Polio vaccination UN Photo/Flickr

पोलियो का अंतिम मामला

जेनेवा – नाइजीरिया के यह एक कठिन वर्ष रहा है। पिछले 12 महीनों में, इस देश को बाल आत्मघाती हमलावरों के हमलों और बोको हराम के बर्बर नरसंहारों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल चिबोक में अपहरण की गई 276 स्कूली छात्राओं में से बहुत अधिक छात्राएँ अभी भी लापता हैं। और फिर भी, ऐसे समय के दौरान, इस तरह की भयावह स्थितियों के बावजूद, नाइजीरिया चुपचाप सचमुच उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने में कामयाब रहा है: वहाँ पूरे वर्ष में वाइल्ड पोलियो का एक भी नया मामला नहीं हुआ है।

यह नाइजीरिया और इस रोग के उन्मूलन के प्रयास में लगे उसके सभी सहयोगियों के लिए एक महान उपलब्धि है। 30 साल से कम समय पहले तक, 125 देश पोलियो से ग्रस्त थे, जिससे हर दिन 1,000 बच्चे लकवाग्रस्त हो जाते थे। अब तक, केवल तीन देश ही ऐसे थे जहाँ वायरस को अभी भी स्थानिक माना जाता है: अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और नाइजीरिया। स्वास्थ्य अधिकारी किसी देश को पोलियो-मुक्त घोषित करने से पहले तीन साल इंतजार करते हैं, लेकिन नाइजीरिया में एक साल की उपलब्धि से इस बात की उम्मीद बलवती हो गई है कि शायद हमने पहले ही इस देश में - और पूरे अफ्रीका में - वाइल्ड पोलियो का अंतिम मामला देख लिया है।

अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देश में हर बच्चे तक पहुँचने की प्रचालनात्मक चुनौती के अलावा, नाइजीरिया के पोलियो उन्मूलन अभियान को सुरक्षा के मुद्दों, धार्मिक कट्टरपंथियों के विरोध, और व्यापक भ्रष्टाचार पर काबू पाना पडा है। नाइजीरिया जैसा अत्यधिक अशांत देश इस तरह की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है, यह तथ्य जश्न मनाने का कारण है और यह न केवल पोलियो के खिलाफ लड़ाई में बल्कि सामान्य रूप में वैश्विक स्वास्थ्य के प्रयासों के लिए आशावादिता के लिए आधार प्रदान करता है। नाइजीरिया की सफलता से यह पता चलता है कि दुनिया के सबसे अधिक वंचित और पहुँच से बाहर वाले बच्चों तक आधुनिक चिकित्सा के चमत्कारों को पहुँचा पाना संभव है।

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