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स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिए सुनहरा भविष्य

म्यूनिख - समीक्षकों को यह सोचने के लिए माफ़ किया जा सकता है कि तथाकथित स्वच्छ प्रौद्योगिकी का बुलंदियों को छूने का समय बीत चुका है। पिछले दो वर्षों के दौरान बहुत से स्वच्छ-प्रौद्योगिकी ईक्विटी सूचकांकों का निष्पादन खराब रहा है। यूरोप में सौर विद्युत को धक्का तब लगा जब यूरोपीय आयोग ने 2017 तक नवीकरणीय ऊर्जा के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायताओं को क्रमशः समाप्त करने का निर्णय लिया। 2013 से सौर पैनलों में जर्मनी में लगभग 60% और इटली में 70% की कमी आई। इस बीच, यूनाइटेड किंगडम में प्रारंभिक अवस्था वाले उद्यमी-पूंजी-निधिप्राप्त स्वच्छ-प्रौद्योगिकी वाले 30% से कम सौदों का वित्त-पोषण हुआ।

सच तो यह है कि हम यह स्थिति पहले भी देख चुके हैं। स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उतार-चढ़ाव उस चक्र के लक्षण मात्र हैं जो उभरती प्रौद्योगिकियों की विशेषता के लक्षण हैं: उत्साह, बहुत अधिक अपेक्षाएँ, और एकीकरण - जिसके बाद अंततः स्थिरता आती है और दुबारा विकास शुरू होता है। वास्तव में, हाल ही की गतिविधियों में कही अधिक महत्वपूर्ण कायाकल्प के लक्षण हैं: स्वच्छ प्रौद्योगिकी वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक होती जा रही है।

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स्वच्छ-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के भविष्य में भरोसे के मूल में इस धरती के लिए टिकाऊ समाधानों की आवश्यकता छिपी है जो पहले से कहीं अधिक संपन्न होती जा रही जनसंख्या का भरण-पोषण कर रही है। अगले 20 वर्षों में, मध्यवर्गीय उपभोक्ताओं का संख्या आज के 1.8 बिलियन से बढ़कर लगभग तीन बिलियन हो जाने की संभावना है। उनकी नई जीवन-शैलियों के लिए साधनों की ज़रूरत होगी, जिसमें ऊर्जा भी शामिल है।

मांग में उछाल एक ऐसे समय पर आएगा जब ऊर्जा के नए स्रोतोंऔर संसाधनों को ढूँढ़ना, उनका विकास करना और उन्हें प्राप्त करना अधिकाधिक चुनौतीपूर्ण और महँगा होगा। उदाहरण के लिए, पिछले 12 वर्षों में तेल के एक कुएँ के निर्माण की औसत वास्तविक लागत दुगुनी हो गई है, और हाल ही के वर्षों में उद्योग के सर्वोत्तम (और अक्सर महँगे) प्रयासों के बावजूद हुई, खनन की नई खोजें न के बराबर हुई हैं। लेकिन स्वच्छ प्रौद्योगिकी की लागतों की प्रवृत्तियाँ विपरीत दिशा में चल रही हैं, इन समाधानों को एक ऐसे समय पर परिपक्व करना जब इनकी आवश्यकता तीव्र होती जा रही है - विशेष रूप से विश्व के सबसे बड़े विकासशील नगरों में।

स्वच्छ प्रौद्योगिकी के भविष्य के बारे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह रहा है कि क्या इसे पनपने के लिए विनियामक सहायता की ज़रूरत है। यह सच है कि यूरोप में आर्थिक सहायताओं को हटा देने से इस क्षेत्र को भारी धक्का लगा है। हालाँकि जर्मनी और इटली ने नई सौर-विद्युत स्थापनाओं की दृष्टि से अपना पहला और दूसरा स्थान खो दिया, परंतु उनका स्थान चीन और जापान ने ले लिया। वैश्विक रूप से, 2006 से अब तक सौर-विद्युत उद्योग का विकास 57%की औसत वार्षिक दर से हुआ है।

विनियामक सहायता नवीकरणीय आपूर्ति के स्रोतों के लिए मांग तैयार करने और मानक प्राप्त करने में प्रभावशाली रही है। लेकिन ऐसी सहायता हमेशा आर्थिक रूप से प्रभावशाली नहीं रही है। जर्मनी के अनुभव से सीखा गया एक सबक यह है कि विनियम में किए जाने वाले अचानक परिवर्तन मांग में भारी उतार-चढ़ाव ला सकते हैं जो एक ऐसे उद्योग के लिए मददगार नहीं होते हैं जो अभी उभर रहा हो। बहुत से बाज़ारों में सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि आर्थिक सहायता और अन्य सहायताओं को हटा दिया जाएगा, बल्कि यह है कि इस क्षेत्र का विकास होने के साथ-साथ विनियामक ढाँचा उसके अनुकूल नहीं बन पाएगा।

उद्योग ज्यों-ज्यों परिपक्व होते जाते हैं, उनके नीतिगत समर्थन का मामला उतना कमज़ोर होता जाता है। और, वास्तव में सौर ऊर्जा विनियामक मदद के बिना जीवित रहने में अधिकाधिक सक्षम प्रतीत होती है।

