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प्रवासियों के बॉन्ड

वाशिंगटन डी.सी. - मजबूत कार्यक्रमों और पर्याप्त वित्तपोषण के बगैर 2015 के बाद के विकास एजेंडा के लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते हैं. हर साल 130 अरब डॉलर की आधिकारिक विकास सहायता दी जाती है. हालांकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विभिन्न मदों में पूंजी के प्रवाह से गरीब अर्थव्यवस्थाओं को मदद मिल सकती है तथापि वित्तीय विकास के अतिरिक्त स्रोतों को तलाशा जाना चाहिए.

ऐसा ही एक स्रोत है प्रवासियों द्वारा वित्तपोषण जिसका पर्याप्त दोहन नहीं हुआ है. प्रवासियों द्वारा वित्तपोषण का अर्थ है विदेशों में कार्यरत प्रवासियों द्वारा धन की बचत और इसे उनके मूल देश में परिवार व मित्रों को भेजा जाना. चुनौती है इस आय को किस तरह प्रभावी ढंग से प्रवाहित किया जाए.

आज सारी दुनिया में 23 करोड़ से ज्यादा प्रवासी अलग-अलग देशों में काम कर रहे हैं. यह तादाद दुनिया के पांचवें सबसे बड़ी आबादी वाले देश ब्राजील की आबादी से भी अधिक है. ये प्रवासी कुल मिलाकर 2.6 खरब डॉलर सालाना की कमाई करते हैं. यह दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यूनाइटेड किंगडम के सकल घरेलू उत्पादन से ज्यादा है. इसमें से ज्यादातर आय पर निवास के देशों में कर लगता है या यह वहीं खर्च हो जाती है. लेकिन उनकी 20% की बचत दर (जो विकासशील देशों के औसत के करीब है) से यह अनुमान लगा सकते हैं कि इन प्रवासियों की सालाना बचत 500 अरब डॉलर से ज्यादा है.

सन् 2013 में विकासशील देशों के प्रवासियों ने करीब 404 अरब डॉलर घर भेजे थे. इसमें वह रकम शामिल नहीं है जो अनौपचारिक मार्गों से भेजी गई व जिसका रिकॉर्ड नहीं है. 70 अरब डॉलर भारत भेजे गए जो सूचना-प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्��ात मूल्य से कहीं अधिक है. मिस्र को मिलने वाली रकम उसे स्वेज नहर से होने वाली आमदनी से ज्यादा है. और मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान को उसके प्रवासियों द्वारा जो रकम भेजी गई वह उसकी राष्ट्रीय आय के एक-तिहाई भाग से अधिक है.