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चीन के फौलादी मुक्के के लिए रेशम का दस्ताना

नई दिल्ली – सालों से, चीन चाह रहा है कि वह दक्षिण एशिया को "मोतियों की माला" से घेर ले: यानी वह इसके पूर्वी तट को इसके मध्य पूर्व से जोड़ने वाले बंदरगाहों का नेटवर्क बना ले जिससे इसकी रणनीतिक ताकत और समुद्री पहुँच बढ़ जाए। इसमें आश्चर्य नहीं है कि भारत और अन्य देशों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

तथापि, चीन अब अपनी इस रणनीति को यह दावा करके छिपाने की कोशिश कर रहा है कि व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बेहतर बनाने के लिए यह इक्कीसवीं-सदी का समुद्री रेशम मार्ग बनाना चाहता है। लेकिन यह दोस्ताना लफ्फाजी एशिया की चिंता को बहुत कम दूर कर पा रही है और उसके परे चीन का रणनीतिक लक्ष्य इस क्षेत्र पर प्रभुत्व जमाना है।

और इस चिंता का ठोस आधार भी है। सीधे शब्दों में कहें, तो रेशम मार्ग की पहल के पीछे चीन का इरादा एशिया और हिंद महासागर के क्षेत्र में एक नए प्रकार का हब बनाने का है। वास्तव में, अनेक पड़ोसियों के साथ क्षेत्रीय और समुद्री विवाद भड़काकर, प्रमुख व्यापार मार्गों के साथ-साथ अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए काम करके, चीन एशिया के भू-राजनीतिक नक्शे को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है।

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  1. bildt69_DELIL SOULEIMANAFP via Getty Images_syriansoldiermissilegun Delil Souleiman/AFP/Getty Images

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