Xi Jinping and Narendra Modi Lan Hongguang/ZumaPress

चीन का भंगुर विकास मॉडल

नई दिल्ली – 1947 में ब्रिटेन से आजादी पाने के बाद, भारत लोकतंत्र के गुणों की दृष्टि से बहुत-कुछ एक उदाहरण की तरह था - यह चीन के बिल्कुल विपरीत था जो 1949 में कम्युनिस्ट तानाशाह बन गया था। 1970 के दशक तक, अक्सर यह तर्क दिया जाता था कि हालांकि दोनों देश चरम गरीबी, अल्प विकास, और रोग से पीड़ित हैं, भारत का मॉडल इसलिए बेहतर था क्योंकि इसके लोग अपने स्वयं के शासकों को चुनने के लिए स्वतंत्र थे।

तथापि, चीन की आर्थिक तेज़ी को देखते हुए, यह वितर्क मान्य होने लग गया है कि दमनकारी राजनीतिक प्रणाली विकास के लिए अधिक अनुकूल होती है। हालांकि चीन का हाल ही का प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन भारत का मॉडल दीर्घावधि में बेहतर सिद्ध होगा।

इस पर बातचीत का रुख 1978 के बाद तब बदल गया जब चीन आर्थिक रूप से भारत से आगे बढ़ गया जिसके कारण बहुत से लोगों ने यह निष्कर्ष निकालना शुरू कर दिया कि भारत का अराजक लोकतंत्र इसके लोगों को आगे बढ़ने से रोक रहा है। इसके बावजूद, यदि चीन के नेता किसी नए छह लेन वाले एक्सप्रेस-वे का निर्माण करना चाहते हैं, तो वे कितने भी गांवों पर बुलडोज़र चला सकते हैं। भारत में, किसी दो लेन की सड़क को चौड़ा करने के मामले में जनता विरोध प्रदर्शनों के लिए उतारू हो सकती है और मामला कई साल तक अदालत में लटका रह सकता है।

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