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गरीबी रेखा की रणनीति

वाशिंगटन, डीसी - एक लंबे समय तक, पहले कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में और उसके बाद भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में, मैं वैश्विक गरीबी पर विश्व बैंक के आंकड़ों की प्रवृत्तियों पर नज़र रखने और विभिन्न देशों में उनके स्वरूपों का विश्लेषण करनेवाला एक संतुष्ट उपयोगकर्ता था। मैं शायद ही कभी यह सोचने के लिए रुका हूँगा कि उन संख्याओं की गणना किस तरह की जाती है। फिर, तीन साल पहले, मैंने विश्व बैंक में इसके मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में पदभार ग्रहण किया। यह मानो उस ग्राहक की तरह था जो अपने पसंदीदा रेस्तरां में मस्ती से रात के खाने के लिए ऑर्डर दे रहा हो और उसे अचानक रसोई में जाकर भोजन तैयार करने के लिए कहा जाए।

गरीबी मापने के व्यवसाय में होना विश्व बैंक के लिए एक चुनौती है। यदि गरीबी कम हो जाती है, तो आलोचक हम पर आरोप लगाते हैं कि हम अपनी सफलता का प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह बढ़ जाती है, तो वे कहते हैं कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारा कारोबार चलता रहे। और यदि यह वहीं बनी रहती है, तो वे हम पर आरोप लगाते हैं कि हम इन दोनों आरोपों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

Aleppo

A World Besieged

From Aleppo and North Korea to the European Commission and the Federal Reserve, the global order’s fracture points continue to deepen. Nina Khrushcheva, Stephen Roach, Nasser Saidi, and others assess the most important risks.

सौभाग्य से, यह जानकर कुछ राहत मिलती है कि परिणाम चाहे कुछ भी हो, उसके लिए आपकी आलोचना अवश्य की जाएगी। फिर भी, हमारी टीम ने जब इस वर्ष वैश्विक गरीबी रेखा (और ��स प्रकार गरीबी के प्रभाव) को परिभाषित करने की शुरूआत की तो मैं इस वर्ष के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एंगस डीटन की इस चेतावनी टिप्पणी के प्रति पूरी तरह से जागरूक था: "मुझे नहीं लगता कि विश्व बैंक के लिए इस परियोजना के प्रति खुद को इतना प्रतिबद्ध करना बुद्धिमानी का काम है।"

मैं उनके दृष्टिकोण को समझ पाया हूँ: इस वर्ष की गरीबी की गणना विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी। वर्ष 2011 में, नई क्रय शक्ति समानताओं (या पीपीपी, जिनसे अनिवार्य रूप से यह अनुमान लगाया जाता है कि $1 से भिन्न-भिन्न देशों में कितनी खरीद की जा सकती है) की गणना की गई थी, और 2014 में इसके आँकड़े उपलब्ध हो गए थे। यह भी एक कारण था कि इस बात का जायज़ा लिया जाए कि हम किस तरह वैश्विक गरीबी रेखा को समायोजित करेंगे, गरीबी की नई संख्याओं का अनुमान लगाएँगे, और उन्हें अक्तूबर में जारी अपनी वैश्विक निगरानी रिपोर्ट में प्रकाशित करेंगे।

दूसरा कारण यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपने नए सतत विकास लक्ष्यों में चिर गरीबी के उन्मूलन को शामिल किया है। इसका मतलब यह है कि गरीबी रेखा का निर्धारण किस तरह किया जाए इस बारे में हमारा निर्णय शायद न केवल विश्व बैंक के उद्देश्य को बल्कि संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के सभी देशों के विकास एजेंडा को भी प्रभावित करेगा। स्पष्ट रूप से, चूँकि हमने संख्याओं की गणना की थी, इसलिए इसे पूरा करने की हमारी विशेष, और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी थी।

हमारा पहला काम यह देखना था कि वैश्विक गरीबी रेखा इससे पहले कैसे निर्धारित की गई थी। 2005 में, जब क्रय शक्ति की समानताओं के पिछले चरण का अनुमान लगाया गया था, उसमें इस पद्धति का उपयोग किया गया था कि सबसे गरीब 15 देशों की राष्ट्रीय गरीबी रेखाओं को लिया जाए, उनके औसत की गणना की जाए, और उसे वैश्विक रेखा के रूप में माना जाए। इससे $1.25 की वैश्विक गरीबी रेखा प्राप्त हुई। इसके मूल में विचार यह था कि हर वह व्यक्ति गरीब है जिसका पीपीपी-समायोजित दैनिक उपभोग $1.25 से कम है।

