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अब सतत ऊर्जा

वाशिंगटन, डीसी – दुनिया अधिक सतत और सुरक्षित ऊर्जा भविष्य के सपने को साकार करने के इतने करीब पहले कभी नहीं पहुँच पाई है। हवा और सूर्य से प्राप्त होनेवाली नवीकरणीय ऊर्जा जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन के साथ, प्रतिस्पर्धात्मक होती जा रही है और तेल की कीमतें इतनी अधिक कम होती जा रही हैं जितनी पिछले कई सालों में नहीं देखी गई हैं। इन गतिविधियों के फलस्वरूप, जब तक हम अपने अगले कदम सही रखते हैं, तब तक हम वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का लाभ उठाने की स्थिति में हैं।

देशों ने इस क्षण का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। 2014 के मध्य में तेल की कीमतों में गिरावट आनी शुरू होने पर पहली प्राथमिकता स्पष्ट हो गई: कीमतों में वापस वृद्धि शुरू होने से पहले, जीवाश्म ईंधन सब्सिडियों में सुधार कर लेना चाहिए। इन सब्सिडियों ने सरकारी बजटों को खोखला कर दिया है, ऊर्जा के व्यर्थ के उपयोग को प्रोत्साहित किया है, और प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जनों में वृद्धि की है। भारत ने डीज़ल की कीमत पर नियंत्रण हटा लिए हैं। इंडोनेशिया ने पेट्रोल सब्सिडियों को समाप्त कर दिया है। दूसरे देश भी यह करने जा रहे हैं। सब्सिडियों को समाप्त करने से बचनेवाले धन का उपयोग ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि होने की स्थिति में गरीबों की रक्षा के लिए सुरक्षा जाल बनाने के लिए बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन जीवाश्म ईंधन की सब्सिडियों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना महत्वपूर्ण है, और केवल यही सही दिशा में पहला कदम है। अब सस्ती कीमतों पर व्यापक रूप से उपलब्ध नई प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने से, देश अंततः दीर्घक��लिक ऊर्जा सुरक्षा की ओर कदम बढ़ा सकते हैं और तेल बाजारों में निहित अस्थिरता से बच सकते हैं।

निम्न आय वाले देशों के लिए, इसका मतलब है बिजली के उत्पादन के लिए आयातित तेल के उपयोग को कम करना। उदाहरण के लिए, केन्या अपने बिजली के 21% उत्पादन के लिए भारी ईंधन तेल और डीज़ल पर निर्भर करता है; सेनेगल में तुलनीय आँकड़ा 85% जितना अधिक है; और कुछ द्वीप राज्य अपनी बिजली की सभी जरूरतों के लिए आयातित डीज़ल का उपयोग करते हैं।

कुछ देशों के लिए, यह वर्तमान में एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है, लेकिन दीर्घकाल में इस निर्भरता का मतलब ऊर्जा की ऊँची लागतें और कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति के झटके हो सकता है। सही नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन के साथ, ये देश अधिक विविधतायुक्त मिली-जुली ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे में निवेश कर सकते हैं।

कई देशों के लिए, अगला कदम होगा सौर और पवन ऊर्जा जैसे परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा के उच्च स्तरों को एकीकृत करने के लिए बिजली ग्रिड तैयार करना। सौर पैनलों और पवन टर्बाइनों की लागत में कमी होने के फलस्वरूप, इन दोनों का इतनी अधिक तेज़ गति से विस्तार हो रहा है जिसकी कभी उम्मीद नहीं की गई थी। विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2014 की स्थिति के अनुसार, 144 देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार करने के लिए राष्ट्रीय योजनाओं की स्थापना की थी, और लगभग 100 देशों ने विशिष्ट लक्ष्य और प्रोत्साहन निर्धारित किए थे। 2006 से 2013 तक, मात्र सात वर्षों में, दुनिया की पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता चार गुना हो गई, जबकि फोटोवोल्टिक प्रणालियों के उपयोग में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई। और यह सभी इस बात के सूचक हैं कि इसे अपनाने की गति में तेज़ी आ रही है।

