woman carrying water Noah Seelam/Stringer

युद्ध और शांति और जल

वाशिंगटन, डीसी - वर्तमान में भारत को पिछले कई वर्षों में पहली बार सबसे खराब जल के संकट का सामना करना पड़ रहा है -अनुमान है कि लगभग 330 मिलियन लोग - इसकी चौथाई आबादी - गंभीर सूखे से प्रभावित हैं। इथियोपिया को भी कई दशकों में पहली बार सबसे गंभीर सूखे से निपटना पड़ रहा है, जिसके फलस्वरूप पहले ही कई फसलें नष्ट हो चुकी हैं, खाद्य पदार्थों की कमी हो गई है जिससे अब आबादी का लगभग दसवाँ हिस्सा प्रभावित है। ऐसी परिस्थितियों में, संसाधनों की वजह से होनेवाले तनाव का बहुत अधिक जोखिम होता है।

अतीत में, ऐसी गंभीरता के सूखों के फलस्वरूप पड़ोसी समुदायों और राज्यों के बीच संघर्ष और युद्ध तक भी हुए हैं। इतिहास में पहली ऐसी स्थिति लगभग 4,500 साल पहले उत्पन्न हुई थी, जब लगाश के शहर-राज्य - जो आधुनिक समय में इराक में दजला और फरात नदियों के बीच बसे हैं - अपने पड़ोसी देश उम्मा से पानी प्राप्त करते थे। जल के लिए प्रतिस्पर्धा के कारण प्राचीन चीन में हिंसक घटनाएँ हुईं और मिस्र साम्राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन गई।

आज बेहतर संवाद और सीमा पार से सहयोग के फलस्वरूप जल संसाधनों के कारण देशों के बीच वास्तविक युद्ध सामान्यतः नहीं होते हैं। लेकिन, देशों के भीतर दुर्लभ जल के लिए प्रतिस्पर्धा अस्थिरता और संघर्ष का अधिक सामान्य स्रोत बनती जा रही है, विशेष रूप से इसलिए कि जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप चरम मौसम की घटनाओं की गंभीरता और आवृत्ति बढ़ती जा रही है। जैसा कि हमने अपनी नई रिपोर्ट “असहाय स्थिति: जलवायु परिवर्तन, जल और अर्थव्यवस्था” में विस्तार से बताया है, सीमित और अनियमित जल उपलब्धता से आर्थिक विकास में कमी होती है, पलायन में वृद्धि होती है, और नागरिक संघर्ष भड़कते हैं, जिससे संभावित रूप से अस्थिरता लाने वाले पलायन में और तेज़ी आती है।

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