इस पद्धति की मान्यता पर सवाल उठाया गया है - और इस बारे में मेरे अपने संदेह हैं। लेकिन प्रारंभिक वर्ष में रेखा कहाँ खींची गई है, यह बात कुछ अर्थों में उतनी महत्वपूर्ण नहीं है। चूंकि गरीबी की कोई विशिष्ट परिभाषा नहीं है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि किसी उचित स्थान तक कोई रेखा निर्धारित की जाए और उसके बाद वास्तविक (मुद्रास्फीति- समायोजित) आधार पर उस रेखा को स्थिर बनाए रखा जाए ताकि समय-समय पर हम दुनिया और अलग-अलग देशों के प्रदर्शन पर नज़र रख सकें।

कुछ आलोचकों का यह तर्क है कि 2005 की $1.25 की गरीबी रेखा बहुत कम थी। लेकिन उन्हें जिस बात पर चिंता करनी चाहिए वह यह है कि वर्ष 2011 में दुनिया की लगभग 14.5% आबादी - हर सात लोगों में से एक - इसके नीचे रह रही थी। यह देखते हुए कि हम पहले से ही 2030 तक चरम, चिर गरीबी को समाप्त करने के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं, हमारा पहला निर्णय गरीबी स्थिरांक को मापने के लिए मापदंड को बनाए रखना था।

चूंकि पीपीपी गणना के दो चरणों के बीच, 2005 और 2011 में, मुद्रास्फीति हुई थी, हमें स्पष्ट रूप से वास्तविक रेखा स्थिरांक को बनाए रखने के लिए सांकेतिक गरीबी रेखा को बढ़ाना होगा। तथापि, पूरी दुनिया के लिए यह कर पाना इतना आसान नहीं है। हमें किन देशों की मुद्रास्फीति का उपयोग करना चाहिए?

हमने दो प्रयोग किए: पहला प्रयोग था 2005 में प्रयुक्त 15 देशों की गरीबी रेखाओं को उन देशों की मुद्रास्फीति दरों का उपयोग करके उन्हें बढ़ाया जाए और फिर उनकी औसत निकाली जाए; दूसरा प्रयोग था कि यही प्रक्रिया उन 101 देशों के लिए अपनाई जाए जिनके लिए हमारे पास आवश्यक आँकड़े उपलब्ध थे। इन दोनों तरीकों से यह रेखा क्रमशः $1.88 और $1.90 तक बढ़ गई।

तथापि, एक तीसरा दृष्टिकोण भी संभव था: गरीबी रेखा को नए पीपीपी आँकड़ों के अनुसार बढ़ाया जाए ताकि वैश्विक गरीबी रेखा का भार अपरिवर्तित बना रहे (क्योंकि पीपीपी से हमें यकीनन विभिन्न देशों में समानता के बारे में पता चलता है और इससे वैश्विक गरीबी के संपूर्ण स्तर में परिवर्तन नहीं होना चाहिए)। इस अभ्यास से - जो सितारों के एक अजीब मिलन की तरह दिखाई देना शुरू हुआ था - $1.90 से थोड़ी अधिक गरीबी रेखा प्राप्त हुई। संक्षेप में, इसे एक दशमलव स्थान तक रखने पर, इन तीनों तरीकों से $1.9 का आँकड़ा प्राप्त हुआ। और हमने इसी रेखा को अपनाया।

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हम हमेशा इतने भाग्यशाली नहीं होंगे कि विभिन्न तरीकों का उपयोग करें और फिर भी लगभग एक ही रेखा पर पहुँचने में कामयाब हों। इसके अलावा, गरीबी को मुद्रा के अतिरिक्त अन्य कई मापदंडों से मापा जा सकता है और मापा जाना चाहिए: जीवन प्रत्याशा, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य, और मानव "कार्यपद्धतियों और क्षमताओं" के कई अन्य मापदंड (जैसा कि अमर्त्य सेन ने उल्लेख किया है) सभी महत्वपूर्ण हैं। भविष्य में इन समस्याओं से निपटने और विश्व बैंक के गरीबी अनुसंधान को व्यापक बनाने के लिए, हमने 24-सदस्यीय वैश्विक गरीबी आयोग की स्थापना की है, जिसकी अध्यक्षता लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स और नफ़ील्ड कॉलेज, ऑक्सफोर्ड के सर टोनी एटकिंसन कर रहे हैं – यह आयोग अगले वसंत में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

गरीबी को मापने पर नेताओं और अकादमिक शोधकर्ताओं दोनों द्वारा ध्यान दिया जाता है - और हमें इन दोनों से पर्याप्त ध्यान मिला। हम गरीबी की राजनीति के प्रति सतर्क थे, लेकिन हमने राजनीतिक प्रचार का विरोध किया। हमने शोधकर्ताओं के सुझावों पर ध्यान दिया, लेकिन हमने अपने विवेक का प्रयोग किया। एक शोधकर्ता इस बात पर अडिग थे कि गरीबी रेखा $1.9149 होनी चाहिए। मैंने निर्णय किया कि अंत के वे तीन अंक हद से कुछ अधिक ही थे।