brics leaders Li Xueren/ZumaPress

BRICS को गंभीरता से लेना

बीजिंग - इस महीने के शुरू में एक शांत शाम को मॉस्को नदी में नौकायन करते हुए, मैंने खुद को चीनी नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) के विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष के साथ गहन बातचीत में पाया। इस बीच, दक्षिण अफ़्रीकी और ब्राज़ील के सांसद रूसी संगीत में झूम रहे थे और गाइड ने उस स्थल की ओर संकेत किया। BRICS देशों - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और, दक्षिण अफ़्रीका - के पहले संसदीय फ़ोरम का ख़ुशनुमा समापन हो चुका था।

बैठक शुरू होने से पहले, बहुत-से लोगों को आश्चर्य हो रहा था कि क्या पाँच संसदों को समान आधार मिल पाना संभव हो सकता है। इस परिदृश्य में भारत की झगड़ालू और गड़गड़ाने वाली लोकसभा, जिसमें भावपूर्ण बहसें और अवरोध होते हैं, की चीन की शिष्ट NPC से क्या समानता हो सकती है, जो कम्युनिस्ट पार्टी के फ़ैसलों के लिए सख़्ती से नियंत्रित गूंज कक्ष है? अनेक लोगों का मानना था कि नए BRICS समूहीकरण में सदस्यता, सहयोग के लिए पर्याप्त मज़बूत आधार प्रदान नहीं करती।

इस तरह के संदेह स्वयं BRICS के समूहीकरण पर आरंभ से ही किए जा रहे थे, जिनमें से कुछ इसे निवेश बैंक द्वारा आविष्कृत एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में नकार रहे थे। विशेष रूप से, BRIC शब्द तत्कालीन-गोल्डमैन सैश के विश्लेषक जिम ओ'नील ने एक दशक से ज़्यादा पहले गढ़ा था, जिन्होंने शुरू में प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणियों में दक्षिण अफ़्रीका की गिनती नहीं की थी।

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