Clean energy in rural India BFID/Flickr

वैश्विक वित्त और ग्लोबल वार्मिंग

नई दिल्ली/लंदन 2008 में जब वैश्विक वित्तीय संकट ने विश्व की अर्थव्यवस्था को लगभग तबाह कर दिया था, उसके बाद से वित्तीय सुधार नीति निर्माताओं के एजेंडा की शीर्षस्थ मदों में रहा है। लेकिन, नेताओं द्वारा अतीत की समस्याओं को सुलझाने से लेकर, भविष्य के लिए वित्तीय प्रणाली को तैयार करने के लिए उन्हें इसकी स्थिरता, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न नई चुनौतियों से भी निपटना होगा।

यही कारण है कि बहुत अधिक संख्या में सरकारों, नियामकों, मानक-निर्धारकों, और बाजार संचालनकर्ताओं ने वित्तीय प्रणाली में स्थिरता से संबंधित नियमों को शामिल करना शुरू कर दिया है। ब्राज़ील में, केंद्रीय बैंक जोखिम प्रबंधन में पर्यावरण और सामाजिक कारकों को समेकित करने को लचीलेपन को मजबूत करने के एक उपाय के रूप में देखता है। और सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में, शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अपने पर्यावरणीय और सामाजिक निष्पादन को प्रकट करना अनिवार्य है, यह एक ऐसी आवश्यकता है जिसे निवेशक और नियामक वित्तीय बाजारों के कुशल संचालन के लिए आवश्यक मानते हैं।

इस तरह की पहल को पहले कभी एक परिधीय "हरित" स्थान के हिस्से के रूप में माना जाता होगा। आज, इन्हें वित्तीय प्रणाली के संचालन के लिए मूल माना जाता है। बांग्लादेश में आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए केंद्रीय बैंक के प्रयासों में नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, या अपशिष्ट प्रबंधन के लक्ष्यों का अनुपालन करने वाली परियोजनाओं के लिए ऋण देने वाले बैंकों के लिए कम लागत वाला पुनर्वित्त प्रदान करना शामिल है। यूनाइटेड किंगडम में, बैंक ऑफ इंग्लैंड वर्तमान में वित्तीय संस्थाओं की सुरक्षा और सुदृढ़ता की निगरानी करने के लिए अपने मूल निदेश के हिस्से के रूप में बीमा क्षेत्र के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मूल्यांकन करता है।

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