EEAS/Flickr

यूरोप की यूक्रेनी जीवनरेखा

न्यूयार्क. पिछले सप्ताहांत में सम्पन्न हुए यूरोपीय संसद एवं यूक्रेन के राष्ट्रपति चुनावों में बेहद विरोधाभासी नतीजे मिले हैं. यूरोप के मतदाताओं ने जहां यूरोपीय संघ के कामकाज के तौरतरीकों पर अपना असंतोष जाहिर किया है वहीं यूक्रेन की जनता ने यूरोपीय संघ से जुड़े रहने की अपनी इच्छा पर मोहर लगाई है. यूरोप के नेताओं को और नागरिकों को इस अवसर का उपयोग यह जानने के लिए करना चाहिए कि इसके क्या निहितार्थ है और यह भी कि यूक्रेन की मदद कर कैसे वे खुद यूरोप की मदद कर सकते हैं.

यूरोपीय संघ की स्थापना के पीछे मूलरूप से यह विचार था कि संप्रभु राष्ट्रों के एकजुट होने से वे आपसी हितों को बेहतर ढंग से साध सकेंगे. अंतर्राष्ट्रीय प्रशासन तथा कानून के शासन में यह एक निडर प्रयोग था जिसका उद्देश्य था राष्ट्रीयतावाद का प्रतिस्थापन और बल का समुचित उपयोग.

दुर्भाग्यवश यूरो संकट से यूरोपीय संघ बिलकुल ही अलग निकाय में बदल गया. आपसी सहयोग की भावना की जगह कर्जदाता और कर्जदार का संबंध पनपने लगा जिसमें कर्जदाता देश अपनी शर्तें थोपने लगे और अपना दबदबा कायम करने लगे. यूरोपीय संसद के चुनाव में कम मतदान के मद्देनजर अगर इटली के प्रधानमंत्री मैट्टियो रेन्जी को मिले समर्थन के साथ यूरोपीय संघ के विरोधी दक्षिण व वामपंथी मतों को भी मिला दिया जाए तो कहा जा सकता है कि अधिकांश नागरिक वर्तमान परिस्थितियों के विरोध में हैं.

To continue reading, please log in or enter your email address.

Registration is quick and easy and requires only your email address. If you already have an account with us, please log in. Or subscribe now for unlimited access.

required

Log in

http://prosyn.org/Brem2FV/hi;