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याल्टा प्रलोभन

कीव – सितंबर 1939 में युद्ध की घोषणा और मई 1940 में बेल्जियम और फ़्रांस पर नाज़ी हमले की तैयारी के बीच की शांत अवधि को अक्सर "छद्म युद्ध" कहा जाता है।  जब से रूस ने क्रिमिया पर आक्रमण और कब्ज़ा किया है, और हमारी पूर्वी सीमा पर सैनिकों की टुकड़ियाँ और बख्तरबंद सेना तैनात करना शुरू किया है, तब से यूक्रेन में हम "छद्म शांति" में जी रहे हैं।

तथापि, हम यूक्रेनियन लोग अब अपने देश और अपने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जो प्रयास कर रहे हैं उनमें कुछ भी छद्म नहीं है।  हमारे युवा पुरुष और महिलाएँ सैन्य सेवा के लिए स्वैच्छिक रूप से आगे आ रहे हैं, जैसा पहले कभी नहीं हुआ। हमारी सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ आपातोपयोगी ऋण अनुबंध किया है जिससे हमें वे साधन मिल सकेंगे जिनकी हमें अपनी वित्तीय और आर्थिक स्थिति को व्यवस्थित करने के लिए ज़रूरत है। उस अनुबंध से वास्तविक आर्थिक परेशानियाँ भी शुरू हो जाएँगी, लेकिन यूक्रेनियन लोग अपनी आज़ादी की रक्षा करने की क़ीमत अदा करने के लिए तैयार हैं।

उपेक्षा की अवधि के बाद, वह एक ऐसा समय था जब - यूरोप के बाकी हिस्सों की तरह - हम भी मानते थे कि महाद्वीप की सीमाओं को फिर कभी बल प्रयोग से नहीं बदला जाएगा, अपनी अर्थव्यवस्था की अनिश्चित स्थिति के बावजूद, हम अपने रक्षा ख़र्च में भी बढ़ोतरी कर रहे हैं। संप्रभु यूक्रेनी क्षेत्र को अब और समर्पित नहीं किया जाएगा। एक इंच भी नहीं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे ख़िलाफ़ रूसी सेना के लामबंद हो जाने के बावजूद, हम चुनाव अभियान की तैयारी कर रहे हैं।  अगले महीने, यूक्रेन के नागरिक स्वतंत्र रूप से नए राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे - जो लोकतंत्र बनाए रखने की हमारी तथाकथित विफलता पर रूसी प्रचार का सर्वोत्तम संभव मुँहतोड़ जवाब होगा।