुत्थान योजना आरंभ की है। उसकी पहली प्राथमिकता इबोला के मामलों की संख्या को शून्य तक लाना और उसे वहीं स्थिर रखना है। इसका मतलब उन स्थितियों को बदलना है जिनके कारण यह शुरू में इतनी तेजी से फैल गया था।

पहला उपाय स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का पुनर्निर्माण करना है। योजना में यह अपेक्षा की गई है कि देश भर के 40 अस्पतालों और 1,300 प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को बहाल किया जाए ताकि बच्चों और माताओं को आवश्यक देखभाल, टीकाकरण, और टीबी, एचआईवी/एड्स, और मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए उपचार नि: शुल्क प्राप्त हो सके। इसके अलावा, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने और उसमें विश्वास को बहाल करने की दृष्टि से इस योजना में बेहतर संक्रमण नियंत्रण पद्धतियों को अपनाने और कुशल कार्यकर्ताओं के एक नए संवर्ग को प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। और इसमें सामुदायिक समूहों के साथ घनिष्ठ सहयोग भी शामिल है जिन्हें रोग निगरानी और प्रतिक्रिया के कार्य में लगाया जाना चाहिए।

इबोला की स्थिति के बाद का सुधार, इतना शीघ्र, आसान, या सस्ता नहीं होगा। अकेले सिएरा लियोन में ही इसकी लागत $1.3 बिलियन आने का अनुमान है जिसमें से $896.2 मिलियन अभी तक प्राप्त किए जाने बाकी हैं। इस अंतराल को पाटने के लिए, हमें अपने अफ्रीकी भागीदारों और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की जरूरत है।

कई साल पहले, झूठ की मदद के बिना, मरियम्मा की मृत्यु हो गई होती। आज हमें झूठ की जरूरत नहीं है। हमें स्थानीय, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर, वास्तविक कार्य, खुले संप्रेषण, और आपसी जवाबदेही की जरूरत है। हम पहले ही यह देख चुके हैं कि आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की कमी किस तरह किसी देश को बर्बाद कर सकती है, हजारों लोगों के जीवन को लील सकती है, और अनेक लोगों की जिंदगी को तबाह कर सकती है।

हम इबोला का मुकाबला करने के लिए एक देश के रूप में इकट्ठे हुए थे, और हम भविष्य में होनेवाली महामारियों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लगातार मिल रहे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से, हम इसे करके रहेंगे।