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संरक्षणवाद के युग में व्यापार

कोलंबो - जब चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है और विकसित देशों में विकास कुंद हो रहा है, ऐसे समय में एशिया भर की सरकारें अपनी अर्थव्यवस्थाओं को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए काम कर रही हैं। श्रीलंका में, जहाँ मैं प्रधानमंत्री हूँ, वहाँ पहले से ही हमारे स्थिर आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए कोई रास्ता खोजना एक चुनौती है।

एक बात साफ है: हम शेष दुनिया से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह हमारी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं का उस तरह से स्वागत करे जिस तरह से उसने एक बार चीन के आर्थिक शक्ति के रूप में तेजी से विकास करने पर मुक्त रूप से स्वागत किया था या - पिछले दशकों में - जापान और दक्षिण कोरिया सहित तथाकथित एशियाई टाइगर्स के विकास पर खुशी प्रकट की थी।

आज, हम एशियाई लोग, लगभग हर रोज़, उन साधनों और नीतियों पर भयंकर राजनीतिक हमले होते देख रहे हैं जिनसे हमारे लाखों नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिली है। वास्तव में, इस वर्ष दुनिया के विभिन्न लोकलुभावनवादी और लोकनेताओं के बीच दोषारोपण के लिए मुक्त व्यापार बलि का बकरा बनता जा रहा है।

उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक प्राइमरी में दोनों ही के प्रमुख उम्मीदवारों ने विश्व व्यापार में और अधिक खुलेपन की मांग के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। यूनाइटेड किंगडम में, यूरोपीय संघ को छोड़ने के लिए प्रचार करनेवाले यूरोविरोधी एकल यूरोपीय बाजार के लाभों की आलोचना कर रहे हैं। यूरोप में अन्यत्र, लोकलुभावनवादी यह मांग कर रहे हैं कि व्यापार के अवरोधों को बढ़ाया जाए।