amazon deforestation Werner Rudhart/ZumaPress

वनों का फ्रांसिस

वाशिंगटन, डीसी – पोप फ्रांसिस ने जब जुलाई में लैटिन अमेरिका का दौरा किया, तो उन्होंने अमेज़न वर्षा वन और वहां रहनेवाले लोगों की सुरक्षा के लिए एक जोशपूर्ण दलील दी। उन्होंने बोलीविया में लोकप्रिय आंदोलनों पर वैश्विक बैठक में शामिल कार्यकर्ताओं से कहा कि “हमारी साझा आवास लूटा जा रहा है, उसमें गंदगी फैलाई जा रही है और बेखौफ़ होकर इसे क्षति पहुंचाई जा रही है। इसकी रक्षा करने में कायरता एक गंभीर पाप है।”

फ्रांसिस द्वारा कार्रवाई के लिए किए गए आह्वान पर ध्यान देना केवल नैतिक मुद्दा ही नहीं है; बल्कि यह एक व्यावहारिक मुद्दा भी है। इस वर्ष के अंत में जब दुनिया के नेता ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों पर प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मिलेंगे, तो उन्हें उष्णकटिबंधीय वनों और वनों को अपना घर बनाने वाले लोगों की रक्षा करने के लिए नीतियां निर्धारित करनी चाहिए।

फ्रांसिस शायद अमेज़न का दौरा करने वाले पहले मिशनरी नहीं हैं। सेंट फ्रांसिस, जेसुइट, और डोमिनिकन पादरी सदियों से इस क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार करते आ रहे हैं। फ्रांसिस की अपील इस दृष्टि से अलग है कि उनके कथन स्थानीय आबादी पर इतने अधिक लक्षित नहीं थे, जितने कि वे उत्तरी अमेरिका और यूरोप के निवासियों पर लक्षित थे जिनमें लकड़ी, जैव ईंधनों, और कृषि उत्पादों के लिए मांग के फलस्वरूप वर्षावनों का विनाश होता है और स्वदेशी आबादियों के जीवन संकट में पड़ जाते हैं।

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