अच्छी फसल, बुरी फसल

नैरोबी – आनुवांशिक रूप से परिवर्तित (जीएम) फसलों के आयात पर केन्या की पाबंदी एक ऐसे देश में परेशान करने वाली प्रवृत्ति को दर्शाती है जिसे कृषि क्षेत्र में नवाचारी की तरह देखा जाता है. यह कदम एक महाद्वीप के लिए उलटी दिशा में एक बड़ी छलांग है जिसे अपने यहां खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अकसर जूझना पड़ता है. कायदे से पूर्वाग्रह, भय और अटकलबाजी की जगह तर्कसंगत वैज्ञानिक सोच को अपनाना चाहिए. और इसमें केन्या अन्य देशों का नेतृत्व कर सकता है.

जीएम फसलें (जिन्हें आनुवांशिक रूप से इंजिनीयर्ड या बायोटेक्नोलॉजी फसलें भी कहा जाता है) बार-बार सुरक्षित साबित हुई हैं और सारी दुनिया में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में उनका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाता है. पर नौकरशाही, दुष्प्रचार और गुमराह करने वाली सूचना लाखों अफ्रीकी किसानों को, जिनमें केन्या के किसान भी शामिल हैं, उस तकनीकी तक पहुंच बनाने से रोकती है जो उनके जीवन स्तर को सुधार सकती है और भोजन की कमी को दूर करने में मददगार है.

देश में अनाज की कमी के कारण दस लाख से ज्यादा केन्या वासियों को आज खाद्य सहायता पर निर्भर होना पड़ता है. देश में अकाल की अग्रिम चेतावनी देने वाली प्रणालियों के नेटवर्क ने भविष्यवाणी की है कि इस साल के अंत तक मक्का के पहले से ऊंचे दाम और बढ़ते रह सकते हैं. इससे खाद्य सुरक्षा और आर्थिक निष्पादन पर और जोर पड़ेगा. जहां केन्या अपने लोगों को भोजन उपलब्ध कराने और अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए जूझ रहा है, वहां जीएम तकनीकी का स्वागत किया जाना चाहिए. यह ऐसा साधन है जो कृषि उपज और आमदनी बढ़ा सकता है और किसानों, उपभोक्ताओं तथा पर्यावरण को लाभ पहुंचा सकता है.

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