स्वास्थ्य सेवा की नई दुनिया

न्यूयॉर्क - पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियां संकट में हैं. ओईसीडी में मंहगे अस्पताल व क्लिनिकों का स्वास्थ्य सेवाओं में दबदबा है. इन पर अमेरिका में कुल स्वास्थ्य सेवा व्यय का 97% खर्च होता है. इसके चलते पारंपरिक प्रणालियां लागत संबंधी तंगियों, उच्च गुणवत्ता के लिए जनता की मांग और अत्याधिक प्रत्याशाओं के कारण संघर्ष कर रही हैं.

लेकिन एक बिलकुल अलग प्रणाली है जो गरीब देशों में प्रचलित हैं जो पश्चिमी शैली के अस्पतालों के महंगे खर्च को वहन नहीं कर सकते हैं. यह समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा है. हमें दोनों तरह की पहुंच की जरूरत हैं, और जरूरत है कि दोनों मिलकर काम करें. अवश्य ही, स्वास्थ्य सेवा के वायदे और वास्तविकता के बीच बढ़ते अंतर ने विकसित व विकासशील देशों में समान रूप से यह गुंजाइश पैदा की है कि नए खिलाड़ी इस क्षेत्र में उतरें जिनका मात्र जीव विज्ञान से ज्यादा सामाजिक व्यवहार से सरोकार हो.

1996 में हार्वर्ड बिजिनेस रिव्यू में अपने सशक्त व प्रभावशाली लेख में डब्ल्यू. ब्रायन आर्थर ने योजना, वर्ग तथा नियंत्रण द्वारा परिभाषित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली तथा प्रेक्षण, अवस्थिति और वर्ग रहित संगठन द्वारा परिलाक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बीच मौजूद महत्त्वपूर्ण भेदों की पहचान की थी. उनके अनुसार, पहली किस्म की प्रणाली का सामग्रियों (पदार्थों), प्रक्रियाओं तथा अनुकूलीकरण से ज्यादा सरोकार है. यह मुख्यतः स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच पर केद्रित है और आमतौर पर इससे घटते हुए लाभ मिलते हैं.

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