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पिकेटी का नदारद तकनीकी ज्ञान

कैम्ब्रिज – सैद्धांतिक ढाँचे बहुत शानदार होते हैं क्योंकि उनकी मदद से हम जटिल दुनिया के बुनियादी पहलुओं को बहुत आसानी से समझ पाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे नक़्शों के मामले में होता है। लेकिन, नक़्शों की तरह ही, वे केवल एक सीमा तक ही उपयोगी होते हैं। उदाहरण के लिए, सड़क के नक़्शे आपको यातायात की मौजूदा स्थिति नहीं बताते या राजमार्ग पर मरम्मत के बारे में अद्यतन जानकारी नहीं देते।

विश्व की अर्थव्यवस्था को समझने का एक उपयोगी तरीका वह सुरुचिपूर्ण ढाँचा है जो थॉमस पिकेटी ने अपनी प्रख्यात पुस्तक कैपिटल इन द ट्वेंटी-फ़र्स्ट सेंचुरी में पेश किया है। पिकेटी ने दुनिया को दो मूलभूत तत्वों में विभाजित किया है – पूँजी और श्रम। दोनों का उत्पादन में इस्तेमाल होता है और वे आय साझा करते हैं।

दोनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि पूँजी ऐसी चीज़़ है जिसे आप ख़रीद सकते हैं, स्वामित्व में ले सकते हैं, बेच सकते हैं, और, सिद्धांत रूप में, असीम रूप से संचित कर सकते हैं, जैसा कि अति-समृद्ध लोगों ने किया है। श्रम में व्यक्तिगत क्षमता का उपयोग होता है जिसका मानदेय दिया जा सकता है, पर उसे दूसरे लोग स्वामित्व में नहीं ले सकते, क्योंकि ग़ुलामी समाप्त हो चुकी है।

पूँजी की दो रोचक विशेषताएँ है। पहली, इसकी कीमत इसके द्वारा निर्धारित होती है कि यह भविष्य में कितनी आय लेकर आएगी। अगर भूमि का एक टुकड़ा गेहूँ के ढेर या वाणिज्यिक किराये के रूप में दुगुनी आउटपुट देता है, तो यह स्वाभाविक रूप से दुगुने के योग्य होना चाहिए। अन्यथा, एक ढेर का स्वामी दूसरा ढेर ख़रीदने के लिए इसे बेच देगा। इस कोई-अंतरपणन-नहीं की स्थिति क�� तात्पर्य यह है कि, संतुलन के रूप में, सभी पूँजी समान जोखिम-समायोजित प्रतिलाभ देती हैं, जिसके बारे में पिकेटी का ऐतिहासिक रूप में अनुमान हर साल 4-5% का है।