Eduardo Luigi Paolozzi_Newton_Istvan_Flickr Paolozzi/Newton/Istvan/Flickr

पिकेटी का नदारद तकनीकी ज्ञान

कैम्ब्रिज – सैद्धांतिक ढाँचे बहुत शानदार होते हैं क्योंकि उनकी मदद से हम जटिल दुनिया के बुनियादी पहलुओं को बहुत आसानी से समझ पाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे नक़्शों के मामले में होता है। लेकिन, नक़्शों की तरह ही, वे केवल एक सीमा तक ही उपयोगी होते हैं। उदाहरण के लिए, सड़क के नक़्शे आपको यातायात की मौजूदा स्थिति नहीं बताते या राजमार्ग पर मरम्मत के बारे में अद्यतन जानकारी नहीं देते।

विश्व की अर्थव्यवस्था को समझने का एक उपयोगी तरीका वह सुरुचिपूर्ण ढाँचा है जो थॉमस पिकेटी ने अपनी प्रख्यात पुस्तक कैपिटल इन द ट्वेंटी-फ़र्स्ट सेंचुरी में पेश किया है। पिकेटी ने दुनिया को दो मूलभूत तत्वों में विभाजित किया है – पूँजी और श्रम। दोनों का उत्पादन में इस्तेमाल होता है और वे आय साझा करते हैं।

दोनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि पूँजी ऐसी चीज़़ है जिसे आप ख़रीद सकते हैं, स्वामित्व में ले सकते हैं, बेच सकते हैं, और, सिद्धांत रूप में, असीम रूप से संचित कर सकते हैं, जैसा कि अति-समृद्ध लोगों ने किया है। श्रम में व्यक्तिगत क्षमता का उपयोग होता है जिसका मानदेय दिया जा सकता है, पर उसे दूसरे लोग स्वामित्व में नहीं ले सकते, क्योंकि ग़ुलामी समाप्त हो चुकी है।

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