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विकास वित्त में नए पड़ाव

वाशिंगटन, डीसी - इस साल के अंत में जब सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) की अवधि समाप्त हो जाएगी, तो दुनिया ने ग़रीबी को कम करने, सुरक्षित पेय जल और स्वच्छता उपलब्ध करने, और अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्यों में महत्वपूर्ण प्रगति कर ली होगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की नींव पर तैयार किए जानेवाले अगले विकास कार्यक्रम से और भी ज़्यादा प्रगति की जाती है, दुनिया के नेताओं को सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) के ढाँचे को - ख़ास तौर से वित्तपोषण के संदर्भ में - परिष्कृत और इष्टतम करना होगा।

प्रमुख कार्यक्रमों और नीतियों के कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) ने सरकारों, बहुपक्षीय संगठनों, और गैर-सरकारी संगठनों को अपने साथ लिया है, जिसमें वैश्विक भागीदारियाँ संसाधनों का समर्थन करती हैं। कुशलता को अधिकतम करने के लिए, सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) का यूनिट के बजाय, अलग-अलग रूप से अनुसरण और वित्त-पोषण किया गया, जिसमें लक्ष्यों के पूरा न होने की स्थिति में नई पहल लागू की गईं। लेकिन इस दृष्टिकोण ने कुछ असंतुलन पैदा किए हैं, जिसमें दूसरे प्रयासों की तुलना में वैश्विक स्वास्थ्य और शिक्षा की पहल के लिए कहीं ज़्यादा वित्तपोषण हुआ।

इस क्षेत्रीय मॉडल का विकास का अगला कार्यक्रम शुरू किए जाने से पहले पुनः मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि सुनिश्चित हो सके कि इस तरह के असंतुलन न रहें। ऐसा करना ख़ास तौर से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रस्तावित स्थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में टिकाऊ विकास के सामाजिक, आर्थिक, और पर्यावरण संबंधी आयामों को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे और ज़्यादा व्यापक और सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) की तुलना में ज़्यादा अन्योन्याश्रित ��ो जाते हैं।

एकीकृत दृष्टिकोण का विकास करने के लिए दुनिया के नेताओं के पास तीन महत्वपूर्ण अवसर होंगे। जुलाई में, संयुक्त राष्ट्र अदीस अबाबा, इथियोपिया में विकास के लिए वित्त-पोषण पर सम्मेलन आयोजित करेगा। सितंबर में, संयुक्त राष्ट्र महासभा स्थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्रारंभ करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी। और दिसंबर में, दुनिया भर के नेता जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ़्रेमवर्क समझौते के पक्षों के 21वें सम्मेलन (सीओपी 21) में भाग लेंगे, जहाँ उनके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों की दीर्घावधि कमी पर बाध्यकारी वैश्विक समझौते को स्वीकार करने की आशा है।