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मोदी का जनादेश

वाशिंगटन, डीसी – लोकतंत्र की एक प्रभावशाली प्रक्रिया में, 800 मिलियन पात्र मतदाताओं ने भारत के 16वें आम चुनाव में भाग लिया। अनुदार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे जिन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में अपने 13 वर्षों के कार्यकाल में तीव्र आर्थिक विकास का संचालन किया। मोदी इसलिए जीते कि ज़्यादातर भारतीयों का मानना है कि वे देश में समग्र रूप से अधिक तीव्र विकास ला सकते हैं।

चुनाव ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि राजनीतिक दृष्टि से भारत अपने विशाल पड़ोसी, निरंकुश चीन से कितना अलग है। तथापि, अब नई सरकार को यह कोशिश करनी चाहिए कि चीन ने पिछले तीन दशकों में जो बेहतर आर्थिक प्रगति हासिल की है, वह उसके मुकाबले की प्रगति करे।  ऐसा करने के लिए, इसे एक भिन्न राजनीतिक संदर्भ में, चीन की आर्थिक सफलता के दो प्रमुख तत्वों को प्रोत्साहन देना होगा।

पहला तत्व वह मजबूत औद्योगिक क्षेत्र है जो अकुशल श्रम का उपयोग करने वाले विनिर्माण उद्योगों से बना है और जो भारत के लाखों करोड़ों ग्रामीण मज़दूरों और उनके परिवारों को गरीबी से बाहर निकलने का एक रास्ता उपलब्ध करेगा। यह वह रास्ता है जिसे चीन ने, और उससे पहले अन्य देशों ने अपनाया है। इसके विपरीत, भारत में औद्योगिक क्षेत्र के अल्प-विकास ने देश को अपनी पूरी आर्थिक क्षमता को प्राप्त नहीं करने दिया है।

दूसरा तत्व बुनियादी सुविधाएँ है जिसकी सभी प्रकार के आर्थिक विकास के लिए ज़रूरत होती है: सड़कें, पुल, बंदरगाह, और विद्यालय, और साथ ही बिजली और साफ पानी की विश्वसनीय आपूर्ति। भारत में अपर्याप्त बुनियादी सुविधाएँ होने के कारण उद्योग मजबूर हैं। कारखानों को सुचारू रूप से प्रचालन करने के लिए बिजली की विश्वसनीय आपूर्ति, निविष्टियाँ प्राप्त करने और उत्पादों का वितरण करने के लिए अच्छी सड़कें और रेलवे, और अगर उन्हें उन उत्पादों का निर्यात करना हो तो मालवाहक जहाज़ों के लिए बंदरगाहों और उच्च मूल्य की वस्तुओं और कारोबारी यात्रा के लिए विमानपत्तनों की ज़रूरत होती है। चीन के पास ये चीज़ें भारी मात्रा में हैं। भारत के पास नहीं हैं।