संपन्न वैश्विक बाजार का सभी संसाधन विकल्पों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। पिछले पांच वर्षों के दौरान, दर्जनों सौर विनिर्माण कंपनियाँ असफल हुई हैं, और उनका स्थान अधिक मज़बूत, अधिक नवोन्मेषी, और अधिक कुशल कंपनियों ने ले लिया है। वैश्विक सौर फोटोवोल्टिक की चौथाई से अधिक संचयी क्षमता को केवल पिछले एक साल में स्थापित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, जिसके सौर ऊर्जा की संभावनाओं के बारे में विचार दकियानूसी रहे हैं, वह अब यह उम्मीद कर रही है कि यह 2050 तक दुनिया का सबसे बड़ा विद्युत स्रोत बन जाएगा

इतना ही नहीं, स्वच्छ प्रौद्योगिकी के भविष्य के बारे में चिंताओं के कारण नई परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण को अधिक कठिन बना दिया है। लेकिन स्वच्छ प्रौद्योगिकी बांड और तृतीय-पक्ष के वित्तपोषण जैसी नवोन्मेषी नई योजनाओं के फलस्वरूप दृश्य बदल रहा है। तृतीय पक्ष स्वामित्व, जिसमें कोई कंपनी निर्धारित मासिक दर पर या बिजली की प्रति यूनिट के लिए निश्चित मूल्य के बदले में, सौर पैनल स्थापित करती है और उनका रखरखाव करती है, के फलस्वरूप कैलिफोर्निया में स्वीकरण दरें बढ़ गई हैं जहाँ 2012 और 2013 में दो-तिहाई से अधिक नए प्रतिष्ठानों का वित्तपोषण किया गया। इसी तरह, डेमलर और टेस्ला के साथ नई साझेदारी होने, टोटल द्वारा सनपॉवर में हित नियंत्रण रखने के रूप में उद्योग की बड़ी कंपनियों के साथ नई भागीदारियों के फलस्वरूप छोटी कंपनियों के लिए वित्त की लागत कम हो रही है।

इस बीच, स्वच्छ प्रौद्योगिकी कंपनियाँ और अधिक परिष्कृत और रचनात्मक होती जा रही हैं। ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर एक बिल्कुल नया उद्योग बनाया गया है। सी 3 एनर्जी जैसी कुछ कंपनियाँ, ऐसी विद्युत उपयोगिताओं वाले सॉफ्टवेयर प्रस्तुत कर रही हैं जिनका उपयोग वे अपने ग्रिड प्रचालनों को बेहतर बनाने और परिसंपत्तियों के उपयोग में सुधार लाने के लिए उपने बिजली के नेटवर्कों का विश्लेषण करने के लिए कर सकते हैं।

पिछले दशक में स्मार्ट ग्रिड हार्डवेयर का विकास और बहुत अधिक उपयोग किया गया, और कंपनियों को जैसे-जैसे यह समझ में आ जाएगा कि बड़े डेटा और विश्लेषणात्मक उपकरणों का उपयोग कैसे किया जाना है, यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। गूगल द्वारा नेस्ट लैब्स का $3.2 बिलियन में अधिग्रहण करना इसका एक अच्छा उदाहरण है कि कंपनियाँ इस प्रकार के डेटा का मूल्य किस तरह आँक रही हैं।

यह सब मिलाकर उस उद्योग को बनाते हैं जिसमें ब्लूमबर्ग की गणना के अनुसार पिछले वर्ष तक निवेश $310 बिलियन तक पहुँच चुका था। यह कोई "अनूठा" क्षेत्र नहीं है, बल्कि परिसंपत्ति-प्रधान उद्योग है जिसका धीरे-धीरे वस्तुकरण हो रहा है।

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स्वच्छ प्रौद्योगिकी परिपक्व होती जा रही है और इसके प्रचालन, विपणन, बिक्री और वितरण में विश्वसनीय प्रबंधन के तरीकों को अपनाया जा रहा है। यह उद्योग अधिकाधिक उन दृष्टिकोणों को लागू कर रहा है जिनके फलस्वरूप अन्य क्षेत्रों में सफलता सुनिश्चित हुई है जैसा कि खरीद की लागतों को कम करना और विनिर्माण में अल्प सिद्धांतों को लागू करना। स्वच्छ प्रौद्योगिकी कारोबार जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, उनमें सुधार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होंगे।

स्वच्छ-प्रौद्योगिकी उद्योग में शुरूआत कठिन रही है; लेकिन उभरती प्रौद्योगिकियों में ऐसा होना सामान्य बात होती है, और कमज़ोर कंपनियों को निकालकर इसने इस क्षेत्र को अधिक मज़बूत बना दिया है। यह एक ऐसा वैश्विक क्षेत्र है जो बढ़ती हुई वैश्विक ज़रूरतों को पूरा करता है। इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है कि स्वच्छ-प्रौद्योगिकी उद्योग आनेवाले दिनों के बहुत अच्छे होने की उम्मीद कर सकता है।