Farmer weed crop International Institute of Tropical Agriculture/Flickr

सुरक्षित पदार्थ कैसे ख़तरनाक बन जाते हैं

पैलो आल्टो – सोलहवीं सदी में आविष विज्ञान के विकास के बाद से, इसका मार्गदर्शी सिद्धांत यह रहा है कि "खुराक विष बना देती है।" यह एक ऐसा नियम है जो दुनिया भर में रोगियों द्वारा एक दिन में अरबों बार इस्तेमाल की जानेवाली दवाओं पर लागू होता है। एस्पिरिन की सही खुराक एक चिकित्सकीय वरदान हो सकती है, लेकिन इसकी बहुत ज्यादा मात्रा लेने पर यह घातक हो सकती है। यह सिद्धांत खाद्य पदार्थों पर भी लागू होता है: भारी मात्रा में जायफल या मुलहठी का सेवन गंभीर रूप से विषकारक होता है।

किसी पदार्थ से कितना जोखिम हो सकता है यह मोटे तौर पर दो कारकों पर निर्भर करता है: नुकसान पहुँचाने की इसकी निहित क्षमता और किसी व्यक्ति द्वारा उसके उपयोग की आदत। यह एक सामान्य सी बात है, लेकिन फिर भी कुछ अड़ियल पेशेवरों को यह बात समझ में नहीं आती है - जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक घटक, कैंसर पर अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी (आईएआरसी) द्वारा आमतौर पर इस्तेमाल किए जानेवाले वनस्पति नाशक 2,4-डी को "मनुष्य के लिए संभवतः कैंसरकारी" के रूप में वर्गीकृत करने के लिए किए गए निर्णय से पता चलता है।

जब वनस्पति नाशकों की बात उठती है, तो आईएआरसी हमेशा पिछड़ जाता है। इस संगठन ने हाल ही में एक और लोकप्रिय वनस्पति नाशक ग्लाइफोसेट को "संभवतः" कैंसरकारी के रूप में वर्गीकृत किया है, यह एक ऐसा निष्कर्ष है जो दुनिया भर की नियामक एजेंसियों के निष्कर्षों से उलट है।

To continue reading, please log in or enter your email address.

Registration is quick and easy and requires only your email address. If you already have an account with us, please log in. Or subscribe now for unlimited access.

required

Log in

http://prosyn.org/yuNJOY5/hi;