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जापान की दूसरी पारी

टोक्यो – अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मेरे देश के इतिहास में एक ऐसे अनूठे समय पर टोक्यो का दौरा कर रहे हैं जब जापान की अर्थव्यवस्था ऐसे सुदृढ़ विकास के मार्ग पर चल रही है जिसमें इसकी भौगोलिक स्थिति का पूरा लाभ उठाया जाएगा। जापान अब अपने आपको “सुदूर” पूर्व नहीं मानता है; बल्कि हम प्रशांत परिधि के बिल्कुल केंद्र में हैं, और दक्षिणपूर्व एशिया से लेकर भारत तक फैले विश्व के विकास केंद्र के पड़ोस में हैं।

इस बारे में लेशमात्र भी संदेह नहीं है कि यह विकास केंद्र निकट भविष्य में जापान की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना जारी रखेगा।  उदाहरण के लिए, वियतनाम और भारत में जापान के प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि हो रही है जिससे जापानी मशीन-उपकरणों और पूंजीगत वस्तुओं की मांग को बढ़ावा मिलेगा।

लेकिन अपने अवसरों को अधिकतम करने के लिए जापान को अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक मुक्त करना चाहिए और एक ऐसा देश बनना चाहिए जो विदेशों से पूंजी, मानव संसाधन, और ज्ञान को सक्रिय रूप से समाविष्ट करनेवाला हो। जापान को एक ऐसा देश होना चाहिए जो विकसित हो रहे एशिया की प्राणशक्ति को दिशा देकर विकास करने में समर्थ हो।

इस उद्देश्य से, हमने विश्व भर के विभिन्न भागीदारों के साथ आर्थिक भागीदारी अनुबंधों, या ईपीए, के संबंध में बातचीत की गति को बहुत अधिक तेज़ किया है। इससे पहले इस महीने, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट और मैं जापान-ऑस्ट्रेलिया ईपीए पर सिद्धांत रूप से सहमत हुए। इसके बाद बारी आती है प्रशांत-पार भागीदारी (टीपीपी) की, जो विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक क्षेत्र के 12 देशों को संगठित करेगी।