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इबोला और उसके बाद

वाशिंगटन, डीसी - संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप ने अपनी सरहदों के भीतर इबोला वायरस के कुछ छिटपुट मामलों के प्रति बहुत ही अधिक प्रतिक्रिया दिखाई है। घबराहट भरी ये प्रतिक्रियाएँ निरर्थक नहीं हैं। बुनियादी वैज्ञानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करके, वे जन-स्वास्थ्य पर अनिवार्य कार्रवाई के लिए मौलिक नैतिक मानदंडों की अवहेलना करती हैं। और जब नागरिकों की इबोला से रक्षा करने की बात हो - भले ही भविष्य में इस तरह के स्वास्थ्य के वैश्विक संकटों के उभरने को रोकने की बात न भी की जाए - तो इन प्रतिक्रियाओं के परिणाम प्रतिकूल भी हो सकते हैं।

बहुत ज़्यादा प्रतिक्रिया करने के कारण असफलता के बेहद खराब उदाहरण यूएस में सामने आए हैं, जहाँ प्रारंभिक प्रतिक्रिया गिनी, लाइबेरिया तथा सिएरा लियोन से आनेवाले यात्रियों की ज़्यादा स्क्रीनिंग करने के रूप में सामने आई। ज़्यादा समस्या की बात यह थी कि अनेक राज्यों ने इबोला से त्रस्त देशों से यूएस लौटने वाले स्वयंसेवक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए 21 दिन तक अनिवार्य रूप से सबसे अलग रहना या संगरोध निर्धारित किया। सौभाग्य से, संगरोध के आदेशों के ख़िलाफ़ राजनीतिक प्रतिक्रिया के फलस्वरूप कुछ राज्यों के राज्यपालों ने उनमें ढील दे दी।

Aleppo

A World Besieged

From Aleppo and North Korea to the European Commission and the Federal Reserve, the global order’s fracture points continue to deepen. Nina Khrushcheva, Stephen Roach, Nasser Saidi, and others assess the most important risks.

अब विकसित देशों के लिए यह समझने का समय आ गया है कि इबोला से अपने नागरिकों ��ी रक्षा करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पश्चिम अफ़्रीका में वायरस को फैलने से रोकने में मदद की जाए। इसके लिए सबसे पहली और सबसे प्रमुख बात यह है कि सबसे ज़्यादा प्रभावित तीन देशों में इबोला के प्रति निरंतर "अत्यधिक प्रतिक्रिया" हो। ऐसी प्रतिक्रिया को पर्याप्त (और महत्वपूर्ण) वित्तपोषण; सुप्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों, और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं; और निदान, उपचार, संपर्क की पहचान करने, और संक्रमित व्यक्तियों के अलगाव के लिए बेहतर स्थानीय क्षमता का सहारा मिलना चाहिए।

अब और समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। निश्चित रूप से, साहसिक नेतृत्व की कमी के कारण पहले ही वर्तमान इबोला प्रकोप के लिए प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया में बहुत ज़्यादा देरी हो चुकी है, जिससे इस संकट की लागत में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है।

इबोला के प्रसार को रोकने के अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मौजूदा संकट के सबक को भविष्य के स्वास्थ्य के संभावित ख़तरों के बारे में शीघ्र, सुदृढ़, और साक्ष्य-आधारित कार्रवाई पर बल देने वाली विश्वसनीय प्रतिक्रिया के विकास पर लागू करना चाहिए। इस लक्ष्य के लिए, तीन महत्वपूर्ण पहल शुरू की जानी चाहिए।

सर्वप्रथम, विश्व स्वास्थ्य संगठन को आपातकालीन आकस्मिकता निधि निर्धारित करनी चाहिए जिसे "अंतर्राष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति" की घोषणा करते ही उसे अतिरिक्त क्षमता के लिए नियोजित करना चाहिए। अगर इबोला के उभरने पर उसके प्रति भारी आरंभिक प्रतिक्रिया शुरू करने के लिए ऐसा वित्त-पोषण उपलब्ध होता, तो डब्ल्यूएचओ के पास समय पर अंतर्राष्ट्रीय आपात स्थिति की घोषणा करने के लिए भारी प्रोत्साहन होता।

वास्तव में, डब्ल्यूएचओ की समीक्षा समिति ने 2011 में ठीक इसी तरह की निधि के लिए कम-से-कम $100 मिलियन राशि की सिफ़ारिश की थी। हालाँकि यह आसानी से जुटाई जा सकनेवाली राशि थी और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सहायता के 0.5% से भी कम थी लेकिन डब्ल्यूएचओ इसे स्थापित करने में विफल रहा। इस फ़ैसले की गलती अब पीड़ादायक रूप से स्पष्ट हो गई है, क्योंकि सच तो यह है कि आकस्मिक निधि काफ़ी अधिक अर्थात $500 मिलियन तक होनी चाहिए।

