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तेल की कीमतों के लिए एक नई उच्चतम सीमा

लंदन – अगर कोई एक तत्व विश्व की अर्थव्यवस्था के भाग्य का निर्धारण करता है, तो यह तेल के एक बैरल की कीमत है। 1970 के बाद से हर वैश्विक मंदी से पहले तेल की कीमत कम-से-कम दुगुनी हुई है, और हर बार जब तेल की कीमत गिर कर आधी हुई है और लगभग छह महीने तक कम बनी रही है, तो उसके बाद वैश्विक विकास में भारी तेज़ी आई है।

तेल की कीमत $100 से गिर कर $50 तक पहुँच जाने के बाद, अब वास्तव में ठीक इसी महत्वपूर्ण स्तर के आस-पास बनी हुई है। इसलिए क्या हमें यह आशा करनी चाहिए कि $50 तेल के लिए नई ट्रेडिंग रेंज की न्यूनतम नियत दर या उच्चतम सीमा होगी?

अधिकतर विश्लेषक अभी भी $50 को न्यूनतम नियत दर – या यहाँ तक कि एक उछाल दर के रूप में देखते हैं, क्योंकि वायदा बाजार में ख़रीद-फरोख्त की स्थिति से अपेक्षाकृत तेज़ वापसी होने की आशा के फलस्वरूप इसके $70 या $80 तक बढ़ जाने की उम्मीदों का पता चलता है। लेकिन अर्थशास्त्र और इतिहास इशारा करते हैं कि आज की कीमत को बहुत कम ट्रेडिंग रेंज के लिए एक संभावित उच्चतम सीमा के रूप में देखा जाना चाहिए, जो और भी अधिक कम होकर $20 तक नीचे आ सकती है।

ऐसा क्यों हो सकता है, यह देखने के लिए हमें पहले आज के ऊर्जा अर्थशास्त्र के मूल में व्याप्त वैचारिक विडंबना पर विचार करना होगा। तेल बाजार में हमेशा से एकाधिकार और प्रतिस्पर्धा के बीच संघर्ष की स्थिति बनी रही है। लेकिन पश्चिमी टीकाकार जिस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं वह यह है कि आजकल प्रतिस्पर्धा का चैंपियन सऊदी अरब है जबकि टेक्सास के स्वतंत्रता-प्रेमी तेलपुरुष ओपेक को अपनी एकाधिकार शक्ति को फिर से स्थापित करने के लिए दुआ कर रहे हैं।