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ISIS के ख़िलाफ़ बौद्धिक लड़ाई

दुबई - वैश्विक वित्तीय संकट ने दुनिया को सिखाया है कि हमारी अर्थव्यवस्थाएँ कितनी गहराई से अन्योन्याश्रित बन गई हैं। उग्रवाद के आज के संकट में, हमें इस बात को समझना चाहिए कि हम अपनी सुरक्षा के लिए उतने ही अन्योन्याश्रित हैं, जितना ISIS को हराने के लिए वर्तमान संघर्ष में स्पष्ट है।

अगर हमें ISIS को यह पाठ हमें कठोर तरीके से सिखाने से रोकना है, तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि हम कट्टरता की आग को केवल बल के द्वारा नहीं बुझा सकते। दुनिया को ऐसी विचारधारा की साख को ख़त्म करने के लिए एकजुट होकर समग्र संचालन करना होगा जो चरमपंथियों को उनकी शक्ति देती है, और उन लोगों के लिए आशा और गरिमा बहाल करनी होगी जिन्हें वे भरती करेंगे।

ISIS निश्चित रूप से अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन द्वारा सेना से पराजित की जा सकती है - और की जाएगी - जो अब इकट्ठा हो रहा है और जिसका संयुक्त अरब अमीरात सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। लेकिन सेना द्वारा काबू किया जाना केवल आंशिक समाधान है। स्थायी शांति के लिए तीन अन्य घटकों की ज़रूरत है: विचारों की लड़ाई जीतना; कमज़ोर शासन का उन्नयन करना; और ज़मीनी स्तर पर मानव विकास का समर्थन करना।

इस तरह का समाधान ठोस अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ शुरू होना चाहिए। उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ़्रीका, या एशिया में एक भी राजनेता मध्य पूर्व में घटनाओं की अनदेखी नहीं कर सकता। वैश्विक ख़तरे के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया की ज़रूरत है। हर किसी को ���ँच महसूस होगी, क्योंकि ऐसी लपटें किसी सीमा को नहीं जानतीं; दरअसल, ISIS ने कम-से-कम 80 राष्ट्रिकताओं के सदस्यों को भरती किया है।