Crowded urban area in India

चेन्नई चेतावनी

तिरुवनंतपुरम, भारत – दुनिया के नेता जब जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस में बैठक कर रहे थे, उस समय दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी का चेन्नई शहर (पहले का मद्रास), 104 साल में सबसे भारी वर्षा की चपेट में आकर पानी-पानी हो गया। पाँच लाख की आबादी वाला यह शहर पूरी तरह ठप हो गया है, इसकी सड़कों पर पानी भर गया है और लगभग 5,000 घर पानी में डूब गए हैं।  450 से अधिक लोग मर चुके हैं।  हवाई और रेल सेवाएँ निलंबित कर दी गई हैं, बिजली और फोन की लाइनें बंद हो गई हैं, और जीवन रक्षक उपकरणों के काम नहीं कर पाने के कारण अस्पतालों के मरीज़ दम तोड़ रहे हैं।  पीड़ितों को बचाने के लिए भारत की सेना और वायु सेना उन्हें नावों में ले जा रही है।

यह कल्पना करना मुश्किल है कि भारत के चौथे सबसे बड़े शहर के स्कूल, कॉलेज, आईटी कंपनियाँ, कारखाने, और व्यावसायिक प्रतिष्ठान ठप पड़ गए हैं।  और यहाँ तक कि फ़ोर्ड, डेमलर, बीएमडब्ल्यू, और रेनॉल्ट जैसी वैश्विक कंपनियों ने अपने स्थानीय कारखानों में उत्पादन ठप करने का अभूतपूर्व निर्णय ले लिया है।  चेन्नई का प्रतिष्ठित समाचार पत्र द हिन्दू, 178 साल में पहली बार इसका मुद्रित संस्करण इसलिए नहीं निकाल पाया क्योंकि इसके कर्मचारी काम पर नहीं आ पाए थे (हालांकि इसने साहसपूर्वक इसका ऑनलाइन संस्करण तैयार कर लिया)।

अनिवार्य रूप से, विनाशकारी बारिश को दुनिया के मौसम पर मानव की कार्रवाई के भयावह परिणामों के सबूत के रूप में देखते हुए, बहुत से लोगों ने चेन्नई की बाढ़ को पेरिस में हो रही वार्ता से जोड़ा।  उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक पेरिस में विश्व के नेता वैश्विक जलवायु परिवर्तन को सीमित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई नहीं करते तब तक ऐसी और अधिक आपदाओं से बचा नहीं जा सकता।  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई की ओर इशारा करते हुए कहा कि "अब हम जलवायु परिवर्तन के तेजी से बढ़ते प्रभाव को महसूस कर रहे हैं" और उन्होंने औद्योगिक देशों से कहा कि वे ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए और अधिक कार्रवाई करें।

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