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लोगों के लिए विकास

न्यूयार्क – पश्चिम अफ्रीका में इबोला महामारी ज़िंदगियों को तबाह कर रही है, समुदायों को नष्ट कर रही है, और बच्चों को अनाथ बना रही है, और इसकी दर इस क्षेत्र में एक दशक से अधिक पहले समाप्त हुए क्रूर नागरिक युद्धों की तुलना में कहीं अधिक है। लाइबेरिया में, अब 60% बाजार बंद हो चुके हैं; सिएरा लियोन में, 10,000 एचआईवी मरीजों में से केवल पाँच में से एक का अभी भी एंटी-रेट्रोवायरल उपचार चल रहा है; और गिनी की सरकार ने बताया है कि इस संकट की वजह से उन्हें $220 मिलियन के वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ रहा है। अगर इसके प्रकोप को शीघ्र रोका नहीं जाता है, तो लाइबेरिया और सिएरा लियोन में शांति बहाल होने के बाद, और गिनी का लोकतांत्रिक संक्रमणकाल शुरू होने के बाद जो बहुत-से आर्थिक और सामाजिक लाभ हासिल किए गए थे, वे मिलने बंद हो सकते हैं।

ये तीनों देश कमजोर, विभाजित बने हुए हैं, और जैसा कि वर्तमान संकट से उजागर हुआ है, इन्हें खास तौर से नुकसान पहुँचने की संभावना हो सकती है। अधिक व्यापक तौर पर, इस क्षेत्र के मौजूदा संकट से यह सोचने की प्रेरणा मिलनी चाहिए कि दुनिया किस तरह विकास का समर्थन करती है और उसे आगे बढ़ाती है।

इन देशों के कमजोर होने का एक महत्वपूर्ण कारण उनकी आबादियों में निवेश का लगातार न होना है, जिसके फलस्वरूप आम नागरिक आर्थिक विकास के लाभों का फायदा नहीं उठा पाए हैं। दरअसल, हालाँकि गिनी, लाइबेरिया, और सिएरा लियोन की अर्थव्यवस्थाओं का इबोला के फैलने से दस साल पहले - क्रमशः 2.8%, 10%, और 8% की औसत वार्षिक दरों पर - तेजी से विकास हुआ था - परंतु उनकी आबादियों को अपने दैनिक जीवन में कोई सुधार दिखाई नहीं दिया। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का 65% से अधिक अंश खनन और वन-कटाई में लगाया गया है जो कम रोजगार पैदा करने और धन को चंद लोगों के हाथ में केंद्रित करने के लिए बदनाम हैं।

इसी तरह, हालाँकि लाइबेरिया और सिएरा लियोन में उनके गृह युद्धों के समाप्त होने के बाद उनकी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है, गुणवत्ता और व्याप्ति पश्चिम अफ्रीकी मानकों से बहुत कम रही है। जब इबोला ने धावा बोला, तब लाइबेरिया के पास अपने चार मिलियन नागरिकों के लिए केवल 120 डॉक्टर थे। इनमें लगातार फैलती जा रही शहरी मलिन बस्तियों - जो अर्द्ध-नियंत्रित, भीड़-बहुल, और स्वच्छता रहित हैं - को भी शामिल करना चाहिए, और इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि इन देशों ने महामारी को रोकने के लिए संघर्ष किया है।