पवन और सौर ऊर्जा को परंपरागत विद्युत प्रणालियों में एकीकृत करने के बारे में पुरानी चिंताओं पर अब ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मेक्सिको में, महत्वाकांक्षी और अक्सर दूरदराज की नवीकरणीय ऊर्जा की परियोजनाओं - पनबिजली, सौर, और पवन - को ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। चीन, जो नवीकरणीय ऊर्जा के लिए दुनिया की सबसे बड़ी संस्थापित क्षमता है, वितरित सौर ऊर्जा को उच्च स्तरों में ग्रिड में लाने के लिए ग्रिड को उन्नत करने की आवश्यकताओं और लागतों का अध्ययन कर रहा है।

जैसा कि विश्व बैंक की रिपोर्ट में दर्शाया गया है, सही निवेशों और नीतियों से, देश अब ग्रिड की विश्वसनीयता या बिजली खरीदने की क्षमता से कोई समझौता किए बिना परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा से अपनी बिजली की जरूरतों के एक बड़े अंश को पूरा कर सकते हैं। इन निवेशों में ऊर्जा भंडारण, बेहतर पूर्वानुमान प्रणालियाँ, और स्मार्ट ग्रिड शामिल हैं - इन सभी को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिली सफलताओं और गिरती कीमतों से लाभ हुआ है।

शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊर्जा के बाज़ार नए खिलाड़ियों के लिए खोल दिए जाने चाहिए। गरीब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए, इसका अर्थ मिनी ग्रिड विकसित करने के लिए उद्यमियों और छोटे बिजली उत्पादकों के लिए एक लाभकारी माहौल तैयार करना होगा - जिनके लिए बिजली आम तौर पर सौर, छोटी पनबिजली, या सौर-डीज़ल के मिले-जुले रूप में प्राप्त होती है - जो उन समुदायों के लिए बिजली ला सकते हैं जिन्हें अन्यथा ग्रिड कनेक्शनों के लिए सालों साल इंतजार करनी पड़ेगी। तंजानिया में, छोटे बिजली उत्पादक अब लाइसेंस की लंबी प्रक्रिया से गुज़रे बिना ग्राहकों को बिजली बेचने के लिए सक्षम हैं। भारत में, दूरदराज़ के सेलुलर टावर अब नए मिनी ग्रिडों के लिए "एंकर" ग्राहकों के रूप में सेवा प्रदान कर रहे हैं, जिन्हें अन्यथा डीज़ल जेनरेटरों से बिजली की आपूर्ति करनी पड़ेगी ।

राष्ट्रीय बिजली कंपनियों को अब चुस्त हो जाना चाहिए और उन्हें स्वतंत्र और अलग-अलग बिजली उत्पादकों के साथ काम करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए - और स्मार्ट ग्रिडों को सक्षम करना चाहिए जिनसे मांग और आपूर्ति की व्यवस्था बेहतर रूप से की जा सकती है। यह जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे उच्च आय वाले देशों के लिए भी एक चुनौती है जहाँ कुछ कंपनियाँ अपने व्यवसाय को समाप्त होता देख रही हैं क्योंकि उपभोक्ता वापस ग्रिड में बिजली बेच रहे हैं। यहाँ, ऐसे विकासशील देश जिन्होंने पारंपरिक व्यवसाय मॉडलों में कम निवेश किया हुआ है और बिजली की आपूर्तियों के लिए तत्काल आवश्यकता अनुभव कर रहे हैं, उन्नत देशों से भी आगे छलाँग लगाने में समर्थ हो सकते हैं जैसा कि उन्होंने मोबाइल फोन के मामले में किया है।

"नवीकरणीय ऊर्जा" और "टिकाऊ ऊर्जा" जैसे शब्दों का प्रयोग अक्सर अदल-बदल कर किया जाता है। लेकिन शायद इसकी व्यापक परिभाषा करने की जरूरत है। सही मायने में स्थायी ऊर्जा न केवल स्वच्छ होती है बल्कि प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जनों पर इसका प्रभाव बहुत कम होता है। यह सरकारों और नागरिकों दोनों के लिए ही समान रूप से किफायती होती है; यह विश्वसनीय होती है क्योंकि यह ऐसे स्रोतों से प्राप्त की जाती है जिन पर हम आने वाले कई दशकों तक निर्भर कर सकते हैं; और यह समाज के सभी सदस्यों के लिए सेवाओं और लाभों को प्रदान करके साझा समृद्धि के लिए योगदान करती है।

तेल की कम कीमतों, नवाचार, और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं से मिलनेवाले लाभों की बदौलत, अब हम उस कल्पना को हकीकत में बदल सकते हैं।