संकट पर प्रतिक्रिया की प्रभावी रणनीति का दूसरा स्तंभ आपातकालीन आरक्षित कार्यबल है - जिसे डब्ल्यूएचओ ने राष्ट्रीय सरकारों के सहयोग से स्थापित किया था – जिसमें सुप्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवर होते हैं जो कम-संसाधन की स्थितियों में तुरंत नियोजन के लिए तैयार रहते हैं। इससे कमज़ोर स्वास्थ्य-देखभाल प्रणालियों वाले देशों को – जो रोग फैलने की दृष्टि से ख़ास तौर से अतिसंवेदनशील होते हैं - स्वास्थ्य के संकटों को जल्दी से नियंत्रण में लाने के लिए ज़रूरी मानव संसाधन उपलब्ध हो जाएँगे।

निश्चित रूप से, ऐसे उपायों से अपनी स्वास्थ्य-देखभाल प्रणालियों को मज़बूत बनाने और अपनी आबादियों की सुरक्षा करने के लिए देशों की ज़िम्मेदारी कम नहीं हो जाती। यही कारण है कि भविष्य में वैश्विक स्वास्थ्य संकट को रोकने की दिशा में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण क़दम अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली कोष का निर्माण करना है ताकि आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने और सामान्य समय में व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने, दोनों के लिए क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन किया जा सके। ऐसी निधि अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों की रूपरेखा में ठीक बैठेगी जिस पर 2005 में सहमति हुई थी, और यह सभी लोगों के पास स्वास्थ्य का अधिकार होना चाहिए के सिद्धांत पर आधारित सार्वभौमिक स्वास्थ्य-देखभाल के कार्य को आगे बढ़ाएगी।

सरकारों से भी अपेक्षा होगी कि वे इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त घरेलू निधियाँ आबंटित करें, उदाहरण के लिए, अफ़्रीक़ी देशों के राष्ट्र-प्रमुख राष्ट्रीय बजट के कम-से-कम 15% को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आबंटित करने की 2001 आबुजा घोषणा की प्रतिज्ञा को पूरा करें। लेकिन, कम आय वाले देशों के लिए, सतत अंतर्राष्ट्रीय कोष की सहायता मिले बिना मज़बूत स्वास्थ्य-देखभाल प्रणालियाँ स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करना लगभग असंभव होगा।

इस बात पर विचार करते हुए कि इस तरह की निधि का निर्माण करने के लिए कम आय वाले देशों में बड़े पैमाने पर अरबों डॉलर का निवेश करना होगा, ज़रूरी राजनीतिक समर्थन पैदा करने के लिए इसमें सामाजिक जुड़ाव महत्वपूर्ण है। इस अर्थ में, एड्स के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया - जो अमेरिकी राष्ट्रपति की एड्स राहत के लिए आपातकालीन योजना द्वारा प्रेरित हुई थी और एड्स, क्षय रोग, और मलेरिया से लड़ने के लिए वैश्विक कोष उपयोगी मॉडल के रूप में काम कर सकती है।

स्वास्थ्य-देखभाल के मज़बूत बुनियादी ढाँचे की स्थापना करने के अतिरिक्त, राष्ट्रीय सरकारों को अपनी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए जवाबदेही वाली प्रणालियाँ विकसित करने की ज़रूरत होगी। इसमें संसाधनों का निष्पक्ष और पारदर्शी नेतृत्व, भ्रष्टाचार-रोधी सुरक्षा उपायों, प्रगति की निगरानी के लिए साधन, सभ्य-समाज की भागीदारी, और विफलताओं के लिए जवाबदेही शामिल हैं।

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इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए, एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन वैश्विक स्वास्थ्य की रूपरेखा के सम्मेलन के लिए ज़ोर दे रहा है, जिसका लक्ष्य स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तरों पर स्वास्थ्य के लिए सुशासन को बढ़ावा देना है। स्वास्थ्य का अधिकार के सिद्धांत पर आधारित संधि, निधियों के आबंटन और अन्य ज़िम्मेदारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करेगी।

पश्चिम अफ़्रीका की इबोला महामारी से अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में कार्रवाई संबंधी सुधार करने की प्रेरणा मिलनी चाहिए, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया के उपायों और स्वास्थ्य-देखभाल के मज़बूत बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया जा सके। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मापनीय, स्थायी निधि प्रदान करने के लिए रूपरेखाएँ तैयार करना विवेकपूर्ण और किफ़ायती निवेश है – ऐसा निवेश जो सभी के हित में है। यह एक ऐसी मानवीय प्रतिक्रिया है जो दुनिया भर में बहुत अधिक लाभ देगी, अब भी और भविष्य में भी।