अरब दुनिया के विकल्प

अम्मान - जब 2011 में अरब जागरण शुरू हुआ, तो इसका प्रमुख लक्ष्य बहुलवाद और लोकतंत्र को आगे बढ़ाना होना चाहिए था - वे कारण जिनकी बीसवीं सदी में अरब दुनिया के पहले, औपनिवेशिक-विरोधी जागरण में उपेक्षा की गई थी। लेकिन, संघर्ष के तीन साल बाद, यह प्रक्रिया केवल अभी शुरू ही हुई है। क्या दूसरा अरब जागरण अंततः अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकेगा?

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि अरब देश अपने संक्रमण के मार्गदर्शन के लिए तीन मॉडलों में से कौन-सा मॉडल इस्तेमाल करेंगे: समावेशी, दूरदर्शी मॉडल जिसका लक्ष्य आम सहमति बनाना है; ‘सब कुछ विजेता का’ वाला दृष्टिकोण जो आबादी के बड़े हिस्सों को अलग कर देता है; या शासन के अस्तित्व पर फ़ोकस करने वाला ‘कहीं न थमने वाला’ दृष्टिकोण। ये मॉडल अरब देशों की वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की संभावनाओं के बीच भारी अंतर को दर्शाते हैं।

समावेशी मॉडल का सबसे मज़बूत उदाहरण ट्यूनीशिया है, जहाँ पूर्व विरोधियों ने, सेना के हस्तक्षेप के बिना, गठबंधन सरकार का गठन किया है। बेशक, यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। लेकिन, तनावपूर्ण संघर्ष के बाद, ट्यूनीशियाई लोगों ने समझ लिया कि आगे बढ़ने के लिए सहयोग ही एकमात्र रास्ता है।

To continue reading, please log in or enter your email address.

To read this article from our archive, please log in or register now. After entering your email, you'll have access to two free articles every month. For unlimited access to Project Syndicate, subscribe now.

required

By proceeding, you agree to our Terms of Service and Privacy Policy, which describes the personal data we collect and how we use it.

Log in

http://prosyn.org/FCvlwqi/hi;

Cookies and Privacy

We use cookies to improve your experience on our website. To find out more, read our updated cookie policy and privacy policy.