आप्रवास: यूरोप के लिए सुअवसर

लंदन – पिछले वर्ष 4,000 से अधिक पुरुषों, महिलाओं एवं बच्चों को भू-मध्यसागर पार कर अफ्रीका से यूरोप जाने के प्रयास में अपनी जान गँवानी पड़ी। उनकी दर्दनाक मौतों के के बाद भी उमड़ती भीड़ में कोई कमी नहीं हुई है बल्कि यह हर सप्ताह बढ़ती जा रही है, और तट पर तस्करों की निर्लज्जता और क्रूरता भी निरंतर बढ़ रही है। केवल इसी वर्ष के आरंभ से लेकर अब तक बर्फीले पानी से हजारों प्रवासियों की जान बचाई जा चुकी है।

इस पृष्ठभूमि में - और पेरिस एवं कोपेनहेगन में आतंकी हमलों से उत्प‍न्न भय को देखते हुए - यूरोपीय संघ, आप्रवास के मुद्दे पर एक नई और अत्यंत महत्वपूर्ण योजना तैयार करने के लिए कमर कस चुका है। इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई हेतु विचार-विमर्श करने के लिए जब यूरोपीय संघ के आयुक्तों की बैठक होगी, तो उन्हें तात्कालिक एवं भावनात्मक समाधानों के प्रलोभन से बचना होगा, और इसके बजाय अपने देश और विदेश दोनों के लिए सचमुच रचनात्मक और व्यापक योजना तैयार करनी होगी।

पिछली बार 2011 में यूरोप में आप्रवास को लेकर कुछ ऐसी ही निर्णायक स्थिति तब आई थी जब अरब स्प्रिंग के फलस्वरूप उत्तरी अफ़्रीका में हिंसा और अव्यवस्था के कारण लोगों का सैलाब वहाँ से कूच करके नए आगंतुकों के रूप में आने लग गया था। वह समय शरणार्थियों के भरण-पोषण हेतु निवेश के लिए भू-मध्यसागर मार्शल योजना तैयार करने का साहसिक कदम उठाने का था जिसमें निवेश को आप्रवास से जोड़ा जा सकता था परंतु यह अवसर यूँ ही हाथ से निकल जाने दिया गया। इसके बजाय, यूरोपीय संघ ने अपनी शरणार्थी व्यवस्था में दिखावटी सुधार किए और प्रवासी “कल्याण में धोखाधड़ी” जैसे व्यर्थ के मुद्दों पर बहस करके संतोष कर लिया।

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