construction site Harm Rhebergen/Flickr

सुशासन का जाल

रोम – विकास और बेहतर शासन, इन दोनों में कंधे से कंधा मिलाकर चलने की प्रवृत्ति पाई जाती है। लेकिन आम धारणा के विपरीत, इसकी सत्यता कहीं दिखाई नहीं देती कि शासन संबंधी सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करने के कारण आर्थिक और सामाजिक विकास अधिक तीव्र और समावेशी होता है। वास्तव में, स्थिति इससे बिलकुल उलट हो सकती है।

सुशासन पर ध्यान दिया जाना उस समय शुरू हुआ, जब 1980 के दशक में विकासशील देश ऋणग्रस्तता के संकट से उबरकर स्थायी विकास की जद्दोजहद में लगे हुए थे।  अंतर्राष्ट्रीय विकास संस्थाओं ने मौजूदा आर्थिक-नीति के दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन करने के बजाय, आसान लक्ष्यों अर्थात विकासशील देशों की सरकारों को लक्ष्य बनाया।  उन सरकारों को यह परामर्श देना कि उन्हें अपने कार्य कैसे करने चाहिए, इन संस्थाओं का नया धंधा बन गया, और उन सरकारों ने शीघ्र ही शासन सुधार के नए “तकनीकी” तरीके विकसित करने शुरू कर दिए।

विश्व बैंक ने 100 से भी अधिक सूचकांकों का उपयोग करते हुए सुशासन का एक समग्र सूचकांक शुरू किया, जो अभिव्यक्ति और जवाबदेही, राजनीतिक स्थिरता और हिंसा हीनता के बोध, सरकार की प्रभावशीलता, नियामक संस्थाओं की गुणवत्ता, क़ानून और भ्रष्टाचार के स्तरों पर आधारित था।  विश्व बैंक ने यह दावा करते हुए कि उसने अपने शासन सूचकांकों और आर्थिक निष्पादन के बीच गहरा सहसंबंध ढूँढ़ लिया है, इस आशा को जागृत किया कि उसके हाथ आर्थिक प्रगति की कुंजी लग गई है।

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