ईबोला से आगे की कार्रवाई

वाशिंगटन, डीसी – ईबोला का प्रकोप पिछले साल मनो नदी संघ के चार देशों में से तीन, अर्थात गिनी, सिएरा लियोन, और लाइबेरिया में शुरू हुआ था, इस रोग का 1976 में मध्य अफ्रीका में निदान किए जाने के बाद से यह अब तक का सबसे गंभीर रोग है। इस महामारी का प्रभाव विनाशकारी रहा है जिसने दशकों के संघर्ष और अस्थिरता के बाद हमारे इन तीन देशों की महत्वपूर्ण सामाजिक आर्थिक प्रगति पर सवाल खड़ा कर दिया है।

इस क्षेत्र में अब तक इसके कुल 25,791 मामले पाए गए हैं और इससे 10,689 मौतें हुई हैं –ईबोला की अन्य सभी महामारियों से कुल मिलाकर हुई मौतों के मुकाबले इससे होनेवाली मौतों की संख्या लगभग दस गुना है। 2014 के लिए, हमारे इन तीनों देशों के लिए अनुमानित विकास दरें 4.5%-11.3% थीं। इन अनुमानों को अब कम करके अधिक से अधिक 2.2% तक रखा गया है। शमन उपायों के अभाव में, मंदी की स्थिति की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस रोग के अनियंत्रित प्रसार ने हमारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की कमियों, और साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक संस्थाओं की समन्वयन और प्रभावी प्रतिक्रिया की कमजोर क्षमता को उजागर कर दिया है। सीधे शब्दों में कहें, तो इतने बड़े स्तर की महामारी से निपटने के लिए, और यहाँ तक कि इसे रोकने के लिए हम ठीक तरह से तैयार नहीं थे।

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